राहुल का चलेगा हंटर

0
18

कांग्रेस के विभीषणों की उल्टी गिनती शुरू!
उत्तराखण्ड में राहुल चलेंगे मास्टर स्ट्रोक
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में कल राहुल गांधी आ रहे हैं और वह अपनी सभा का आगाज अल्मोडा से करेंगे जिसको लेकर कांग्रेस के सभी दिग्गजों ने बडी तैयारी कर रखी है और कांग्रेस के तमाम बडे नेताओं ने दम भरा है कि यह रैली एतिहासिक होगी। 2027 के चुनावी रण को लेकर राहुल ने अभी से ही उत्तराखण्डवासियों की नब्ज पहचानकर उन्हें राज्य में सत्ता परिवर्तन करने के लिए अपना आक्रामक भाषण देकर उन्हें कांग्रेस की ओर लाने के लिए मास्टर स्ट्रोक चलेंगेे। वहीं चुनावी रणभूमि में तेज तर्रार योद्धाओं को मैदान में उतारने के लिए राहुल आगे आयेंगे और चार जून के बाद वह पार्टी के उन विभीषणों के चेहरे भी स्कैन करेंगे जो लम्बे अर्से से मित्र विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। मित्र विपक्ष की भूमिका निभाने वाले नेताओं को हाशिये पर लाने के लिए राहुल बडा राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे इसमें कोई शंका नहीं है?
देश में कांग्रेस को फिर से सत्ता की दहलीज तक पहुंचाने के लिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अब संगठन के भीतर बड़े बदलाव की तैयारी में जुट गए हैं। पार्टी के अंदर यह चर्चा तेजी से चल रही है कि राहुल गांधी अब उन नेताओं की पहचान करने में जुटे हैं जो वर्षों से कांग्रेस में रहकर भी पार्टी को मजबूत करने के बजाय सत्ता पक्ष के लिए आसान विपक्ष की भूमिका निभाते रहे हैं। यही कारण है कि राहुल गांधी का आगामी उत्तराखण्ड दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी अब संगठन में ‘परफॉर्मेंस पॉलिटिक्स’ का फार्मूला लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जो नेता सिर्फ बयानबाजी तक सीमित हैं और जनता के बीच उनकी पकड़ कमजोर है, उन्हें संगठन में हाशिये पर भेजा जा सकता है। वहीं सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने वाले नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियां मिलने की संभावना जताई जा रही है। चार जून को उत्तराखण्ड में राहुल गांधी का दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस संगठन के अंदर बड़े ऑपरेशन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि अब कांग्रेस में सिर्फ वही नेता टिक पाएंगे जो जनता के मुद्दों पर मजबूती से लड़ाई लड़ते दिखाई देंगे। वर्षों से संगठन में निष्क्रियता और गुटबाजी को बढ़ावा देने वाले नेताओं पर भी राहुल गांधी की नजर बताई जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राहुल गांधी अब ‘रेस के घोड़ों’ और ‘बारात के घोड़ों’ के बीच स्पष्ट अंतर करने के मूड में हैं। चुनावी मैदान में जीत दिलाने की क्षमता रखने वाले नेताओं को आगे लाने और सिर्फ पदों की राजनीति करने वालों को किनारे करने की रणनीति तैयार की जा रही है। यही कारण है कि कांग्रेस के कई नेताओं की धड़कनें अभी से बढ़ने लगी हैं। उत्तराखण्ड में कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक कमजोरी, गुटबाजी और नेतृत्व संघर्ष से जूझती रही है। ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा पार्टी के लिए नई दिशा तय कर सकता है। माना जा रहा है कि संगठन में बड़े फेरबदल के संकेत भी इसी दौरे से मिल सकते हैं। कांग्रेस हाईकमान का साफ संदेश है कि आगामी चुनाव केवल नारों से नहीं, बल्कि जमीन पर संघर्ष करने वाले नेताओं के दम पर लड़ा जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राहुल गांधी उत्तराखण्ड में संगठन की सर्जरी करते हैं तो कई बड़े चेहरों की राजनीतिक भूमिका बदल सकती है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर कौन मजबूत होगा और कौन कमजोर, इसकी पहली झलक चार जून के दौरे में देखने को मिल सकती है। फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि राहुल गांधी उत्तराखण्ड में कांग्रेस को नई धार देने और निष्क्रिय नेतृत्व पर कार्रवाई का स्पष्ट संदेश देने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

LEAVE A REPLY