धामी को जीत की गारंटी मानती भाजपा

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नये राजनीतिक अध्याय की पटकथा लिख रहे धुरंधर
तीसरी बार सत्ता में वापसी का संकल्प लेकर आगे बढ़ती भाजपा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की सियासत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब केवल एक जननेता नहीं, बल्कि भाजपा की सबसे मजबूत राजनीतिक धुरी बनकर उभरे हैं। चार वर्षों में उन्होंने बार-बार यह साबित किया है कि राजनीति केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि फैसलों और परिणामों से चलती है। धामी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि उन्होंने सरकार और संगठन के बीच ऐसा तालमेल बनाया, जिसकी मिसाल आज भाजपा के भीतर दी जा रही है। जहां विरोधी उनकी लोकप्रियता से बेचैन हैं, वहीं पार्टी का कार्यकर्ता उन्हें जीत की गारंटी मानकर आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व का भरोसा, कार्यकर्ताओं का उत्साह और जनता का समर्थन इन तीनों को एक सूत्र में पिरोकर धामी ने यह संदेश दे दिया है कि उत्तराखण्ड की राजनीति में उनका कद केवल बढ़ नहीं रहा, बल्कि एक नए राजनीतिक अध्याय की पटकथा भी लिख रहा है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब भाजपा की राजनीति के ऐसे धुरंधर नेता के रूप में उभर चुके हैं, जिन्होंने सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर पार्टी को एक नई मजबूती प्रदान की है। मुख्यमंत्री धामी लगातार यह संदेश देने में सफल रहे हैं कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता है और यही एकजुटता आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की सबसे बड़ी पूंजी बनने जा रही है। भाजपा की शीर्ष लीडरशिप पहले से ही मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली और निर्णय क्षमता की प्रशंसा करती रही है, लेकिन हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तीन दिवसीय उत्तराखण्ड दौरे ने प्रदेश की राजनीति को लेकर कई संकेत भी दे दिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने प्रवास के दौरान पार्टी के सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ अलग-अलग स्तर पर संवाद किया। इस दौरान उन्होंने सरकार के कामकाज और संगठन की स्थिति को भी करीब से परखा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष को मिले फीडबैक ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा के अधिकांश जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व और सरकार के कार्यों से संतुष्ट हैं। यही कारण रहा कि दौरे के दौरान कहीं भी किसी प्रकार की असहमति या बड़े मतभेद की तस्वीर सामने नहीं आई। इसके विपरीत भाजपा के भीतर एकजुटता और सामूहिक नेतृत्व का संदेश अधिक मजबूती के साथ उभरकर सामने आया। मुख्यमंत्री धामी ने भी अपने व्यवहार और नेतृत्व शैली से यह संकेत देने का प्रयास किया कि पार्टी में किसी प्रकार की नाराजगी या गुटबाजी की स्थिति नहीं है। उन्होंने लगातार संगठन और सरकार के बीच संवाद को मजबूत बनाए रखा है। यही वजह है कि भाजपा के विधायक, सांसद और मंत्री सार्वजनिक मंचों पर भी एक स्वर में सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच रख रहे हैं।
उत्तराखण्ड में भाजपा के सामने अब सबसे बड़ा लक्ष्य लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि राज्य में विकास, निवेश, पर्यटन, बुनियादी ढांचे, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और जनहित से जुड़े अनेक फैसलों ने भाजपा को मजबूत राजनीतिक आधार दिया है। ऐसे में संगठन और सरकार यदि इसी तरह एकजुट होकर आगे बढ़ते हैं तो 2027 का चुनाव भाजपा के लिए और अधिक मजबूत स्थिति में लड़ा जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि मुख्यमंत्री धामी ने पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की जो रणनीति अपनाई है, उसका लाभ भाजपा को मिला है। बड़े नेताओं से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक संवाद बनाए रखने की उनकी शैली ने उन्हें संगठन और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में स्थापित किया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में भी नया उत्साह दिखाई दे रहा है। पार्टी के भीतर यह संदेश साफ तौर पर पहुंचा है कि आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और सभी नेता तथा कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेंगे। उत्तराखण्ड की राजनीति में फिलहाल जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, उसमें भाजपा संगठन एकजुट दिखाई दे रहा है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उसके केंद्र में खड़े नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि पार्टी अब विकास, संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व के भरोसे तीसरी बार सत्ता में वापसी का संकल्प लेकर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

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