खोजी पत्रकारिता के भीष्म पितामह को किया याद

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देहरादून(नगर संवाददाता)। उत्तराखंड में खोजी पत्रकारिता के भीष्म पितामह के नाम से विख्यात वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय जगमोहन सेठी के जन्मदिन को उनके सुपुत्रों एवं पत्रकारों ने धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया और इस अवसर पर संगोष्ठी और पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सभी ने स्वर्गीय जगमोहन सेठी के साथ बिताये हुए पलों को याद कर एक दूसरे के साथ साझा किये।
यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब एवं स्वर्गीय जगमोहन सेठी परिवार के संयुक्त रूप में उनके जन्मदिन पर स्मृति संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्य उच्च शिक्षा उन्नयन के उपाध्यक्ष दर्जाधारी राज्यमंत्री एवं शिक्षाविद डा. देवेन्द्र भसीन ने स्वर्गीय जगमोहन सेठी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उनका सेठी परिवार से शुरू से ही पारिवारिक रिश्ता रहा है और उनके दोनों पुत्रों प्रोफेसर डा. गिरीश सेठी एवं अधिवक्ता योगेश सेठी की विरासत को आगे बढाया है और योगेश सेठी एक नामचीन अधिवक्ता है जो अपने पिता स्वर्गीय जगमोहन सेठी के सामने शांत भाव से रहते थे। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय जगमोहन सेठी को खोजी पत्रकारिता का जनक कहा जाता था और उनकी लेखनी में काफी दम था और उनके सूत्र बेहतर खतरनाक थे जिसको उन्होंने कभी किसी को भी नहीं बताया। उन्होंने कहा कि वह अपनी पत्रकारिता साहस पूर्ण तरीके से करते थे और शासन प्रशासन भी उनसे जानकारी लेते थे और उनके जो सूत्र थे वह गहराई के थे और उनकी लेखनी के तीर गहरे चुभते थे और वह एक एग्रेसिव पत्रकार थे।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय सेठी ने अनेक समाचार पत्रों में अपनी लेखनी के माध्यम से तहलका मचा देते थे और वह अपने एजेंडे पर पत्रकारिता करते रहे। उन्होंने कहा कि पत्रकार के रूप में उनका अलग अलग व्यक्तित्व था और राज्य प्राप्ति आंदोलन में भी शामिल हुए और अपना योगदान दिया और उनमें व्यक्तित्व उभर कर आता था लेकिन कभी भी किसी से कोई समझौता नहीं किया और आज हमें भी स्वर्गीय जगमोहन सेठी की भांति सूत्र विकसित करने होंगें और आज पत्रकारिता का दौर पूर्व की भांति बेहतर नहीं रहा युवा साथी भी इसे स्वीकार करते है। इस अवसर पर स्वर्गीय जगमोहन सेठी के बड़े सुपुत्र प्रोफेसर डा. गिरीश सेठी ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपने पिता को याद किया और कहा कि वह अपने पिता की बातों का हर समय पालन करते थे और उनके दिये संस्कारों के साथ आज वह काम कर रहे है और पिता की निर्भिक पत्रकारिता के वह कायल रहे। उन्होंने कहा कि एक बार स्वर्गीय पिता पर फायरिंग भी हुई थी। उन्होंने कहा कि व्यवस्था से कभी समझौता नहीं किया और कभी भी अपने को किसी लेखनी में सरेंडर नहीं किया और लेखनी को दमदार तरीके से आगे बढ़ाते चले गये।
उन्होंने कहा कि उनके पिता की लेखनी में रोचकता होती थी और बिना किसी तथ्य के कभी नहीं लिखते थे। उन्होंने कहा कि कलम के दायरे में उनका कोई अंतर नहीं था और उनका प्रेस क्लब से अलग ही लगाव था और उन्होंने कभी अपने प्रोफेसनल के साथ समझौता नहीं किया और उनका हमेशा सभी को आशीर्वाद मिलता रहेगा।
इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त योगेश भटट ने कहा है कि स्वर्गीय जगमोहन सेठी के सुपुत्रों ने मंच को एकत्रित कर एक साथ याद करने का अवसर दिया है और शायद हम तो भूल ही गये थे और उनका सानिध्य प्राप्त हुआ लेकिन काम करने अवसर नहीं मिला और उनकी पत्रकारिता उस दौर में चरम पर थी। उन्होंने कहा कि शासन प्रशासन में दहशत होती थी कल स्वर्गीय जगमोहन सेठी की कलम से कौन से खबर आ जाये। वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रावत ने कहा कि स्वर्गीय जगमोहन सेठी सभी के प्रेरणास्त्रोत रहे है और उन्होंने पत्रकारिता को सम्मान दिया और व्यवसाय के रूप में कभी नहीं लिया। उन्होंने उनके साथ बिताये हुए पलों को याद किया और कहा कि उस समय के दौर के कई पत्रकार दिवंगत हो गये।
