देहरादून(नगर संवाददाता)। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष भूपाल सिंह चौधरी ने कहा है कि जल, जंगल और जमीन बचाने के साथ ही किसानों एवं जनता की ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न संगठनों के आहवान पर 1० से 12 जून तक हरिद्वार में किसान महापंचायत का आयोजन किया जायेगा, जिसमें देश के साथ ही प्रदेश के किसान प्रतिभाग करेंगें। यहां परेड ग्राउंड स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि इस किसान महापंचायत को विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों के द्वारा भी समर्थन दिया गया। उन्होंने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद मे किसान महापंचायत का आगाज भारतीय किसान यूनियन के तत्वाधान में होने जा रहा है। 1०. 11 व 12 जून को देश के कई राज्यों के किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन दद्वारा आहूत उत्तराखंड किसान महापंचायत में भागीदारी करने पहुँच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार में होने वाली महापंचायत मे आयोजको ने उत्तराखंड से सम्बंधित जन मुद्दों की आवाज उठाने के लिए पहाड़ो के कई गैर- राजनितिक सामाजिक संगठनों को आमंत्रण भेजा है जिसके हेतु किसान महापंचायत में पहाड़ पहाड़ वासियों की आवाज को उठाने के लिए जिन संगठनों ने भागीदारी करने हेतु स्वीकृति प्रदान की है इन संगठनों द्वारा किसान और जवानों की महापंचायत में उत्तराखंड से सम्बंधित जल-जंगल व जमीन के सवालों भूमाफियाओ व खनन माफियाओं के खिलाफ पहाड़ो को बचाने, पहाड़ की बहु बेटियों की सुरक्षा का प्रश्न, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार पर प्रहार करने आदि गंभीर मुद्दों पर उत्तराखंड किसान महापंचायत मे आवाज उठाने का संकल्प व निर्णय लिया गया है। इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष भोपाल सिंह चौधरी ने कहा कि अभी हाल मे जो जोशीमठ में पहाड़ों में दरारे आयी उस आपदा के कारण कई लोगो को अपनी जन्म भूमि छोड़कर पहाड़ी से पलायन तो सरकार ने करा दिया किन्तु जिस बाँध निर्माण करने वाली संस्था एनटीपीसी के कारण वहाँ आपदा आयी, उस कंपनी को अभी तक वहाँ से नहीं हटाया गया है। जिससे वह दोषी विनाशतंत्र आज भी बाँध निर्माण के कार्य मे सलिप्त है। उन्होंने कहा कि उसी जोशीमठ के पास तपोवन रैणी गाव में बाँध टूटने से ही भारी आपदा आयी थी व कई बेकसूर लोगों की जान भी उस बाँध के कारण हुई थी। उन्होंने कहा कि सारे जोशीमठ के घरों और दुकान पर एनटीपीस गो बैक के नारे पट्टिकाओं में प्रत्येक नागरिक ने लिखे थे और किन्तु उन सब स्थानीय लोगों को डरा धमकाकर आवाज उठाने से चुप करा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जो प्रभावशाली लोग थे उनको मैनेज करवा कर अन्य धन पशुओं के साथ मिलकर धंधा जस का तस जारी है और न तो पहाड़ की कोई चिंता है व ना ही पहाड़वासियों की आवाज को सरकार सुन रही है। इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सैनिक शिरोमणि मनोज ध्यानी ने कहा कि उत्तराखंड के अहित होता देख अब और अधिक उदासीन बैठना राज्य निर्माण आंदोलन की शक्तियों के लिए घातक कहलायेगा। