सियासत में लम्बी लकीर खींचते धामी

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड़ को बने पच्चीस साल हो गये और किसी भी सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री ने आम जनमानस के बीच अपने आपको नहीं रखा और वह आवाम से दूर रहकर ही सरकार चलाने में हमेशा आगे रहे जिसके चलते वह अपनी छवि सिर्फ एक राजनेता के रूप में ही बनाते चले गये। वहीं अपने जीवनकाल में एक बार भी मंत्री न बनने वाले युवा विधायक को जब भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कमान सौंपी तो हर तरफ राजनेताओं और आवाम में यही बहस उठ खडी हुई थी कि सरकार चलाने का अनुभव न रखने वाले राजनेता को सीधे मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई तो क्या वह बेहतर अंदाज में सरकार चला पायेंगे? राजनेताओं और आवाम की इस सोच को देखते हुए मुख्यमंत्री ने फलावर और फायर रूप अपनाकर सत्ता चलाने का जो दौर शुरू किया उससे वह आवाम के दिलों में बसते चले गये और अपराधियों, माफियाओं, भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों को मुख्यमंत्री का फायर रूप चार साल से उन्हें खूब डरा रहा है और आज मुख्यमंत्री ने राजनीति में इतनी लम्बी लकीर खींच दी है जिसे लांघ पाना शायद किसी भी राजनेता के बस में नहीं होगा? मुख्यमंत्री ने बच्चे से लेकर बडे-बूढों के बीच अपने आपको जिस रूप में सामने रखा है उससे हर तरफ उनकी राजनीति का डंका बजता जा रहा है और विपक्ष को यह समझ ही नहीं आ रहा है कि वह आखिरकार 2०27 के विधानसभा चुनाव में कैसे फलावर और फायर अंदाज में सरकार चला रहे मुख्यमंत्री की जीत के सफर को रोक पायेंगे?
उत्तराखण्ड़ की एक करोड से ज्यादा जनता ने कभी सपने में भी यह नहीं सोचा था कि एक दौर ऐसा आयेगा जब उन्हें दिल अजीज मुख्यमंत्री मिलेगा जो सबका साथ सबका विकास के साथ आगे बढ निकलेगा। उत्तराखण्ड की कमान जिस दिन से युवा राजनेता पुष्कर ंिसह धामी को मिली उस दिन से ही उन्होंने संकल्प ले लिया था कि वह राज्य का मुख्यमंत्री बनकर नहीं बल्कि आम जनमानस का जनसेवक बनकर सरकार चलायेंगे। मुख्यमंत्री के इस वचन से आम जनमानस को शुरूआती दौर में तो यकीन नहीं हुआ कि मुख्यमंत्री एक जनसेवक के रूप में ही सत्ता चलायेंगे लेकिन उन्होंने अपना वचन निभाते हुए जनसेवक बनकर सरकार चलाने का जो दौर शुरू किया उसने बडे-बडे राजनेताओं और सफेदपोशों की नींद उडाकर रख दी क्योंकि उन्हें पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐसा राजनेता दिखाई देने लगा जो एक विजन के साथ उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में इतनी तेजी से आगे बढ जायेगा जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बताये मार्ग पर चलने का जो सिलसिला शुरू किया उसके चलते राज्य की जनता उनके कामों की मुरीद होती चली गई और आज राज्य के अन्दर हर तरफ युवा मुख्यमंत्री का बडा डंका बजता हुआ नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अपने शासनकाल में कभी भी द्वेष भावना से काम नहीं किया और हैरानी वाली बात तो यह है कि विपक्ष के काफी नेता भी मुख्यमंत्री की स्वच्छ और पारदर्शी शैली के कायल हो रखे हैं। मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया हुआ है कि राज्य का विकास करना ही उनका पहला और अंतिम विजन है और उत्तराखण्ड को तेजी के साथ विकास की उस ऊचाई पर ले जाना है जहां वह बाइस सालों में नहीं पहुंच पाया था। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने राजनीति में आज इतनी लम्बी लकीर खींच दी है कि उसे देखकर हर कोई यह मान चुका है कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी एक बडी सोच के राजनेता हैं। सैनिक पुत्र होने के नाते उनका हमेशा सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों से बेहद लगाव देखने को मिलता आ रहा है तो वहीं राज्य के आंदोलनकारियों और उनके परिजनों को हमेशा एक बडा सम्मान देने के लिए मुख्यमंत्री हमेशा अगली पक्ति में खडे हुये नजर आते हैं जिसके चलते उन्हें उत्तराखण्ड का जननायक मान लिया गया है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को शांत प्रदेश बनाने के लिए जिस विजन के साथ अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ सीधा जंग का ऐलान कर रखा है उसके चलते आज हर तरफ अपराधियों और माफियाओं में खलबली मची हुई है कि अगर उन्होंने उत्तराखण्ड के अन्दर कोई भी अपराध करने का दुसाहस किया तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा। मुख्यमंत्री ने सियासत में जो एक लम्बी लकीर खींची है उसे देखकर भाजपा के एक्स मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी यह कहा है कि अभी मुख्यमंत्री की यात्रा लम्बी चलेगी।

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