देहरादून(नगर संवाददाता)। रामगढिय़ा सभा, देहरादून के तत्ववाधान में महाराजा सरदार जसा सिंह रामगढिय़ा का 3०० साला जन्म शताब्दी दिवस पूर्ण उत्साह एवं श्रद्धा पूर्वक कथा कीर्तन के रूप में मनाया गया।
इस अवसर पर रामगढिय़ा भवन, पटेल नगर में आयोजित कार्यक्रम में प्रात: श्री अखण्ड पाठ साहिब के भोग के पश्चात काका मनप्रीत सिंह ने सबदगुरसिखा की हरि धुड देह हम पापी वी गत पाहे एवं भाई दविंदर सिंह ने सबद तिन धन जने दी माओ आये सफल से का गायन किया। इस अवसर पर गुरूद्वारा पटेल नगर के हैड ग्रंथी भाई शमशेर सिंह ने महाराजा जसा सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिख कोम के महान जरनैल एवं रामगढिय़ा मिसल के बानी सरदार जसा सिंह रामगढिय़ा का जन्म 5 मई 1723 ईस्वी को लाहौर जिले के इचो गिल गांव में ज्ञानी सरदार भगवान सिंह के घर हुआ था।
उन्होंने कहा कि इनके दादा सरदार हरदास सिंह ने श्री गुरु गोबिन्द सिंह से अमृतपान किया था एवं बंदा बहादर की मुगलों के साथ हुई लडाईयों में भाग लिया था। उन्होंने कहा कि सरदार जसा सिंह रामगढिय़ा सिख कोम के वह जरनैल थे जिन्होंने सिखो की बिखरी हुई ताकत को एक जुट करके सिख कोम में जोश भर के पंजाब एवं दिल्ली की धरती पर खालसाई झंडे झूला कर अपनी सिख राज्य की नींव स्थापित की। उन्होंने कहा कि सरदार जसा सिंह रामगढिय़ा की अगुआई में सिखों ने जाल्मों को दिन में तारे दिखा दिये थ। इस अवसर पर दिल्ली से लाया हुआ शाही तख्ते ताऊस ष्श्री हरिमंदर साहिब, अमृतसर की परिक्रमा में स्थापित है सआपने 8० वर्ष की आयु में 2० अप्रैल 18०3 को अपनी संसारिक यात्रा सम्पूर्ण की।
इस अवसर पर भाई जरनेल सिंह ने सबद गुरमुख परउपकारी विरला आया का गायन कर संगत को निहाल किया। इस अवसर पर मंच का संचालन करतार सिंह एवं सेवा सिंह मठारु ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के पश्चात संगत ने गुरु का लंगर छका। इस अवसर पर गुरु महाराज का आशीर्वाद लेने गु़रूद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान गुरबक्श सिंह राजन, महासचिव गुलजार सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमिंदर सिंह छाबड़ा, उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह आदि कार्यक्रम में पहुंचे। इस अवसर पर रामगढिया सभा के प्रधान सरदार सुरजीत सिंह जुतले, उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कुंदी, महासचिव सेवा सिंह मठारु, कोषाध्यक्ष रघुबीर सिंह, सचिव राजिंदर सिंह राजा, दिलबाग सिंह, करतार सिंह, गुरमीत सिंह मीता, लक्खा सिंह, बलदेव सिंह, मनजीत सिंह चान्ना, बलजीत सिंह बब्लु, गुरदियाल सिंह, हरप्रीत सिंह छाबड़ा, चरणजीत सिंहआदि ने सहयोग प्रदान किया।