सरकार को घेरने निकलेगी कांग्रेस

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बद्रीनाथ से न्याय यात्रा का शंखनाद
’भ्रष्टाचार, महिला अपराध और बेरोजगारी पर दहाडे़गी कांग्रेस
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सड़क पर बड़े राजनीतिक आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। अंकिता भंडारी हत्याकांड, महिलाओं की सुरक्षा, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े विवाद, कथित भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और पहाड़ों से पलायन जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने धामी सरकार के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ने का ऐलान किया है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस भगवान बदरीविशाल की धरती से ‘उत्तराखंड न्याय यात्रा’ का शंखनाद करने जा रही है।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार कांग्रेस नेता 21 अक्टूबर को बदरीनाथ धाम के लिए रवाना होंगे। 22 अक्टूबर को पूजा-अर्चना के बाद न्याय यात्रा की औपचारिक शुरुआत होगी। पार्टी का दावा है कि यह यात्रा केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश की जनता से जुड़े सवालों पर सरकार की जवाबदेही तय करने का अभियान बनेगी। कांग्रेस ने 27 अक्टूबर को गैरसैंण में विधानसभा घेराव का भी ऐलान किया है। ऐसे में बदरीनाथ से शुरू होने वाली न्याय यात्रा और गैरसैंण में प्रस्तावित प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। इस प्रकरण में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच, पीड़ित परिवार की मांगों और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर लगातार आवाज उठती रही है।
कांग्रेस का आरोप है कि इस संवेदनशील मामले में जनता के कई सवालों का संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है। पार्टी अब न्याय यात्रा के माध्यम से यह मुद्दा प्रदेश के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस पहले भी प्रदर्शन कर चुकी है। पार्टी की मांग है कि मामले से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित परिवार की आशंकाओं का विधिसम्मत समाधान किया जाए। अंकिता भंडारी प्रकरण के साथ भाजपा नेता दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति का मुद्दा भी राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है। कांग्रेस और विभिन्न संगठनों ने उनकी नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग उठाई है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी को लेकर उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हालांकि दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस इस विवाद को संवैधानिक पदों की गरिमा, सार्वजनिक विश्वास और निष्पक्ष जांच की मांग से जोड़ रही है। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े विवाद ने भी प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। कैबिनेट मंत्री की शिकायत पर दर्ज मुकदमे की जांच एसआईटी कर रही है। 19 अक्टूबर के पुलिस प्रेस नोट के अनुसार एसआईटी ने रेखा आर्य के बयान दर्ज किए और प्रकरण से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त की, जिसे फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा जाना है। दूसरी ओर, मंत्री के विभागों से संबंधित कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर भी राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम के जरिए महिला सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही का मुद्दा उठाने की तैयारी में है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी जनसभा के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान ने भी प्रदेश की राजनीति में विवाद खड़ा किया था। कांग्रेस ने इस घटना को दलित समाज के सम्मान से जोड़ते हुए कड़ा विरोध जताया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित कांग्रेस नेताओं ने इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। पार्टी ने प्रदर्शन किए और कार्रवाई की मांग उठाई। विवाद में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ और मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा। दूसरी ओर भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए जांच की बात कही थी। अब कांग्रेस के सामने सवाल है कि सामाजिक न्याय के इस मुद्दे को वह न्याय यात्रा के दौरान किस तरह उठाती है। उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और समय पर नियुक्तियां लंबे समय से अहम सवाल बने हुए हैं। पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में सामने आई अनियमितताओं को कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रमुख मुद्दा बना रही है।
पार्टी का आरोप है कि रोजगार के अवसर पर्याप्त नहीं हैं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं में असंतोष है। न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस सरकार से यह पूछने की तैयारी में है कि भर्ती व्यवस्था में सुधार के दावों का धरातल पर कितना असर हुआ और कितने युवाओं को रोजगार मिला। उत्तराखंड में अवैध खनन, सरकारी निर्माण कार्यों और ठेकों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण को प्रमुख मुद्दा बना रही है। खनन सामग्री के अवैध परिवहन, राजस्व नुकसान की शिकायतों, निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही जैसे सवाल भी जनहित से जुड़े हैं। इन मामलों में आरोपों की जांच, राजस्व वसूली और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक होना पारदर्शिता की कसौटी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति और कार्रवाई का दावा करती रही है। ऐसे में न्याय यात्रा के दौरान सरकारी कार्रवाई के आंकड़े और विपक्ष के आरोप आमने-सामने होंगे।
कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा भी अपने राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल किया है। पार्टी ने एक नवंबर को दिल्ली में इस मुद्दे पर प्रस्तावित प्रदर्शन में भागीदारी की घोषणा की है। कांग्रेस मतदाता सूची में पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की सुरक्षा की मांग कर रही है। यह मुद्दा केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से लगातार पलायन, रोजगार के सीमित अवसर, अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे भी कांग्रेस के अभियान का हिस्सा होंगे। पार्टी का कहना है कि पहाड़ के गांवों में रोजगार, शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किए बिना पलायन की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। वहीं महंगाई और आम परिवारों के बढ़ते खर्च को लेकर भी कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है।
प्रदेश की बदलती राजनीतिक गतिविधियों के बीच भाजपा से कांग्रेस में नेताओं की वापसी भी चर्चा में है। प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल के पिता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में हुई उनकी वापसी को पार्टी संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। रामशरण नौटियाल पहले कांग्रेस में रह चुके हैं और 2022 में भाजपा के टिकट पर चकराता से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। कांग्रेस ने न्याय यात्रा के साथ ही गैरसैंण में 27 अक्टूबर को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया है। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और अन्य वरिष्ठ नेता सरकार से जुड़े मुद्दों को सड़क से सदन तक उठाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पार्टी के घोषित कार्यक्रम के अनुसार 22 से 25 अक्टूबर के बीच न्याय यात्रा के आयोजन और विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क की तैयारी है। इसके बाद गैरसैंण में प्रदर्शन किया जाएगा।
कांग्रेस की न्याय यात्रा के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार, सामाजिक न्याय और कानून व्यवस्था से जुड़े सवाल राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहेंगे। हालांकि अंकिता भंडारी प्रकरण में भाजपा का कहना है कि सरकार ने गिरफ्तारी, जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में कार्रवाई की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सरकार के कदमों का बचाव किया है। ऐसे में कांग्रेस के सामने भी चुनौती होगी कि वह आरोपों के साथ ठोस तथ्य और जनहित के समाधान प्रस्तुत करे। फिलहाल उत्तराखंड की राजनीति में 22 अक्टूबर की न्याय यात्रा और 27 अक्टूबर का गैरसैंण विधानसभा घेराव महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बन गए हैं। कांग्रेस सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है, जबकि धामी सरकार के दावों और विपक्ष के आरोपों की परीक्षा अब सार्वजनिक बहस के बीच होगी।

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