एनएसयूआई का जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन

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देहरादून(नगर संवाददाता)। एनएसयूआई द्वारा राज्यपाल को जिला अधिकारी देहरादून के माध्यम से ज्ञापन प्रेषित किया जिसमें राज्यपाल से निवेदन किया कि सरकार द्वारा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश पंजीकरण हेतु समर्थ पोर्टल लाँच किया गया है। इस सम्बन्ध में छात्र-छात्राओं को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ेगा उन तथ्यों से उनको अवगत करवाया गया और इस समर्थ पोर्टल को बंद किया जाये या उसमें सुधार किये जाने की मांग की गई। इससे पूर्व इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और धरने पर बैठे।
इस अवसर पर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में एक प्रवेश, एक परीक्षा व एक परिणाम के नीति के तहत समर्थ पोर्टल लाँच किया जा रहा है तथा यह पोर्टल राजकीय विश्वविद्यालयों में लागू होगा। ज्ञापन में कहा गया कि यह कि पंजीकरण के हेतु छात्रों से 5० रूपये पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है तथा छात्रों की निजी जानकारी एकत्रित की जा रही है।ज्ञापन में कहा गया कि जबकि पंजीकरण के बाद भी प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार की प्रवेश परीक्षा का आयोजन नहीं किया जायेगा। पंजीकरण के लिए जो दस्तावेज मांगे गये हैं उनको अपलोड करने के लिए प्रत्येक छात्र को 25० रूपये अतिरिक्त साइबर कैफे में व्यय करने पड़ेगें। ज्ञापन में कहा गया कि पंजीकरण की प्रक्रिया इतनी जटिल है जिसके लिए छात्रों को साइबर कैफे की मदद लेनी ही पड़ेगी ऐसी स्थिति में प्रत्येक छात्र को लगभग 3०० रूपये व्यय करने पडेंगे परन्तु इस पंजीकरण का छात्रों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।
ज्ञापन में कहा गया कि इस पोर्टल में महाविद्यालय चयन के समय सम्बन्धित कोर्स की फीस की कोई जानकारी नहीं दी गई है। किसी भी छात्र को प्राइवेट शिक्षण संस्थान एवं सरकारी शिक्षण संस्थान में फीस का अन्तर मालूम नहीं होगा जिससे कि वह भविष्य में प्रवेश लेने से वंचित रह सकता है। ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखण्ड एक पर्वतीय राज्य है जहाँ पर दुर्गम एवं अति दुर्गम स्थानों में नेटवर्क की हमेशा समस्या बनी रहती है ऐसी स्थिति में इन पर्वतीय क्षेत्रों के छात्र पंजीकरण कराने में समर्थ नहीं हो पायेंगे।
ज्ञापन में कहा गया कि विगत वर्ष में यूजीसी द्वारा पूरे भारतवर्ष में सीयूईटी के माध्यम से एक प्रवेश प्रणाली लागू की थी जिसमें यूजीसी द्वारा उत्तराखण्ड को विशेष राज्य के तौर पर छूट प्रदान की गई थी। ज्ञापन में कहा गया कि सरकार द्वारा यह बताया कि प्रदेश में एक प्रदेश, एक प्रवेश, एक परीक्षा व एक परिणाम के नीति के तहत समर्थ पोर्टल लाँच किया जा रहा है तथा यह पोर्टल राजकीय विश्वविद्यालयों में लागू होगा। ज्ञापन में कहा गया कि इस आधार पर यह समान शिक्षा नीति किस आधार पर लागू होगी क्योंकि प्राइवेट विश्वविद्यालयों में जब यह लागू नहीं किया जा रहा है जिससे समान शिक्षा नीति का कोई औचित्य नहीं रह जाता है तथा यह पोर्टल प्रदेश के छात्रों के भविष्य को अंधकार में डालने का काम करेगा। नये शैक्षणिक सत्र प्रारम्भ होने में मात्र एक माह से भी कम का समय शेष है और इतने कम समय में राज्य सरकार द्वारा बिना किसी तैयार व बिना किसी ठोस योजना के नई प्रवेश प्रणाली लागू करना ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के लिए बेहद जटिल एवं असंभव रहेगी।
ज्ञापन में कहा गया कि समर्थ पोर्टल में उक्त खामियों को देखते हुए या तो पोर्टल को बन्द कर दिया जाये यदि इस पोर्टल के माध्यम से छात्रों के प्रवेश किये जाने हैं तो भविष्य में इसकी पूर्ण तैयारी एवं ठोस योजना बनाकर इसे प्रदेश के समस्त शासकीय, अशासकीय, प्राईवेट एवं शिक्षण संस्थानों, निजी विश्वविद्यालयों को शामिल करते हुए समान रूप से एक प्रदेश, एक प्रवेश, एक परीक्षा एक परिणाम को लागू करवाये जाने हेतु राज्य सरकार को उचित आदेश एवं दिशा-निर्देश जारी करने का कष्ट करें।
ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) आभारी रहेगी। इस अवसर पर ज्ञापन देने वालों में पूर्व छात्रसंघ महासचिव प्रदीप तोमर पूर्व महासंघ महासचिव अंजली चमोली, पूर्व प्रदेश महासचिव अभय कैंतुरा, सूरज नेगी यूआर डीएवी, नमन शर्मा एमकेपी कोषाध्यक्ष चिरजोत कौर, अनंत सैनी, अमित जोशी, हरीश जोशी, शालनी भंडारी, मोहित सिंह, मुकेश बसेरा, पवन मंडोली, सक्षम यादव, हर्षित बोरा, अंकित, हिमांशु आदि शामिल रहे।

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