कोश्यारी की एक वीडियो हो रही वायरल

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हरदा ने कहा था नेहरू परिवार से उनका नाता
कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाने की फर्जी हैं अटकलें
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी के अन्दर कद्दावर नेता हरीश रावत ने एक जमाने में एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री भगत ंिसह कोश्यारी ने एक समारोह में दिल की बात कही थी कि उन्हें एक बार हरीश रावत ने कहा था कि जैसे वह आरएसएस से जुडे हुये हैं उसी तरह से वह नेहरू परिवार और कांग्रेस के साथ जुडे हुये हैं और कांग्रेस में उनकी जान बसती है। समारोह में हरदा भी उपस्थित थे और उनके सामने यह बात एक दशक पूर्व भगत सिंह कोश्यारी ने कही थी। हरीश रावत को लेकर जिस तरह से कयासबाजी चल रही है उसके चलते कोश्यारी की वो वीडियो वायरल हो रही है जिसमें उन्होंने हरदा को लेकर उनकी कही बात आम जनमानस को बताई थी। हरीश रावत ने संवाद यात्रा का एक पडाव किया तो उसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें सबके साथ चलने का एक संदेश दिया तो सोशल मीडिया पर हरदा को लेकर हवाबाजी में पटकथा लिखी जा रही है कि उन्हें भाजपा से ऑफर मिला है लेकिन यह भी सच है कि हरीश रावत एक दशक से कांग्रेस को अपना परिवार मानते आ रहे हैं ऐसे में वह उम्र के इस पडाव में कांग्रेस छोडकर भाजपा में जायेंगे यह एक मुंगेरीलाल के हसीन सपने से ज्यादा कुछ नहीं है। हरदा को एक दशक से देखने वोल उनके अपने कहते हैं कि सोशल मीडिया पर किसी का कोई अधिकार नहीं है इसलिए जिसका जो मन आता है वो हवाबाजी में अपनी सम्भावनायें जताने के लिए आगे आता है जबकि सच यह है कि हरदा के लिए कांग्रेस उनकी आत्मा है।
उत्तराखण्ड की राजनीति के दिग्गज नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर चेहरे हरीश रावत एक बार फिर सियासी चर्चाओं के केंद्र में हैं। उनकी संवाद यात्रा और कांग्रेस हाईकमान की ओर से सबको साथ लेकर चलने के संदेश के बाद सोशल मीडिया पर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। यहां तक कि उन्हें भाजपा से प्रस्ताव मिलने की चर्चाएं भी उछाली जा रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
हरीश रावत की कांग्रेस के प्रति निष्ठा को समझने के लिए उनका एक पुराना बयान बेहद महत्वपूर्ण है। एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने समारोह में कहा था कि हरदा ने उन्हें बताया था कि जिस प्रकार वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं, उसी प्रकार वह नेहरू परिवार और कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। कांग्रेस में उनकी जान बसती है। उत्तराखण्ड की राजनीति में हरीश रावत का नाम उन नेताओं में शुमार है जिन्होंने कांग्रेस के साथ लंबा राजनीतिक सफर तय किया है। सत्ता के शिखर से लेकर राजनीतिक संघर्षों तक उन्होंने कांग्रेस के मंच से अपनी लड़ाई लड़ी है। ऐसे में जीवन के इस पड़ाव पर उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलों को उनके समर्थक महज राजनीतिक कल्पना करार दे रहे हैं।
दरअसल, हरीश रावत की संवाद यात्रा के बाद कांग्रेस हाईकमान की ओर से सामूहिक नेतृत्व और सबको साथ लेकर चलने का संदेश सामने आया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया। कुछ लोग इसे हरदा की राजनीतिक सक्रियता पर अंकुश लगाने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं, जबकि दूसरे इसे पार्टी के भीतर संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की सामान्य कवायद मान रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषण में एक बात समझना जरूरी है कि किसी नेता और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद होने का अर्थ दल बदलना नहीं होता। हरीश रावत कांग्रेस के भीतर अपनी बेबाक राय और स्वतंत्र राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। कई मौकों पर उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी बात मजबूती से रखी है, लेकिन इससे उनके भाजपा में जाने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। हरदा के समर्थकों का मानना है कि जिस नेता ने कांग्रेस को अपनी राजनीतिक पहचान और नेहरू परिवार के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया हो, उसके भाजपा में जाने की कल्पना करना फिलहाल मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखने जैसा है।
उत्तराखण्ड की राजनीति में हरीश रावत की भूमिका को केवल चुनावी जीत-हार के तराजू पर नहीं तौला जा सकता। कांग्रेस संगठन में उनका लंबा अनुभव, राजनीतिक संघर्ष और कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहचान उन्हें प्रदेश की राजनीति में अलग स्थान दिलाती है। फिलहाल हरीश रावत के भाजपा में जाने की चर्चाएं अटकलों से आगे नहीं बढ़ी हैं। जब तक उनकी ओर से कोई स्पष्ट बयान या राजनीतिक कदम सामने नहीं आता, तब तक ऐसी चर्चाओं को तथ्य मानना उचित नहीं होगा। कांग्रेस के प्रति उनकी दशकों पुरानी प्रतिबद्धता और सार्वजनिक बयानों को देखते हुए उनके समर्थक आज भी यही कहते हैं कि हरदा की राजनीति में कांग्रेस केवल एक पार्टी नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक आत्मा है।

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