राहुल गांधी का बडा संदेश

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रेस के घोडे़ आगे और लंगडे़ घोडे़ होंगे बाहर
राहुल के अल्टीमेटम से विभीषणों में मची है खलबली
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लम्बे समय से देश के अन्दर कांग्रेस को मजबूत करने की दिशा में तेजी के साथ आगे बढ रहे हैं। राहुल गांधी की नजर उत्तराखण्ड कांग्रेस पर टिकी हुई है क्योंकि राज्य के कुछ कांग्रेसी छत्रप मित्र विपक्ष की भूमिका में नजर आते रहे हैं और उन्होंने अपने फायदे के लिए कांग्रेस को राज्य के अन्दर कमजोर करने का जो सिलसिला शुरू किया था उसी के चलते कांग्रेस लगातार दो विधानसभा चुनाव हार गई थी। अब राहुल गांधी ने उत्तराखण्ड के कांग्रेसी नेताओं को भी दो टूक संदेश दे दिया है कि रेस और बारात के घोडों को अलग तो करना ही होगा क्योंकि अब तीन प्रकार के घोडे हैं एक घोडा बारात का तो दूसरा घोडा रेस का है लेकिन तीसरा घोडा लंगडा है जो न बारात के काबिल है और न रेस के इसलिए ऐसे लंगडे घोडों की पहचान कर उन्हें अपने से दूर किया जायेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पिछले काफी समय से देशभर में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के अभियान में जुटे हुए हैं। राज्यों में लगातार संगठन की समीक्षा की जा रही है और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित कर पार्टी को नई ऊर्जा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड कांग्रेस भी उनके फोकस में बताई जा रही है। उत्तराखंड में लगातार दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद संगठन की कार्यशैली, गुटबाजी और निष्क्रियता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा भी होती रही है कि कुछ नेता विपक्ष की प्रभावी भूमिका निभाने के बजाय केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने तक सीमित रहे, जिसका असर संगठन की मजबूती पर भी पड़ा।
इसी बीच राहुल गांधी की हालिया टिप्पणीकृष्रेस के घोड़े, बारात के घोड़े और लंगड़े घोड़े अलग-अलग होते हैंष्कृको उत्तराखंड कांग्रेस में भी एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन में अब केवल सक्रिय, संघर्षशील और जनता के बीच लगातार काम करने वाले नेताओं को ही आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं ऐसे नेताओं की पहचान भी की जाएगी जो न संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभा रहे हैं और न ही चुनावी मैदान में प्रभावी साबित हो पा रहे हैं। कांग्रेस के भीतर अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि संगठनात्मक स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। आने वाले समय में प्रदेश संगठन में जिम्मेदारियों के बंटवारे से लेकर सक्रियता के आधार पर नई रणनीति अपनाई जा सकती है। राहुल गांधी का यह संदेश ऐसे समय आया है जब कांग्रेस 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने लगी है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि संगठन में केवल वही चेहरे आगे रहें जो जमीन पर सक्रिय हों, जनता के बीच लगातार मौजूद रहें और कांग्रेस की विचारधारा को मजबूती के साथ आगे बढ़ाएं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक स्तर पर कई अहम फैसले देखने को मिल सकते हैं।

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