देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के धाकड़, बेदाग और निडर होकर सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री ने जिस विजन से सरकार चलाने का दौर शुरू किया हुआ है उससे बडे-बडे राजनेताओं और सफेदपोशों के भ्रष्टाचार और दलाली का खेल बंद हो चुका है और उसके चलते वह खूब बिलबिलाते हुए अफवाहों का ऐसा शोर मचा रहे हैं जिसे आवाम अपनी जूती के नीचे खूब कूचल रहा है और उनका मानना है कि राज्य के मुख्यमंत्री एक लम्बे दशक तक उत्रतराखण्ड के सरताज बने रहेंगे। मुख्यमंत्री का दिल अजीज रूप आपदा में उस समय देखने को मिला जब उत्तराखण्ड के गढवाल व कुमांऊ में बडी आपदाओं के बीच आपदा पीडितों के दर्द का हमदर्द बनने के लिए खुद मुख्यमंत्री मोर्चे पर आगे बढे और यही कारण है कि आज आपदा पीडितों के बीच यही शोर मच रहा है कि उनका हमदर्द एक ही है पुष्कर धामी… पुष्कर धामी। मुख्यमंत्री ने जिस दरियादिली के साथ आपदा पीडितों के सामने जाकर उनके आसुओं को पोछने के लिए अपने सीने से लगाया उस भावुक पल को देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूका कि ऐसा मुख्यमंत्री अगर उत्तराखण्ड को एक दशक पहले मिल गया होता तो आज उत्तराखण्ड की तकदीर और तस्वीर में चार चांद लग गये होते। मुख्यमंत्री ने मात्र चार सालों में आवाम का जो दिल जीता है उसकी गूंज हमेशा देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के सामने गूंजती आ रही है और इसी के चलते मोदी कैबिनेट उत्तराखण्ड की झोली में बडी से बडी योजनायें और आपदा की राशि देने के लिए अगली पक्ति में आकर खडी हो गई हैं।
उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी, चमोली, पौडी, रूद्रप्रयाग में जब बादल फटने से तबाही मची तो उसको देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वहां आपदा पीडितों का दर्द हरने के लिए उनके हमदर्द बनकर उनके बीच पहुंचे और उन्होंने आपदा पीडितों को अपने सीने से लगाकर उन्हें वचन दिया कि वह उनके साथ खडे हैं। मुख्यमंत्री ने थराली, धराली, पौडी और कुमांऊ के बागेश्वर, अल्मोडा में आई आपदा के बीच अकेले मोर्चा संभाला और वह आपदा पीडितों के बीच उनका दर्द हरने के लिए उनके साथ अभेद होकर खडे हुए और पहली बार ऐसा देखने को मिला जब आपदा के चंद दिन बाद ही आपदा पीडितों को लाखों-लाखों रूपये की आपदा राशि देकर उन्हें यह संदेश दे दिया कि वह उनके साथ खडे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर जितनी बडी दैवीय आपदा आई उन सब आपदाओं में युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी खुद अगली पक्ति में खडे हुये और सरकार के मंत्री व विधायक आपदा स्थलों पर आवाम का दर्द हरने के लिए भले ही वहां मोर्चा संभालने नहीं पहुंचे लेकिन राज्य की जनता को अपना परिवार मानने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आपदा का दर्द हरने के लिए आपदा पीडितों के बीच उनके हमदर्द बनकर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर जब खडे हुये तो हर कोई यह कहने से नहीं चूका कि यह मुख्यमंत्री तो सबसे निराला है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस दिन से सत्ता संभाली है उस दिन से उन्होंने एक ही संकल्प लिया हुआ है कि वह राज्यहित में काम करेंगे और कुर्सी पर बने रहने के लिए वह कभी भी आवाम से मुंह नहीं मोडेंगे। आज उत्तराखण्ड की जनता मुख्यमंत्री की सादगी और उनके द्वारा किये जा रहे विकास का जो आईना देख रही है उसको देखते हुए हर तरफ एक ही आवाज सुनाई दे रही है कि मुख्यमंत्री ने अपनी बेदाग छवि से उत्तराखण्ड को जो एक नई पहचान देने का काम किया है उसके चलते आज उत्तराखण्ड हर तरफ गुलजार होता हुआ नजर आ रहा है। गजब की बात तो यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के हर जिले को चमन बनाने के लिए आगे बढे हुये हैं और उनके शासनकाल में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ जो एक बडी जंग लडने का ऑपरेशन चल रहा है उसको देखते हुए उत्तराखण्ड की जनता को यह आभास हो चुका है कि जिस तरह से देश के सैनिक बॉडर पर देशवासियों की रक्षा करते हैं उसी तरह से सैनिक पुत्र पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड की रक्षा करने के लिए रात-दिन एक किये हुये हैं। मुख्यमंत्री ने दलालों और भ्रष्टाचारियों की नाक मे ंनकेल डालने का जो दौर शुरू किया हुआ है उसके चलते मुख्यमंत्री हमेशा उनके निशाने पर रहते हैं और यह भ्रष्टाचारी मौका पाते ही मुख्यमंत्री के खिलाफ साजिशों का वो भोपू बजाने लगते हैं जिसे सुनकर आवाम ऐसे भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के लिए खुद आगे बढने का संकल्प लेने को मजबूर हो रही हैं।

