धामी का जन-जन की सरकार अभियान बना जनआंदोलन

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सीएम का डोर-स्टेप गर्वनेस मॉडल हिट
देहरादून। मुख्यमंत्री ने पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के दौरान सरकार जन-जन के द्वार का आगाज किया था और कुछ ही समय में सरकार लाखों लोगों के द्वार पर पहुंची तो जनता को मुख्यमंत्री का सुशासन मॉडल खूब रास आया। मुख्यमंत्री का डोर-स्टेप गर्वनेस मॉडल हिट हो गया और लाखों लोगों को इस बात का इल्म हो गया कि सरकार सीधे उनके द्वार पर पहुंचकर उनके साथ खडी हुई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में सुशासन की जिस अवधारणा को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया था, वह अब जनभागीदारी के बड़े अभियान में बदलती दिखाई दे रही है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के जरिए सरकार ने प्रशासन को सचिवालय और सरकारी दफ्तरों से निकालकर सीधे गांव, कस्बों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचा दिया है। यही कारण है कि यह अभियान आज केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच भरोसे का मजबूत सेतु बनता जा रहा है। प्रदेश सरकार के आंकड़े बताते हैं कि अभियान के पहले और दूसरे चरण को मिलाकर अब तक 6 लाख 68 हजार से अधिक लोग इस पहल से सीधे जुड़ चुके हैं। यह संख्या अपने आप में इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री धामी की ष्सरकार जनता के द्वारष् की सोच को प्रदेशभर में व्यापक समर्थन मिल रहा है।
चार जुलाई से शुरू हुए दूसरे चरण में अब तक 198 विशेष शिविर लगाए जा चुके हैं। इन शिविरों में 1 लाख 34 हजार 740 नागरिकों ने भागीदारी की। इस दौरान 23 हजार 219 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 20 हजार 808 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। वहीं 81 हजार 753 पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड, समाज कल्याण पेंशन, कृषि उपकरण, चिकित्सा सहायता, प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराया गया। इससे पहले दिसंबर में आयोजित पहले चरण के 681 शिविरों में 5 लाख 33 हजार 452 लोगों ने भाग लिया था और करीब 33 हजार शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया था। दोनों चरणों को मिलाकर अभियान अब प्रदेश में सुशासन की एक मजबूत कार्यप्रणाली के रूप में स्थापित होता नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार यह स्पष्ट करते रहे हैं कि सरकार की असली पहचान तब बनेगी, जब आम नागरिक को अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालयों की दौड़ न लगानी पड़े। इसी सोच के अनुरूप अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे स्वयं जनता के बीच पहुंचें, शिकायतें सुनें और अधिकतम मामलों का समाधान मौके पर ही सुनिश्चित करें। यही मॉडल अब प्रदेश में प्रशासनिक कार्यशैली की नई पहचान बनता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह अभियान केवल योजनाओं का वितरण नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास, जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने की पहल है। दूरस्थ गांवों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने, पात्र लोगों को बिना भागदौड़ योजनाओं से जोड़ने और शिकायतों का त्वरित समाधान करने की व्यवस्था ने इस अभियान को प्रदेश के सबसे प्रभावी जनसंपर्क अभियानों में शामिल कर दिया है।
सरकार का दावा है कि ‘सरलीकरण, समाधान और जनसंतुष्टि’ के मूल मंत्र पर आधारित यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा, ताकि उत्तराखंड का कोई भी पात्र नागरिक सरकारी योजनाओं और सेवाओं से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री धामी की यह पहल अब सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनविश्वास का नया मॉडल बनकर उभर रही है।

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