0
18

बद्रीनाथ के डीजे विवाद में शंख पर संग्राम
शंख को हड्डी बताकर फंसे महाराज
सवालः अगर शंख हड्डी है तो मंदिरों में शंखनाद क्यों?
देहरादून। बद्रीनाथ धाम में पिछले दिनों सांस्कृकि कार्यक्रम के नाम पर तेज आवाज वाले डीजे और म्यूजिक सिस्टम लगाकर नाच-गाना कराने और पर्यावरणविदों द्वारा इस पर एतराज जताये जाने के बाद सरकार के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने दावा कर दिया कि बद्रीनाथ धाम में शंख इसलिए नहीं बजाया जाता क्योंकि शंख हड्डी का बना होता है। शंख को हड्डी से बना होने का दावा किये जाने के बाद एक नई बहस छिड गयी है कि देश के मंदिरों में जो शंख बजाये जाते हैं तो क्या वह हड्डी के बने हुये हैं। सतपाल महाराज के इस बयान ने उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है कि अगर शंख हड्डी का बना होता है तो फिर एक दशक से मंदिरों की आस्था पर प्रहार हो रहा था। वहीं कांग्रेस ने सतपाल महाराज के इस बयान को मूर्खता की पराकाष्ठा बताते हुए अपना कड़ा एतराज जताया है। कांग्रेसी नेता सूर्यकांत धस्माना ने सतपाल महाराज को कटघरे में खडा करते हुए कहा कि उन जैसे नेता पर भी कुसंगति का ऐसा प्रभाव पडा है कि वे अब ज्ञानी की तरह नहीं अज्ञानी की तरह बेतुके बयान देने लगे हैं। सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि एक तरफ भाजपा खुद को सनातन का ठेकेदार बताती है दूसरी तरफ उसके सबसे वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज को यह भी नहीं पता कि शंख क्या हैै।
बदरीनाथ धाम में पिछले दिनों सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर तेज आवाज में डीजे और म्यूजिक सिस्टम लगाकर नाच-गाना कराए जाने का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के शंख को लेकर दिए गए बयान ने नई बहस खड़ी कर दी है। पर्यावरणविदों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों द्वारा बदरीनाथ जैसे पवित्र धाम में तेज संगीत पर सवाल उठाए जाने के बाद सतपाल महाराज ने दावा किया कि बदरीनाथ धाम में शंख इसलिए नहीं बजाया जाता क्योंकि शंख हड्डी से बना होता है। महाराज के इस बयान के बाद सवाल खड़ा हो गया है कि यदि शंख को हड्डी से बना माना जाए तो देशभर के मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में सदियों से होने वाले शंखनाद को किस नजरिए से देखा जाए? सनातन परंपरा में शंख का विशेष धार्मिक महत्व रहा है और पूजा-पाठ से लेकर आरती तथा धार्मिक अनुष्ठानों तक इसका प्रयोग होता आया है। अब यही बयान राजनीतिक विवाद का कारण भी बन गया है। कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने सतपाल महाराज के बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे “मूर्खता की पराकाष्ठा” करार दिया है।
धस्माना ने महाराज को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उन जैसे नेता पर भी कुसंगति का ऐसा प्रभाव पड़ गया है कि वे अब ज्ञानी की तरह नहीं, बल्कि अज्ञानी की तरह बेतुके बयान देने लगे हैं। उन्होंने भाजपा पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक तरफ भाजपा स्वयं को सनातन की सबसे बड़ी पैरोकार बताती है, दूसरी तरफ उसकी सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल सतपाल महाराज को यह तक नहीं पता कि शंख क्या है। बदरीनाथ में डीजे और तेज संगीत से शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक परंपराओं और शंख की उत्पत्ति तक पहुंच गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि धाम की मर्यादा पर उठे मूल सवालों का जवाब देने के बजाय कहीं एक नया विवाद तो खड़ा नहीं हो गया?

महाराज का बयान मूर्खता की पराकाष्ठा
देहरादून। बद्रीनाथ धाम में पिछले दिनों सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर तेज आवाज वाले डीजे और म्यूजिक सिस्टम लगा कर नाच-गाना कराने और पर्यावरणविदों द्वारा इस पर आपत्ति जताये जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज द्वारा दिये गए उस हास्यास्पद बयान को जिसमें उन्होंने कहा था कि बद्रीनाथ धाम में शंख इसलिए नहीं बजाया जाता क्योंकि शंख हड्डी का बना होता है, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने मूर्खता की पराकाष्ठा बताते हुए कड़ी निंदा की है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए धस्माना ने कहा कि सतपाल महाराज जैसे पढ़े-लिखे नेता पर भी कुसंगति का ऐसा प्रभाव पड़ा है कि वे अब ज्ञानी की तरह नहीं अज्ञानी की तरह बेतुके बयान देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ भाजपा खुद को सनातन का ठेकेदार बताती है और दूसरी तरफ उसके सबसे वरिष्ठ मंत्री को यह भी नहीं पता कि शंख क्या है। धस्माना ने कहा कि शंख कोई हड्डी नहीं है। विज्ञान के अनुसार शंख समुद्र में रहने वाले एक नर्म जीव घोंघे का बाहरी खोल है, जो उसके शरीर की मैंटल नामक परत द्वारा कैल्शियम कार्बोनेट से बनाया जाता है। इसमें न खून होता है न मज्जा, न यह शरीर के अंदर बनता है। हड्डी के विपरीत यह एक बेजान, पवित्र कवच है। यदि शंख हड्डी होता तो सनातन धर्म में हजारों वर्षों से इसे पूजा में, मंदिरों में, अभिषेक में इतना पवित्र क्यों माना जाता ? उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में शंख न बजाने का कारण हड्डी नहीं, बल्कि अध्यात्म है।
उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम ध्यान, योग, तपस्या का धाम है। यहाँ भगवान बद्रीनारायण स्वयं ध्यान में लीन हैं, इसलिए यहाँ शांत वातावरण रखा जाता है ताकि तपस्या भंग न हो। शास्त्रों में कहा गया है कि यहाँ देवता, यक्ष और ऋषि-मुनि आज भी तपस्या में हैं। उन्होंने कहा कि पौराणिक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी शंख में निवास करती हैं और बद्रीनाथ में लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की सेवा में हैं, इसलिए यहाँ शंख नहीं बजाया जाता। एक अन्य कथा में शंखचूड नामक राक्षस का वध होने के बाद उसकी अस्थियों से शंख की उत्पत्ति मानी गई, पर वह भी हड्डी नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक कथा है। धस्माना ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि उत्तराखंड के संस्कृति, पर्यटन और धर्मस्व मंत्री को ही अपने धामों का विज्ञान और पुराण दोनों नहीं पता। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा यह है कि भाजपा सरकार ने बद्रीनाथ जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में, जो एक इको-सेंसिटिव जोन है, वहाँ तेज आवाज के डीजे लगा कर नाच-गाना करा कर न केवल धार्मिक मर्यादा भंग की है, बल्कि पर्यावरणविदों की चिंता भी सही साबित की है। अब अपनी गलती छुपाने के लिए सतपाल महाराज शंख को हड्डी बता कर जनता को बरगला रहे हैं। धस्माना ने मांग की कि सतपाल महाराज अपने अज्ञानतापूर्ण बयान के लिए प्रदेश की जनता और सनातन धर्मावलंबियों से माफी मांगें और मुख्यमंत्री तत्काल स्पष्ट करें कि क्या सरकार की यही आधिकारिक समझ है कि शंख हड्डी है।

LEAVE A REPLY