राजधानी में अवैध कब्जा करने वाले माफिया बेखौफ

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जमीन माफियाओं पर नकेल लगाने के लिए सख्ती के साथ आदेश दिये हुये हैं लेकिन हैरानी वाली बात है कि राजधानी में ही कुछ बडी-बडी जमीनों पर कब्जे हो रखे हैं और निजी जमीनों पर भी कब्जे करने का खेल लम्बे समय से चलता आ रहा है और अपने कब्जों को आजाद कराने के लिए आवाम को दर-दर भटकना पडता है लेकिन उसकी फरियाद सुनने वाला कोई नजर नही आता? शहर के बीचो-बीच करोडो रूपये की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है और जमीन स्वामी अपनी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज के दस्तावेजों को लेकर लम्बे अर्से से अफसरों के कार्यालय में चक्कर काटते आ रहे हैं लेकिन उनकी जमीन को सरकारी सिस्टम आज तक आजाद कराने का साहस नहीं कर पाया तो उससे समझा जा सकता है कि राजधानी में सरकारी और निजी जमीनों पर हो रखे कब्जों को आजाद कराना सिस्टम के लिए कितनी बडी चुनौती है? राजधानी में ही अगर जमीनों पर हुये कब्जे का खेल नेस्तानबूत नहीं हो पाया तो फिर और जिलों में किस तरह से जमीनों पर कब्जा करने वालों पर सरकारी सिस्टम नकेल लगा पायेगा यह एक बडा सवाल राज्य के अन्दर खडा हो गया है? अपनी ही निजी जमीनों पर हुये कब्जों को मुक्त कराने के लिए लोग भय के माहौल में जी रहे हें क्योंकि जब सिस्टम ही उनके साथ खडा होने के लिए आगे नहीं आता तो फिर जमीनों पर हुये कब्जों को मुक्त कैसे सिस्टम करा पायेंगा इसके लिए खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपना रौद्र रूप दिखाना पडेगा अन्यथा जमीन माफियाओं पर नकेल लगाना सिर्फ एक शिगुफे से ज्यादा कुछ नहीं रह जायेगा?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड को बने इक्कीस साल से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन आज तक कोई भी सरकार जमीन माफियाओं पर नकेल नहीं कस पाई और उन पर गैंगेस्टर लगाने का दावा हमेशा से ही फुस्स नजर आया जिसके चलते जमीन माफियाओं में सरकारी सिस्टम को लेकर कभी भी कोई डर देखने को नहीं मिला? कई बार जमीन माफियाओं व सिस्टम के कुछ कर्मचारियों की मिली भगत सामने आई लेकिन जांच के दौरान न जाने ऐसा क्या होता रहा कि कर्मचारियों पर नकेल नहीं लग पाई? हैरानी वाली बात है कि राजधानी के अन्दर ही काफी सरकारी जमीनों पर कब्जे होने की आशंकायें उठती रही लेकिन इस दिशा में सरकारी सिस्टम ने कभी भी अपनी जमीनों को आजाद कराने की दिशा में कोई पहल नहीं की? कुछ माह पूर्व सुद्दोवाला जेल के समीप कुछ लोगों की जमीनों पर कब्जा होने का शोर मचा और उसके बाद इस मामले में एसआईटी की जांच शुरू हुई लेकिन अभी तक परिणाम सामने नहीं आ पाया। ऐसे में सवाल खडा होता है कि पुलिस कैसे पैमाना बनायेगी कि कौन भू-माफिया है और कौन नहीं?

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