पंचायत चुनाव का रास्ता हुआ साफ

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देहरादून(संवाददाता)। पंचायत चुनाव को लेकर जैसे ही चुनाव आयोग ने घोषणा की थी तो उसके 48 घंटे के बाद ही यह मामला उच्च न्यायालय में जा पहुंचा और न्यायालय ने पंचायत चुनाव पर रोक लगा दी थी लेकिन यह भी साफ कहा था कि न्यायालय पंचायत चुनाव नहीं रोकना चाहता लेकिन आरक्षण पर रोस्टर की तस्वीर साफ होनी चाहिए। उच्च न्यायालय में तीसरे दिन रोस्टर प्रणाली को लेकर जब तस्वीर साफ हुई तो न्यायालय ने पंचायत चुनाव पर लगी रोक को हटा दिया और अब राज्य के अन्दर पंचायत चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है और चुनाव आयोग अब जल्द ही नया चुनावी कार्यक्रम घोषित करेगा और सरकार ने आम जनमानस से जो पंचायत चुनाव कराने को लेकर वायदा किया था उस वायदे के तहत सरकार जुलाई माह में ही पंचायत चुनाव कराने के लिए वचनबद्ध है। अब उत्तराखण्ड के अन्दर पंचायत चुनाव का रास्ता साफ होने के बाद चुनाव लडने वाले सभी दल छोटी सरकार बनाने के लिए मैदान में डटे हुये नजर आयेंगे।
सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के अन्दर पंचायत चुनाव को समय पर सम्पन्न कराने का वचन दिया था और उसके बाद चुनाव आयोग से मंथन करने के बाद राज्य में पंचायत चुनाव कराये जाने की घोषणा की गई थी और दो चरणों में चुनाव कराये जाने की हरी झंडी दे दी गई थी। वहीं इस घोषणा के 48 घंटे के अन्दर ही पंचायत चुनाव में आरक्षण के रोस्टर को लेकर नैनीताल उच्च न्यायालय में वाद दाखिल हुआ और उस पर सुनवाई हुई तो न्यायालय ने चुनाव पर रोक लगा दी थी। हालांकि सरकार की ओर से अपना पक्ष न्यायालय में दाखिल कर दिया था और रोस्टर प्रणाली की कॉपी को भी न्यायालय के समक्ष रखा गया था जिस पर न्यायालय में लगातार पंचायत चुनाव को लेकर बहस चल रही थी आज बहस के तीसरे दिन सुबह ही न्यायालय ने सरकार की रोस्टर प्रणाली को परख कर चुनाव पर लगी रोक को खत्म कर दिया जिससे सरकार गदगद नजर आई और अब सरकार चुनाव आयोग से चुनाव की तिथि पर मंथन कर उसकी घोषणा करने के लिए आगे बढ गई है। न्यायालय में भले ही इस मामले को लेकर सुनवाई चल रही थी लेकिन कांग्रेस को इस बात का इल्म था कि चुनाव अब टल नहीं पायेंगे इसको लेकर उन्होंने अपने पदाधिकारियों की चुनाव को लेकर तैनाती भी करनी शुरू कर दी थी और कांग्रेसी नेताओं ने साफतौर पर कहा है कि वह पंचायत चुनाव को मजबूती के साथ मैदान में लडेंगे।
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा हुये अभी 48 घंटे का ही समय बीता था कि नैनीताल उच्च न्यायालय ने इन चुनाव पर रोक लगा दी। उच्च न्यायालय द्वारा पंचायत चुनाव पर रोक लगाये जाने से सरकार को एक बडा झटका लगा है। चुनाव की तारीख घोषित होते ही सरकार और सिस्टम चुनाव को लेकर अलर्ट मोड मे आ गया था और चुनाव लडने वाले नेताओं ने भी सोशल मीडिया से लेकर पोस्टर बैनर में चुनाव लडने की ताल ठोक दी थी। उच्च न्यायालय ने आरक्षण नोटिफिकेशन के मसले पर यह रोक लगाई है तो वहीं विपक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है क्योंकि विपक्ष के कई नेता इस बात को लेकर अपनी नाराजगी दिखा रहे थे कि सरकार अपने हिसाब से पंचायत चुनाव कराने के लिए आगे आ रही है? चुनाव आयोग ने उत्तराखण्ड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर दो चरणों में चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी इसके लिए 25 जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू होनी थी। चुनाव की घोषणा होते ही सरकार और सिस्टम के अफसर चुनावी मोड में जाते हुए नजर आये लेकिन आज जब हाईकोर्ट में आरक्षण नोटिफिकेशन के मसले पर बहस हुई तो हाईकोर्ट ने इन चुनाव पर रोक लगा दी और यह भी टिप्पणी की कि आगे किसी भी तरह की चुनावी कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब पेश करने को कहा है। बता दें कि पिछले शुक्रवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति से अवगत कराने को कहा था लेकिन सरकार आज स्थिति से अवगत कराने में असफल रही। कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने चुनाव की तिथि निकाल दी थी जबकि मामला हाईकोर्ट में चल रहा है इसके बाद कोर्ट ने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। पंचायत चुनाव में आरक्षण नोटिफिकेशन के मसले पर लगातार उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही थी और दो दिन तक न्यायालय में चली बहस के बावजूद भी सरकार को कोई राहत नहीं मिल पाई थी लेकिन आज सुबह मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पंचायत चुनाव पर लगी रोक को हटा दिया और उसके बाद राज्य में पंचायत चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया है कि सरकार पंचायत चुनाव कराने को लेकर वचनबद्ध है और जुलाई माह में ही सरकार पंचायत चुनाव करा लेगी।

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