भूमि घोटाले के मास्टरमाइंड को क्यों बचा रहे सरकार
इस सनसनीखेज मामले की सीबीआई जांच को हुंकारे रघुनाथ
सवालः छोटी मछलियों पर शिकंजा तो बडे मगरमच्छ क्यों आजाद
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। हरिद्वार के नगर निगम में हुये करोडो के घोटाले का सच सामने आने के बाद जनपद के तत्कालीन डीएम और कुछ अफसरों को शासन ने निलम्बित कर दिया था और उसके बाद उसकी जांच कराने का दम भरा था लेकिन राज्य के गलियारों में इस घोटाले को लेकर एक ही बहस चलती आ रही है कि आखिरकार सरकार मास्टरमाइंड को बेनकाब करने के लिए उसकी बडी जांच कराने के लिए आखिर कब आगे आयेगी जिसके चलते इस घोटाले का सारा सच बाहर आ सके? इस घोटाले में मास्टरमाइंड को लेकर लम्बे समय से एक बडी जांच कराने का शोर मच रहा है लेकिन सरकार ने कभी भी इस मामले की जांच किसी भी बडी शाखा से कराने के लिए कोई पहल नहीं की और उसी को लेकर जनसंघर्ष मोर्चा लगातार सरकार को कटघरे में खडा कर रहा है कि आखिरकार मास्टरमाइंड को बचाने के लिए क्यों चुप्पी साधी जा रही है और उसके चलते इसकी उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई जा रही। वहीं सरकार ने अब इस मामले की विभागीय जांच के लिए अपर सचिव डा0 आनंद श्रीवास्तव को जांच अधिकारी नियुक्त किया है और विभागीय जांच के लिए आईएएस सचिन कुर्वे को जांच अधिकारी नामित किया है लेकिन जनसंघर्ष मोर्चा ने घोटाले के मास्टरमाइंड को लेकर सरकार को कटघरे में खडा कर दिया है और कहा है कि आखिर सरकार इस मामले में मास्टरमाइंड को क्यों बचा रही है तो वहीं उसका खुला आरोप है कि सरकार छोटी मछलियों पर शिकंजा कस रही है तो बडे मगरमच्छों पर क्यों शिकंजा नहीं कसा जा रहा है? जनसंघर्ष मोर्चा ने इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर अपनी गेंद मुख्यमंत्री के पाले में डाल दी है।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि हरिद्वार ,नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में छोटी मछलियों (अधिकारियों) पर शिकंजा कसने के लिए सरकर ने अलग-अलग जांच अधिकारी नियुक्त किए हैं, जोकि सराहनीय कदम है, लेकिन मुख्य मास्टरमाइंड, मगरमच्छ अधिकारी, जिसने घोटाले को अंजाम दिया, आज तक सरकार द्वारा शिकंजे में नहीं लिया गया। ऐसे महाभ्रष्ट अधिकारी को, जिसके इशारे पर यह सारा खेल रचा गया, को बर्खास्त किया जाना चाहिए तथा इन पर शिकंजा कसने व घोटाले के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ सरकार को सीबीआई जांच कराने की दिशा में कार्रवाई करने तथा एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए।
नेगी ने कहा कि उक्त घोटाले में सरकार में अच्छी दखल रखने वाले मास्टरमाइंड, जालसाज अधिकारी के निर्देश व दबाव के कारण ही इस घोटाले को अंजाम दिया गया। यह अलग बात है कि अधिकारियों ने दबाव में आकर यह घोटाला किया, जिसमें इनको निलंबित कर दिया गया एवं विजिलेंस जांच के आदेश भी सरकार द्वारा दिए गए ,जोकि सराहनीय कदम है ,लेकिन असली मास्टरमाइंड के खिलाफ कार्रवाई न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सूत्र बताते हैं कि उक्त मास्टरमाइंड अधिकारी द्वारा जिलाधिकारी, एसडीएम, नगर आयुक्त व अन्य अधिकारियों पर दबाव बनाकर इनको नियम विरुद्ध काम करने व काम जल्दी निपटाने के निर्देश दिए गए थे। नेगी ने कहा कि सवाल इस बात का है कि उक्त अधिकारियों द्वारा कैसे कूड़े के ढेर से लगती हुई कई बीघा भूमि का लैंड यूज चेंज कर 14 करोड़ की भूमि 54 करोड़ में रातों-रात खरीद ली गई, जिससे सरकार को लगभग 40 करोड रुपए की चपत लगी।
नेगी ने कहा कि वैसे तो उक्त घोटाले की जांच आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान द्वारा की जा चुकी है, जिसके परिणाम स्वरूप कुल मिलाकर बारह अधिकारियों को निलंबित, सेवा विस्तार समाप्त किया जा चुका है। अब तक उक्त घोटाले में इन अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक आपराधिक षड्यंत्र व भ्रष्टाचार निवारण एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हो जानी चाहिए थी ,लेकिन नहीं हुई। नेगी ने कहा कि उक्त जालसाज अधिकारी के कुकर्मों का दंड ये अधिकारी भुगत रहे हैं, जिनको निलंबित किया जा चुका है। उक्त जालसाज अधिकारी ने सरकार की छवि को धूमिल करने का काम किया है। मोर्चा सरकार से आग्रह करता है कि न्याय के सिद्धांत के दृष्टिगत शीघ्र उक्त जालसाज, मास्टरमाइंड अधिकारी को बर्खास्त कर इस पूरे गिरोह के खिलाफ सीबीआई जांच व भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई करे। पत्रकार वार्ता में हाजी असद व अमित जैन मौजूद थे।

