पंचायत का पैसा जनता का पैसा

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धामी का अल्टीमेटमः एक-एक पाई का देना होगा हिसाब
हरिद्वार (स्टाफ रिपोर्टर)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने हरिद्वार से पंचायत प्रतिनिधियों को विकास के साथ जवाबदेही का स्पष्ट संदेश दिया। त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों का पैसा जनता का पैसा है और उसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। विकास कार्यों की संख्या बढ़ाना ही उपलब्धि नहीं है, बल्कि उनका वास्तविक लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं। गांवों की तस्वीर बदलने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उनकी गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि सड़क बनी है तो उसकी गुणवत्ता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। पेयजल योजना बनी है तो ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचना चाहिए। पंचायत भवन बना है तो उससे जनता को सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों का मूल्यांकन उनकी संख्या से नहीं, बल्कि जनता को मिलने वाले वास्तविक लाभ से होना चाहिए। उन्होंने ग्राम सभाओं में जनभागीदारी बढ़ाने और योजनाओं में कमजोर एवं वंचित वर्गों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को क्षमता विकास प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से श्मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारीश् की भावना से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। गांव की समस्याओं को समझना, उनका समाधान कराना और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 भवनों की मरम्मत कराई गई है। एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी हो चुका है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, खर्च, वित्तीय प्रगति और निर्माण कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि पलायन की समस्या को कम किया जा सके। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया। ग्रामीण सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर नियमित सफाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 अक्टूबर से शुरू हुए जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों की विकास योजनाएं जनता की भागीदारी से तैयार की जाएं। हर योजना का लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम स्पष्ट होना चाहिए। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने भी पंचायतों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसपी नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र सहित बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि मुख्यमंत्री के पारदर्शिता और जवाबदेही के संदेश का असर गांवों में कितना दिखाई देगा? क्या पंचायतों में खर्च होने वाले धन का पूरा हिसाब आम जनता तक पहुंचेगा और क्या विकास योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा? इन सवालों का जवाब पंचायतों के धरातलीय कामकाज से ही सामने आएगा।

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