प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में एक नई राजनीतिक परिभाषा को फलीभूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने जिस विजन के साथ अपने कदम आगे बढा रखे हैं उससे उत्तराखण्ड भाजपा एक नये संचार के साथ आवाम के बीच खडी हुई दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में सरकार व संगठन को एक नाव मे सवार करके यह दिखा दिया है कि जब सरकार व संगठन एक साथ आगे बढती है तो कोई भी समुद्र या नदी उस नाव को डूबा नहीं सकता? मुख्यमंत्री ने संगठन को साथ लेकर चलने का जो हुनर चार साल से दिखा रखा है उसी का परिणाम है कि आज राज्य के अन्दर हर चुनाव में सरकार व संगठन एक साथ आकर विपक्ष को चुनावी रणभूमि में ढेर करने के मिशन में आगे बढी हुई है और हर चुनाव में कमल ही कमल खिल रहा है। मुख्यमंत्री का हमेशा मानना रहा है कि संगठन का कार्यकर्ता पार्टी की ताकत होता है और कार्यकर्ताओं के बल पर ही सरकारें बना करती हैं। मुख्यमंत्री अपने शासनकाल में पार्टी व संगठन के छोटे से लेकर बडे कार्यकर्ता को जिस अंदाज में अपने करीब लाने के लिए उन्हें एकसूत्र मे बांध रखा है वह किसी से छिपा नहीं है और जब केदारनाथ उपचुनाव हुआ तो सरकार और संगठन ने एक सूत्र में बंधते हुए चुनाव संग्राम को फतेह कर विपक्ष को यह आईना दिखा दिया था कि सरकार और संगठन एक साथ खडे हैं और राज्य के विकास मे भी वह एक साथ रहकर उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजनीति की उस किताब को पढा है जिसमें यह दर्शाया गया कि किस तरह से एक राजनेता सफलता की सीढी पर आगे बढ सकता है। मुख्यमंत्री ने सियासत मे एक नई अलख जगाने के लिए आवाम को अपना परिवार माना और उन्होंने यह साफ संदेश दे दिया था कि वह जननायक के रूप में आवाम के सेवक बनकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री को इस बात का इल्म था कि उत्तराखण्ड को हासिल करने वाली मातृशक्ति राज्य की भाग्यविधाता है और उसी के चलते मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति को स्वरोजगार की दिशा में आगे ले जाने का जो हुनर दिखा रखा है उससे आज पहाडों में मातृशक्ति स्वरोजगार के बल पर अपने हुनर का डंका बजा रही हैं। मुख्यमंत्री ने पहाडी जनपदों में मातृशक्ति को स्वरोजगार से जोडने के लिए सरकार की ओर से उन्हें जो सुविधायें देने का सिलसिला शुरू कर रखा है उससे आज पहाडों में मातृशक्ति मुख्यमंत्री की स्वरोजगार योजना को लेकर खूब उत्साहित हैं और यही कारण है कि आज मुख्यमंत्री को मातृशक्ति उत्तराखण्ड का एक नया भाग्य विधाता मान चुकी है।
उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले पुष्कर सिंह धामी शुरूआती दौर मे भाजपा युवा प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के दौरान युवा पीढी को साथ लेकर पार्टी को एक नई ऊर्जा देने के लिए हमेशा आगे बढते थे। पुष्कर सिंह धामी ने उस दौर मे युवाओं के बीच अपनी जो एक बडी पैठ बनाई थी उसी का नतीजा है कि जब पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनाया गया तो सबसे ज्यादा जोश भाजपा के युवा कार्यकर्ताओं मे देखने को मिला था। भाजपा के छोटे से छोटे कार्यकर्ताओं के बीच सीधी पकड बनाने वाले पुष्कर सिंह धामी जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हुये तो उन्होंने अपने पुराने दौर के सभी युवाओं को संदेश दिया था कि सबने एक साथ मिलकर सरकार के विजन को आगे बढाना है। मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल मे भाजपा के छोटे से छोटे कार्यकर्ता से लेकर बडे-बडे राजनेताओं को एकसूत्र मे बांधकर मुख्यमंत्री चार साल से राजनीति के सफल दौर से अपना सफर आगे बढा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने अब तक के कार्यकाल मे सरकार और संगठन को साथ लेकर चलने मे ही विश्वास दिखाया है और उनके शासनकाल मे कभी भी सरकार व संगठन के बीच तिनकाभर भी टकराव देखने को नहीं मिला।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल मे भाजपा के हर छोटे-बडे कार्यकर्ता को एक बडे सम्मान के साथ उसे अपना आशीर्वाद दिया हुआ है और उनके दरबार मे भाजपा का छोटे से बडा कार्यकर्ता भी उनसे मिलने मे कभी कोई दिक्कत नहीं रहती क्योंकि मुख्यमंत्री अपनो से हमेशा मिलने के लिए अगली पक्ति मे खडे रहते हैं। मुख्यमंत्री आज के इस दौर मे एक जन नायक के रूप मे आवाम के सामने खडे हैं और आवाम सिर्फ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ही अपना रक्षक मानकर उनमे अपनी आस्था दिखा रही है तो वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी भाजपा को एकसूत्र मे बांधकर आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा हाईकमान मुख्यमंत्री की राजनीतिक कला से काफी प्रभावित हैं क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म हो चुका है कि पुष्कर सिंह धामी सरकार और संगठन को एक सूत्र में पिरोकर उत्तराखण्ड को एक नई दिशा में आगे ले जा रहे हैं। धामी की राजनीतिक कला भाजपा सियासत में सुपर दिखाई दे रही है और उसी के चलते विपक्ष को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संगठन के साथ मिलकर जिस तरह से चुनावी रणभूमि में ढेर कर दिया उससे साफ हो गया कि मुख्यमंत्री एक कुशल राजनेता ही नहीं बल्कि राजनीति के बडे चाणक्य बन गये हैं।

