भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने दिया धामी के वर्चस्व को आयाम…

0
13

देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के इतिहास मे पहली बार किसी मुख्यमंत्री को धाकड़ मुख्यमंत्री का तमका दिया गया है क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल में जो भी फैसला लिया उस पर वह हमेशा अटल दिखाई दिये और उन्होंने किसी फैसले को दबाव में पलटने के लिए कभी भी अपने कदम आगे नहीं बढाये। मुख्यमंत्री के वर्चस्व से आज भाजपा के ही अन्दर खलबली मची हुई है और विपक्ष तो कभी भी मुख्यमंत्री पर कोई दाग नहीं लगा पाया। मुख्यमंत्री ने आम जनमानस के सामने सरकार की जो छवि बनाई है उसी का परिणाम है कि आज देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री मुख्यमंत्री को कर्मठ और ऊर्जावान मुख्यमंत्री का ताज पहनाकर उनकी पीठ थपथपाते आ रहे हैं। उत्तराखण्ड के गलियारों में भले ही सत्ता परिवर्तन को लेकर साजिशों और अफवाहों का बाजार सजा हो लेकिन मुख्यमंत्री की सत्ता अभेद है और वह स्थिरता की जिस चट्टान पर खडे हुये नजर आ रहे हैं उससे साजिशकर्ताओं की एक बार फिर हवा निकलकर सामने आ चुकी है। मुख्यमंत्री ने अफवाहों को हवा मे उडाते हुए पार्टी नेताओं को दायित्व का जो गिफ्ट नवरात्रों में दिया है उससे यह साफ है कि मुख्यमंत्री दिल्ली की नजर में सुपर सीएम हैं।
बता दें कि जैसे कि पूर्व की सरकारों में देखने में आया कि सरकारें अपने ही फैसलों को बदलती रहती थीं,और आम जनमानस में यू-टर्न सरकार की छवि बन गई थी। उसके बाद जबसे पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं लगातार देखने में आ रहा है कि अपने बोल्ड और ऐतिहासिक निर्णयों से पुष्कर धामी की देश के विशेष भाजपा नेताओं में गिनती अब मोदी, योगी की बी टीम के रूप में हेमंत बिस्वा शर्मा, देवेंद्र फडणवीस, पुष्कर धामी की भी होने लगी है। चाहे वह नकल कानून, यूसीसी ,भू कानून आदि और अब दायित्व बांटते हुए भी कई महत्वपूर्ण चेहरों को तरजीह दी गई। कुछ सामाजिक,कुछ,राजनीतिक, कुछ आरएसएस पृष्ठभूमि और तीसरे जैंडर की रजनी रावत हो या तीन तलाक के मुद्दे को लेकर संघर्ष करने वाली सायरा बानो। इससे विपक्ष सहित अपने भी जो गाहे-बगाहे प्रदेश में चर्चाओं का माहौल गर्म करते रहते हैं। उन सभी को धाकड़ धामी पछाड़ते हुए दिख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,अमित शाह और केंद्र के नेताओं के बीच धामी की विश्वसनीयता तीन साल पूरे होने पर और बड़ी है।जिसका परिणाम अपने सरकार के विस्तार में दायित्वधारियों की तैनाती से साफ नजर आ रहा है।
जहां पिछली सरकारों में उत्तराखंड में जमीनों के सर्किल रेट कई गुना बढ़ाए गए और आम आदमी भूमाफिया के मक्कडज़ाल में असहाय महसूस कर रहा था, वहीं मजबूत भू कानून से प्रदेश की जनता को राहत देने का काम हो या पूर्व में जहां केदारनाथ धाम में सरकार के मुखिया को ही विरोध का समाना करना पड़ा हो,वहीं चारधाम यात्रा मार्ग परिवर्तन की अफवाहों को धाकड़ धामी ने अपनी सूझबुझ से विराम लगाते हुए केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव और नगर निकाय चुनावों में विजयश्री हासिल की इससे केंद्र का भी धामी के विजन और नेतृत्व पर विश्वास मजबूत हुआ है। मुख्यमंत्री एक स्वच्छ छवि के राजनेता हैं और उन्होंने राज्यवासियों का दिल जीतने के लिए हमेशा उन्हें अपना परिवार मानकर ही सत्ता चलाई है इसलिए अगर राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई भी साजिश करने के लिए पर्दे के पीछे से आगे आता है तो उसे आईना दिखाने के लिए राज्य की जनता चट्टान की तरह मुख्यमंत्री के साथ खडी हुई नजर आ रही है। मुख्यमंत्री का आज के दौर में राजनीतिक औरा इतना बुलंद है कि कुछ चुनाव में पार्टी को हरवाने के लिए भाजपा के ही चंद नेताओं ने ऐडी-चोटी का जोर लगाया लेकिन राज्य की जनता ने ऐसे विभीषणों को सबक सिखाने के लिए कमल खिलाने मे ही विश्वास दिखाया है। मुख्यमंत्री आज उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी दबंग छवि के रूप में खूब विख्यात हो चुके हैं और उन्होंने अपने तीन साल के कार्यकाल में कभी भी अपना कोई आदेश वापस नहीं लिया जिससे समझा जा सकता है कि मुख्यमंत्री एक बडी सोच के साथ वो फैसले लेते हैं जिस पर उन्हें रोल बैक न करना पडे। धामी द्वारा मीडिया से भी अफवाहों में ध्यान न देने और प्रमाणिक व आदर्श पत्रकारिता करने की अपील की गई जिससे कि सरकार को राज्य के उत्थान में मीडिया से सहयोग मिले। इन सभी को देखते हुए लगता है कि पुष्कर धामी सरकार अपना पूरा कार्यकाल पूरा कर धामी के नेतृत्व में ही 2०27 के चुनावों में जाएगी।

LEAVE A REPLY