हरिद्वार/देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में दो साल बाद शुरू हुई कावंड यात्रा को एतिहासिक बनाने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने एक बडा प्लान तैयार किया और इस कांवड यात्रा में करोडो कांवडियों के आगमन को देखते हुए उन्होंने उनकी अभेद सुरक्षा का जो चक्र तैयार किया है उसे कोई नहीं भेद पायेगा और कांवडियों के भेष में खुफिया कर्मियों को भी चप्पे-चप्पे पर तैनात किया हुआ है जो कि रात-दिन संदिग्धों पर अपनी पैनी निगाहें बनाये हुये है। पुष्कर सिंह धामी ने कांवडियों को उनकी सुरक्षा को लेकर उन्हें जो वचन दिया है उसी का परिणाम है कि आज सुबह से ही हरि का द्वार भगवामय हो रखा था और कांवडिये जिस प्रेम और आदर के साथ शिव के द्वार में गंगा तट पर जल भर रहे थे उसे देखकर हरि के द्वार का नजारा अद्भुत नजर आ रहा था और किसी भी कांवडिये के मन में तिनकाभर भी अपनी सुरक्षा को लेकर कोई भय नहीं दिखा। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब कांवड यात्रा को एतिहासिक बनाने के लिए किसी सीएम ने अपनी किचन टीम के साथ मिलकर रात-दिन एक किया हुआ है।
उल्लेखनीय है कि इक्कीस साल में हमेशा यह देखने को मिला कि पुलिस कांवडियों को लेकर जो अपना मन बनाती रही है उससे कहीं न कहीं कांवडियों के मन में एक बडी पीडा देखने को मिलती रही। पहली बार ऐसा देखने को मिला जब सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने कांवडियों को शिवभक्त मानकर उन्हें देवभूमि में सत्कार के साथ आस्था के पथ की कांवड यात्रा में उन्हें बडा सम्मान देने का ऐलान किया। पुष्कर सिंह धामी ने कांवडियों को संदेश दिया कि वह शिवभक्त हैं और बाबा की धरती पर वह जब आस्था की कांवड लेकर आयें तो एक-एक पौधा लगायें और जल भरने के बाद जब वह वापस लौटे तो उनके हाथ में तिरंगा होना चाहिए जो हर कांवडिया लहराता हुआ अपने साथ लेकर जाये कि उसके लिए यह तिरंगा हमेशा उसकी आन-बान-शान है। कांवड यात्रा के शुरू होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आये दिन कावंड यात्रा को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए उसकी मॉनिटिरिंग कर रहे हैं और कावंड पर मंडराते खतरे की सम्भावना को देखते हुए उन्होंने हरि के द्वार पर चप्पे-चप्पे में खुफिया विभाग के कर्मचारियों को कावंडियों के भेष में तैनात किया है और वह कांवडियों की सुरक्षा में दिन-रात संदिग्धों पर अपनी नजर लगाये हुये हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आस्था के पथ पर चलने वाली कांवड को लेकर कांवडियों के मन में जो सरकार के सौम्य नजरिये को पेश किया है उसी का परिणाम है कि आस्था के पथ पर कांवड लेकर आ रहे कांवडियों में शिव की भूमि पर आते ही उनमें उदारता सौम्यता और सबके प्रति आदर का भाव देखने को मिल रहा है और पहली बार ऐसा है कि कावंडिये शांत मन से हरि के द्वार में आस्था की डूबकी लगाकर वहां से जल भर रहे हैं।
पुष्कर सिंह धामी ने इस बार शिवभक्तों के लिए ऐसा संदेश नहीं दिया कि वह हरि के द्वार और ऋषिकेश के अलावा कहीं प्रवेश नहीं कर पायेंगे। कांवडियों के प्रति सम्मान का भाव रखने वाले पुष्कर ंिसह धामी की सोच को आस्था के पथ पर आ रहा हर कांवडिया उन्हें आदर दे रहा है और यहां तक कहने से नहीं चूक रहा कि जहां कि सरकारें शिवभक्तों का सम्मान करती हैं वहां के मुख्यमंत्री हमेशा सबके दिलों पर राज करते हैं।
