फैसलों में फौलाद

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धामी के दिल में देवभूमि
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में लिये गये फौलाद जैसे फैसले करके सबको हैरान किया तो वहीं उन्होंने देवभूमि को अपने दिल में बसाकर उत्तराखण्ड की तस्वीर बदलने का जो शानदार आगाज कर रखा है उससे आज उत्तराखण्ड हर तरफ गुलजार होता हुआ नजर आ रहा है। अब तो उत्तराखण्ड के अन्दर यह आवाज उठने लगी है कि मुख्यमंत्री युवाओं के धाकड़ कप्तान बन चुके हैं और फौलादी नेतृत्व, हिमालय सा हौसला दिखाकर उन्होंने राज्य में एक नया इतिहास यह कहकर रच दिया है कि न झुकेंगे, न रूकंेगे। युवाओं के विश्वास को जीतने के लिए मुख्यमंत्री ने जो हुनर दिखाया है उसी का परिणाम है कि आज युवा शक्ति को इस बात का इल्म हो चुका है कि राज्य के मुख्यमंत्री उनके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कार्यकाल केवल सत्ता संचालन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई ऐसे फैसलों के कारण चर्चा में रहा जिन्होंने राज्य की दिशा और राजनीतिक विमर्श दोनों को प्रभावित किया। समर्थकों के अनुसार, धामी ने अनेक अवसरों पर यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि नेतृत्व का इरादा स्पष्ट हो, तो कठिन निर्णय लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए। समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में पहल हो या नकल विरोधी कानून जैसे सख्त कदम, धामी सरकार ने इन्हें पारदर्शी और जवाबदेह शासन की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णयों के रूप में प्रस्तुत किया। सरकार का तर्क रहा कि इन फैसलों का उद्देश्य व्यवस्था में विश्वास बढ़ाना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।
राज्य के लाखों युवाओं के बीच भी धामी की पहचान ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में बनी, जिन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने को प्राथमिकता दी। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर सख्ती, नकल माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई और कानून में कड़े प्रावधानों को समर्थक युवाओं के हित में उठाए गए कदम मानते हैं। इसी कारण अनेक युवा उन्हें धाकड़ कप्तान की संज्ञा भी देते हैं, क्योंकि उनके अनुसार ईमानदारी से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के विश्वास को फिर से मजबूत करने का प्रयास किया गया। धामी की कार्यशैली का एक और पक्ष उनकी दृढ़ता रही। राजनीतिक चुनौतियाँ हों, प्रशासनिक दबाव हों या कठिन परिस्थितियाँ। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कई बार यह दोहराया कि उत्तराखंड को विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जाना उनकी प्राथमिकता है। समर्थकों का कहना है कि हिमालय की तरह अडिग रहने का यही संकल्प उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरा।
आज उत्तराखंड की राजनीति में धामी के समर्थक उन्हें केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि दृढ़ निर्णय लेने वाले, युवाओं की उम्मीदों को महत्व देने वाले और देवभूमि के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले नेता के रूप में देखते हैं। आने वाले वर्षों में उनके फैसलों का व्यापक प्रभाव क्या रहा, इसका मूल्यांकन इतिहास और जनता करेगी, लेकिन इतना निश्चित है कि उनके कार्यकाल ने उत्तराखंड की राजनीति में निर्णायक नेतृत्व और बड़े नीतिगत निर्णयों की एक अलग छाप छोड़ी है।

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