आईपीएस तबादलों की आहट!

0
10

पसंदीदा पोस्टिंग पाने को जोड़तोड़ की चर्चा
किस-किस आईपीएस के सिर पर सजेगा कप्तानी का ताज?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। विधानसभा चुनाव से चंद माह पूर्व सरकार ने बारह अपर पुलिस अधीक्षकों के तबादले किये हैं तो वहीं अब राज्य के अन्दर यह चर्चाएं भी उठने लगी हैं कि चुनाव को देखते हुए कुछ जिलों के पुलिस कप्तानों को भी बदलने के लिए सरकार एक बडे मंथन के साथ अपनी मोहर लगा सकती है। पुलिस महकमे के अन्दर यह सुगबुगाहट चल रही है कि दो मैदानी जिलों के साथ चंद पहाड़ी जनपदों में तैनात पुलिस कप्तानों को भी इधर से उधर किया जा सकता है। चंद आईपीएस अपने लिए मलाईदार पोस्टिंग पाने को कुछ राजनेताओं और बडेघ् अफसरों की परिक्रमा करने के गुप्त मिशन में लगे हुए हैं ऐसी चर्चाएं अब तेज हो चली हैं। हैरानी वाली बात तो यह है कि भले ही अभी आईपीएस अफसरों के तबादले की सूची पर अंतिम मोहर न लग पाई हो लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है कि एक आईपीएस ने यह मान लिया है कि वह बडे जिले में तैनात हो जायेगा। अब सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हुई हैं कि क्या कुछ राजनेताओं और बडे अफसरों की आंखों के तारे बने चंद आईपीएस अपनी पसंद के जिले में तैनात होने का दम भर पायेंगे।
विधानसभा चुनाव से चंद माह पहले उत्तराखण्ड पुलिस महकमे में तबादलों की आहट तेज हो गई है। सरकार की ओर से 12 अपर पुलिस अधीक्षकों को इधर से उधर किए जाने के बाद अब पुलिस कप्तानों की कुर्सियों पर निगाहें टिक गई हैं। महकमे से लेकर सत्ता के गलियारों तक चर्चा है कि चुनावी समीकरण और कानून-व्यवस्था को देखते हुए सरकार आईपीएस अधिकारियों की तैनाती में भी बड़ा फेरबदल कर सकती है।
अंदरखाने चल रही चर्चाओं में दो मैदानी जिलों के साथ कुछ पर्वतीय जनपदों के कप्तानों के नाम संभावित बदलाव से जोड़कर देखे जा रहे हैं। हालांकि सरकार और पुलिस मुख्यालय की ओर से अभी आईपीएस तबादलों की किसी सूची की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद एएसपी के तबादलों के बाद कप्तानों को लेकर शुरू हुई सुगबुगाहट लगातार तेज होती जा रही है। चुनाव से पहले महत्वपूर्ण जिलों की कमान किसके हाथ होगी, इसे लेकर भी महकमे में गुणा-भाग शुरू होने की चर्चाएं हैं। बड़े और महत्वपूर्ण जिलों को लेकर कुछ आईपीएस अधिकारियों की दिलचस्पी किसी से छिपी नहीं रहती। इस बार भी महकमे के गलियारों में चर्चा है कि कुछ अधिकारी अपनी पसंद की पोस्टिंग हासिल करने के लिए सत्ता और नौकरशाही में मजबूत संपर्क तलाशने और समीकरण साधने में जुटे हैं।
यहां तक चर्चा है कि कुछ अधिकारी बेहतर और तथाकथित ‘मलाईदार पोस्टिंग’ के लिए प्रभावशाली राजनेताओं और बड़े अफसरों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश में हैं। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं है। ऐसे में किसी अधिकारी विशेष पर सवाल खड़ा करना जल्दबाजी होगी, लेकिन तबादला सूची से पहले तेज हुई लॉबिंग की चर्चाओं ने महकमे में हलचल जरूर बढ़ा दी है। सबसे दिलचस्प चर्चा एक आईपीएस अधिकारी को लेकर चल रही है। सूची पर सरकार की अंतिम मुहर लगने से पहले ही उन्हें एक बड़े जिले की कमान मिलने की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। यहां तक कहा जा रहा है कि संबंधित अधिकारी अपनी संभावित तैनाती को लेकर काफी आश्वस्त हैं। अब यह महज महकमे की अटकल साबित होती है या आने वाली सूची में उसका असर दिखाई देता है, इसका जवाब सरकार के आदेश के बाद ही मिलेगा।
दरअसल चुनावी समय में पुलिस कप्तानों की तैनाती सामान्य प्रशासनिक फेरबदल भर नहीं मानी जाती। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, राजनीतिक संवेदनशीलता और चुनावी तैयारियों के लिहाज से मैदानी जिलों की कप्तानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि संभावित तबादला सूची जारी होने से पहले ही आईपीएस अधिकारियों के नाम और जिलों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब निगाह सरकार के फैसले पर है। यदि कप्तानों का फेरबदल हुआ तो केवल यह नहीं देखा जाएगा कि कौन गया और कौन आया, बल्कि नजर इस पर भी रहेगी कि महत्वपूर्ण जिलों की कमान कामकाज और प्रशासनिक जरूरत के आधार पर सौंपी गई या सत्ता के गलियारों तक मजबूत पहुंच रखने वाले अफसर अपनी पसंद की कुर्सी हासिल करने में कामयाब रहे।

LEAVE A REPLY