निर्वाचन आयुक्त और सचिव को पद से हटाया जाये

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर उच्च न्यायालय ने जो अपना रूख साफ किया है उससे निर्वाचन आयोग पर सवालिया निशान लग रहे हैं और सोशल मीडिया पर निर्वाचन आयोग को कटघरे में खडा किया जा रहा है कि उसने जिस तरह से न्यायालय में अपने पक्ष को मजबूती से नहीं रखा उसके चलते पंचायत चुनाव को लेकर कुछ संशय बना हुआ है और अब भाकपा(माले) ने सवाल दागा है कि जिस तरह से निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया का माहौल बना दिया है उसके लिए जिम्मेदारी तय करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त और आयोग के सचिव को तत्काल पद से हटाया जाये।
भाकपा(माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि पंचायत चुनावों के बारे में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल किये गए स्पष्टता प्रार्थना पत्र पर टिप्पणी करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा 11 जुलाई को निर्वाचन आयोग के 6 जुलाई के पत्र पर जो रोक लगाई गयी थी, उसे कायम रखा गया है। इसका स्पष्ट आशय है कि नगर निकाय की मतदाता सूची में जिनका नाम है, पंचायत चुनाव लडऩे की उनकी पात्रता संदेह के घेरे में है। ऐसे लोगों के चुनाव में भाग लेने पर उच्च न्यायालय की मोहर लगवाने की कोशिश को न्यायालय ने धराशायी कर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद उत्तराखंड निर्वाचन आयोग कानूनी हार के मुहाने पर पहुंच चुका है और नैतिक पराजय तो उसकी हो ही चुकी है। उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम के दायरे के बाहर जा कर उत्तराखंड निर्वाचन आयोग जो भी कृत्य कर रहा है, वो सत्ता पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए ही कर रहा है तो उत्तराखंड निर्वाचन आयोग की नैतिक पराजय की हिस्सेदार उत्तराखंड की सत्ता में बैठी हुई भाजपा भी है।
इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए चल रहे चुनाव की प्रक्रिया में दखल देने से इंकार किया है लेकिन उत्तराखंड निर्वाचन आयोग और उसके अधीन काम कर रहे निर्वाचन अधिकारी तो गाहे- बगाहे निर्वाचन की प्रक्रिया में दखलंदाजी कर ही रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण न्यायालय का बहाना बना कर निर्वाचन प्रतीकों के आवंटन की तिथि को एक दिन बढ़ा दिया है। जब निर्वाचन आयोग बार-बार बेवजह मनमाने हस्तक्षेप कर सकता है तो उच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद दो जगह नाम वालों के नाम खारिज करने का कदम भी उसे उठाना ही चाहिए। जिस तरह उत्तराखंड निर्वाचन आयोग ने पूरी चुनाव प्रक्रिया का मखौल बना दिया है, उसके लिए जिम्मेदारी तय करते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार और आयोग के सचिव राहुल गोयल को तत्काल पद से हटाया जाए। उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम का पूर्णरूपेण पालन सुनिश्चित करवाया जाए।

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