उत्तराखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने स्वर्गीय जगमोहन सेठी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि आज उनके दोनों पुत्र अपने पिता के बताये हुए मार्ग पर चल रहे है और जिस प्रकार से योगेश सेठी ने वकालत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और उसी प्रकार बड़े भाई प्रोफेसर डा. गिरीश सेठी भी उन्हीं के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहे है।
वरिष्ठ पत्रकार नवीन थलेडी ने स्वर्गीय जगमोहन सेठी के साथ बिताये हुए संस्मरणों को याद करते हुए कहा है कि वर्ष 1989 का दौर था तब स्वर्गीय जगमोहन सेठी के सवाल ऐसे होते थे कि सामने वाला जवाब नहीं दे पाता था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के समय में डीजीपी रहे शैलेन्द्र सागर की पत्रकारवार्ता से पहले ही उन्होंने ऐसे सवाल दागे की डीजीपी उत्तर नहीं दे पाये और प्रेसवार्ता समाप्त हो गई।
थलेडी ने कहा कि वह पत्रकारिता के क्षेत्र में नये नये आये थे और समझ नहीं पाते थे कि यह क्या हो गया और बाद में अनुरोध किया गया कि पहले हमें सवाल पूछने दो तो वह मान गये तब जाकर हम समाचार बना पाये।
उन्होंने कहा कि आज भी मन में एक टीस है की वह स्वर्गीय जगमोहन सेठी के जीवित रहने पर परिवार सहित उनके आवास पर नहीं जा पाये। उन्होंने कहा कि उम्रदराज होने के बाद भी वह हर समय एक्टिव रहते थे और खबरों में तल्लीन रहते थे। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने कहा है कि पुराने दौर की पत्रकारिता में आज की पत्रकारिता में काफी अंतर आ गया है और कहा कि आज की स्थिति कुछ अलग है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का पुराना, वर्तमान दौर को भी याद करने की जरूरत है।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व समाजसेवी आर्येन्द्र शर्मा ने कहा कि उनका सेठी परिवार से पारिवारिक रिश्ता रहा है और उन्होंने स्वयं ही पत्रकारिता के कई दौर देखे लेकिन स्वर्गीय जगमोहन सेठी की पत्रकारिता खोजी पत्रकारिता होती थी और उनकी लेखनी में काफी दम था। उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता कुछ और हो सकती है। प्रेस क्लब के अध्यक्ष भूपेन्द्र कंडारी ने कहा है कि स्वर्गीय जगमोहन सेठी हिन्दी पत्रकारिता में एक जाना माना नाम था।
उन्होंने कहा कि सरकारों को भी कटघरे में खड़ा करने का स्वर्गीय जगमोहन सेठी ने काम किया है और उत्तराखंड राज्य प्राप्ति आंदोलन के दौरान अपनी लेखनी से धार दी और उनके साथ रहकर काफी कुछ सीखने का मौका मिला। इस अवसर पर जगमोहन सेठी स्मृति सम्मान से राज्य सूचना आयुक्त योगेश भटट, वरिष्ठ पत्रकार डा. देवेन्द्र भसीन, जय सिंह रावत, अनुपम त्रिवेदी, नवीन थलेडी, राजेश शर्मा, ज्योत्सना, एस पी उनियाल, पारितोष किमोठी, नीरज कोहली, डी एस कुंवर, नरेन्द्र सेठी, विनोद पुंडीर, बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, बार काउंसिल अध्यक्ष राकेश गुप्ता को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर संगोष्ठी का संचालन प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष अनिल चंदोला ने किया। इस अवसर पर स्वर्गीय जगमोहन सेठी के सुपुत्र प्रोफेसर डा. गिरीश सेठी, अधिवक्ता योगेश सेठी के साथ प्रेस क्लब कनिष्ठ उपाध्यक्ष सुलोचना पयाल, वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन लखेडा, शूरवीर भंडारी, असद खान, के एस बिष्ट, राज किशोर तिवारी, मनवर सिंह रावत, किशोर रावत, दीपक फरस्वाण, रमन जायसवाल, अभय कैंतुरा, अनुपम सकलानी, दरबान सिंह रावत सहित अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।

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