सीएम धामी ने खटीमा में की धान रोपाई

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उधमसिंहनगर(संवाददाता)। सैनिक पुत्र चार साल से धाकड अंदाज में सरकार चलाते-चलाते आज उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी एक बडी पहचान दबंग राजनेता के रूप में बना चुके हैं। उत्तराखण्ड की जनता अब मुख्यमंत्री को धरतीपुत्र मानकर उन्हें अपना एक लम्बे दशक तक शासक मानने के लिए आगे आ चुकी है और उसका मानना है कि मुख्यमंत्री का राज्यवासियों और राज्य के प्रति दिख रहा असीम प्रेम यह बताने के लिए काफी है कि वह एक बडे विजन के साथ रात-दिन उत्तराखण्ड के विकास के लिए ही आगे बढते जा रहे हैं। एक दशक पूर्व फिल्मी पर्दे पर आई नायक में एक दिन के मुख्यमंत्री बने हीरो ने जिस अंदाज में भ्रष्टों के खिलाफ कार्यवाही की और आम जनमानस के साथ खडे होकर वह उनके दिलों में बसे उसकी याद उत्तराखण्ड में धरातल पर मुख्यमंत्री सच करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उत्तराखण्ड का नायक धरतीपुत्र के रूप में आवाम के सामने जब किसान बनकर खेतों में उतरा और उन्होंने किसानों के साथ मिलकर धान के खेत की रूपाई करी तो उसे देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूका कि उत्तराखण्ड का धरतीपुत्र राजनीति में जहां एक बडा इतिहास रचने के लिए आगे आ गया है तो वहीं आवाम के दिलों में उन्होंने जो छाप छोडी है उससे उनकी राजनीति चमकते चांद की तरह नजर आ रही है।
खटीमा के नगरा तराई क्षेत्र में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को अपने खेत में धान की रोपाई कर किसानों के परिश्रम, त्याग और समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि खेतों में उतरकर पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नदाता न केवल हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति और परंपराओं के संवाहक भी हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत “हुड़किया बौल” के माध्यम से भूमि के देवता भूमियां, जल के देवता इंद्र और छाया के देवता मेघ की वंदना भी की। मुख्यमंत्री के इस सांस्कृतिक जुड़ाव और कृषकों के साथ आत्मीय सहभाग ने क्षेत्रीय जनता को गहरे स्तर पर प्रेरित किया। मुख्यमंत्री धामी की यह पहल उत्तराखंड की ग्रामीण संस्कृति, कृषकों की अहमियत और पारंपरिक लोककलाओं के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।

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