देहरादून(संवाददाता)। मुख्यमंत्री को भाजपा हाईकमान ने फ्रीहैंड दिया हुआ है कि वह राज्यहित में हर फैसला खुद करें और उसके लिए उन्हें दिल्ली आने की कोई जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने राज्यहित में अपने तीन साल के कार्यकाल में एक से एक बडे फैसले राज्य में बैठकर ही किये और उस पर बाद में भाजपा हाईकमान ने भी अपनी मोहर लगाकर हमेशा धामी की पीठ थपथपाई है। उत्तराखण्ड में यूसीसी से लेकर सशक्त भू-कानून बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद बडा फैसला लिया और डबल इंजन सरकार ने उस फैसले को ऐतिहासिक मानते हुए अपनी मोहर लगाने में देर नहीं की थी। उत्तराखण्ड में एक बार फिर मुख्यमंत्री ने अपनी धमक दिखाते हुए पचास से ज्यादा भाजपा नेताओं को राज्यमंत्री बनाकर उनके चेहरों पर एक नई मुस्कान ला दी इसके बाद से ही फिर चर्चाओं ने जन्म ले लिया है कि आने वाले समय मे कभी भी मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमण्डल का विस्तार कर सकते हैं? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री मुख्यमंत्री पर अभेद भरोसा कर रहे हैं उससे यह साफ है कि अगर राज्य में नया मंत्रिमण्डल बना तो धामी ही तय करेंगे कि नये मंत्रिमण्डल मे कौन शामिल होगा और कौन नहीं?
उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में राज्य मंत्रियों की लंबी-चौड़ी सूची जारी होने के बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, आगामी दिनों में कैबिनेट में चार नए चेहरों को शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। इसके चलते भाजपा विधायकों में हलचल और उत्सुकता बढ़ गई है।मुख्यमंत्री धामी इन दिनों जिस तरह से लगातार फैसले ले रहे हैं और संगठन व प्रशासनिक स्तर पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, उसने पार्टी के भीतर उनकी स्थिति और अधिक मजबूत कर दी है। विरोधी खेमा जहां सरकार पर अंदरखाने खिंचाई करने की कोशिश में लगा रहता है, वहीं धामी हर बार अपनी रणनीति और काम के दम पर आलोचकों को चुप कराने में सफल होते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार न केवल संगठनात्मक संतुलन साधने के लिहाज से अहम होगा, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा माना जा सकता है। इसमें क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का ध्यान रखते हुए नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसे विधायकों पर नजर है जो न केवल जनता के बीच सक्रिय हैं, बल्कि संगठन के प्रति भी निष्ठावान रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो जिन चार विधायकों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, उनमें कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों का संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। साथ ही महिलाओं और युवाओं को भी प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पार्टी का जनाधार और मजबूत हो सके। सीएम धामी की लगातार हो रही ष्स्मार्ट बैटिंगष् ने न केवल विपक्ष को कमजोर किया है, बल्कि पार्टी के भीतर भी उनके नेतृत्व पर भरोसा और गहरा किया है। उनके नेतृत्व में सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए हैं जो जनता के बीच लोकप्रिय साबित हुए हैं, चाहे वह रोजगार से जुड़े मुद्दे हों, भ्रष्टाचार पर सख्ती या फिर विकास योजनाओं की तेजी से क्रियान्वयन। अब पार्टी के अंदर उन विधायकों की निगाहें भी मुख्यमंत्री पर टिकी हैं, जो लंबे समय से मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कुछ नाम ऐसे भी हैं जो पिछली बार किन्हीं कारणों से बाहर रह गए थे, लेकिन अब उन्हें मौका मिल सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान और मुख्यमंत्री की सहमति से ही होगा। इस कैबिनेट विस्तार को लेकर अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा हो सकती है। इसके साथ ही उत्तराखंड की राजनीति में एक नया समीकरण उभरने की पूरी संभावना है। देखना दिलचस्प होगा कि धामी किन चेहरों को अपनी टीम में शामिल कर अगली पारी और भी मजबूत करने की ओर कदम बढ़ाते हैं।