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि चुप्पी तोड़ी जाये और देश के नागरिको को खुलकर बताया जाये कि उत्तराखंड हिमालय किस कठिन समय से गुजर रहा है। इस अवसर पर ध्यानी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण एक सोच रही थी जिसमें भारत संघ के भीतर इस स्वर्णिम राज्य की स्थापना के द्वारा स्वर्णिम राष्ट्र की सेवा ने का संकल्प छुपा हुआ था। उन्होंने कहा कि परन्तु उत्तराखंड बनने के बाद सही मार्ग को नहीं पकड़ा गया एक पहाड़ और पहाडिय़ो की पीड़ा अच्छी शिक्षा, लाभप्रद कृषि पर्वतीय अंचल के नागरिकों की पक्षधर भू-कानून राज्य की स्थाई राजधानी का प्रश्न युवाओं हेतु सम्मानजनक रोजगार पलायन की त्रासदी को रोकने के कारगर उपाय भ्रष्टाचार मुक्त जन व्यवस्था पर्यावरण व परिस्थितिकी जिनमें गंगा समेत समस्त नदियों की खनन मुक्त अविरलता व स्वच्छता बनाना हजारों पेड़ों के अंधाधुंध कटान पर अंकुश लगाना, ग्लेशियरों को बचाने के उपाय करना आदि धीर गंभीर प्रश्न उठाये जाने व उनके हेतु समुचित समाधान प्रदत्त करना अत्यावश्यक है।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता प्रमिला रावत ने कहा कि अंिकता भंडारी हत्याकांड ने यह सिद्ध किया है कि तंत्रिका निष्पक्ष कार्य नहीं करती है। उन्होंने कहा कि सबूत मिटाने के लिए आनन फानन में बुलडोजर चलना, रिसोर्ट के कमरे में आग लगा देना, कामुक प्रवृति के वीवीआईपी का नाम छुपाने के लिए सरकार की समस्त कोशिश ने दिखाया है कि उत्तराखंड सरकार यहाँ की बेटियों को न्याय दिलवाने में मौन बनी रहती है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी को तो न्याय नहीं मिल रहा है परन्तु दिल्ली की पूजा नेगी जो बलात्कार और हत्या दरन्दगी का शिकार बनी उसके आरोपियों तक को फांसी की सजा से मुक्ति मिल जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की माँ बहिन बेटियां अब मौन नहीं बनी रह सकती है। और इस दृष्टीगत किसान महापंचायत में भागीदारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिवालय से लेकर प्रत्येक विभाग में नौकरियों भ्रष्टाचार का गोरखधंधा सरकार की नाक के नीचे फलता फूलता रहा परन्तु सभी सरकारें इन्हें शह देती रही थी।
उन्होंने कहा कि निष्पक्ष सीबीआई जाँच मागने पर उसे और मुकदमे युवाओं को दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवा विरोधी और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने वाली सिद्ध हुई है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड बेरोजगार संघ के प्रयास नहीं होते तो नौकरियों मे दलाली का गोरखधंधा कभी भी उजागर नहीं होने वाला था। उन्होंने कहा कि आज जी 2० में अष्टाचार पर कुछ नियमन बने हैं। उन्होंने कहा कि हम देखना चाहेंगे कि उत्तराखंड समेत देशभर में कुछ वास्तव में क्रियान्वित होगा भी अथवा यह हवा हवाई सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड बेरोजगार संघ महापंचायत में भ्रष्टाचार पर युवाओं के हित के विषय उठाने के लिए भागीदारी करेगा। इस अवसर पर अपना परिवार के पुरूषोत्तम भट्ट, भू-कानून विषय पर शंकर सागर ने भी हरिद्वार में देश के जवान और किसान मातृसदन, जगत गुरु शंकराचार्य सहित देश के पर्यावरणविद समाजसेवी, बुद्धिजीवियों संग देवभूमि से जुड़े सवालो को उठाने की बात कही। इस अवसर पर वार्ता में उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सैनिक शिरोमणि मनोज ध्यानी, उत्तराखंड बेरोजगार संघ, अपना परिवार सामाजिक संगठन से पुरुषोत्तम भट्ट, समाज सेविका प्रमिला रावत, युवा नेता सुरेन्द्र सिंह नेगी, भू-अध्यादेश अधिनियम अभियान के लिए क्रियाशील शंकर सागर, भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री आदि प्रखर एवं मुखर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता शामिल रहे।