कहां हो मेरे भाईयों….

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उत्तरकाशी(संवाददाता)। पांच अगस्त को धराली में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा से लापता लोगों के परिजन अपनों की तलाश में पिछले पांच दिनों से पतथराई आंखों से गंगा की तेज लहरों को निहार रहे है। आज रक्षाबंधन का सनातन धर्म में भाई बहनों का पवित्र त्यौहार है। दो बहिनें हैं राखी और माया3राखी धराली की तो माया देहरादून की रहने वाली हैं। दोनों ही बहने पिछले पांच दिनों से अपने भाई को फोन कर रहे फोन नहीं लग रहा। आज रक्षाबंधन पर आँसुओं के सैलाब के बीच अपने भाईयों को खोजने धराली पहुँच गई है।
यह घटना एक मार्मिक (प्रेरणादायक) है, जो भाई-बहन के प्रेम और स्नेह को दर्शाती है।  यह याद दिलाता है कि भाई-बहन का रिश्ता कितना खास होता है। बता दें कि धराली की आपदा ने लोगों की आजीविका चलाने वाले घर, होटल , होमस्टे दुकान, सेब के बागवान को जमींदोज कर दिया है, बहुतों को हमेशा हमेशा के लिए अपनों से भी दूर कर दिया3महज 34 सेकंड के उस जल सैलाब ने धराली का नक्शा तो बदल ही दिया, लेकिन बहुतों की जिंदगी भी तबाह कर दी3जो गए सो गए, लेकिन जो रह गए, उनके हिस्से कभी न भुलाया जाने वाला दुरूख और अपनों को खोने का दर्द रह छोड़ दिया है3ऐसा दर्द जिसकी कोई दवा नहीं3ऐसा दुरूख जिसकी कोई कभी भी कोई भरपाई नहीं कर सकता है।
दो बहिनें हैं राखी और माया राखी धराली की तो माया देहरादून की रहने वाली हैं। दोनों ही रक्षाबंधन पर आँसुओं के सैलाब के बीच अपने भाईयों को खोजने धराली पहुँच गई है। जिला प्रशासन भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र तो नहीं बँधा पाया, लेकिन उसने इतना रहम जरूर दिखाया कि पिछले पाँच दिनों से भाई को खोजने धराली जाने के लिए गुहार लगा रही इन बहिनों को उत्तरकाशी के मातली से रक्षाबंधन पर हेलीकॉप्टर से धराली भेज दिया। ईश्वर करे दोनों बहनों के धराली पहुँचों तो दुरूख के ये आँसू, मन की वो अथाह पीड़ा, वो दर्द- खघ्ुशी में तब्दील हो जाएँ3और हमेशा की तरह आप अपने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँध सके और भाई-बहन का रिश्ता को निभा सकें।

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