युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष फूकेंगें धामी की ‘नवीन’ सरकार का बिगुल
अमन वर्मा
देहरादून। भारत देश में बेशकीमती हीरों की परख करने में गुजरात अव्वल नंबर पर है। बताया जाता है कि गुजरात के जौहरियों ने जिस भी हीरे को ‘ओके रिपोर्ट’ दे दी, उस हीरे की कीमत खुद-ब-खुद आसमान चढ़ जाती है। गुजरात केवल रत्न रूपी हीरों को परखने में ही नहीं बल्कि अब तो राजनीतिक हीरों को परखने में भी अव्वल माना जा रहा है। राजनीतिक हीरों को परखने के लिए गुजरात को दो दमादार राजनीतिक जौहरी ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले एक दशक से अधिक के समय में अनेक राजनीतिक हीरों को परखने और उन्हें तराशने में अपना लोहा मनवाया है। इन राजनीतिक जौहरियों को आम जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नाम से जानती है। वैसे तो मोदी और शाह ने कई राजनीतिक हीरों को परखा है और उन्हें तराशा हैं परंतु जिनकी चर्चा मौजूदा समय में सबसे अधिक हो रही है वे हैं भाजपा की नवनियुक्त युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के राजनीतिक हीरों को परखने के पैमाने को साधारण भाषा में यदि समझा जाए तो बस यह है कि यह दोनों किसी भी साधारण से दिखने वाले भाजपा कार्यकर्ता को चुनते हैं, उसके अंदर छिपी हुई विलक्षणता को खंगालते हैं, उसे और निखारने के लिए उसे तराशते हैं और अंत में वह उस कार्यकर्ता को एक टास्क देते हैं। परिणाम यह निकलता है कि इन दोनों दिग्गजों द्वारा चुने गए भाजपा कार्यकर्ता अधिकांश मौकों पर अपने-अपने टास्क को सफलता के साथ पूरा करते हैं। इन्हीं प्रक्रियाओं से गुजर कर जो दो राजनीतिक हीरे निखर कर सामने आए हैं, वहीं हैं नितिन नवीन और पुष्कर सिंह धामी, जिन्होंने हर मौके पर उन्हें दिए गए टास्क को अपनी राजनीतिक सूझबूझ के साथ पूरा किया और मोदी-शाह के तराशे हुए राजनीतिक हीरों में अपनी जगह स्थापित की।
जब भाजपा हाईकमान ने 45 वर्ष आयु के युवा नितिन नवीन को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना था तो खुद भाजपा के भीतर से लेकर पूरे देश में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था कि इतने बड़े राजनीतिक दल की कमान किसी कम उम्र के कम अनुभवी राजनेता को देकर भाजपा हाईकमान ने गलती कर दी। हालांकि ऐसी चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पूर्ण रूप से आश्वस्त थे कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन का उनका चुनाव एक सही फैसला है क्योंकि उन्हें नितिन की क्षमता पर विश्वास था। अपने राजनैतिक दल के वरिष्ठ नेताओं को विश्वास को नितिन नवीन ने कायम रखा कुछ ऐसा करके दिखा दिया जिसकी वजह से राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल भारत के इतिहास में सदा के लिए अमर हो गया। पश्चिम बंगाल जैसे विषम राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनना राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन की राजनीतिक क्षमता का जीवंत उदाहरण है।
वहीं बात करें उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तो उन्होंने तो वर्ष 2022 में ऐसा कारनामा करके दिखा दिया था जो उत्तराखंड की इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गया। उत्तराखंड राज्य को लेकर एक मिथक चलता था कि यहां हर पांच साल में सरकारें बदल जाती हैं। वर्ष 2022 की विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में चल रही राजनीतिक उठापठक भी इस ओर इशारा कर रही थी सरकारें बदलने का मिथक टूटने वाला नहीं हैं। उत्तराखंड की सियासत का गहन अध्ययन करने के बाद गुजरात के उन्हीं दो राजनीतिक जौहरियों ने युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी पर विश्वास जताया और अपने राजनीतिक हीरे के रूप में उन्हें उस राजनीतिक उठापठक के दौर में उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया। पार्टी हाईकमान के विश्वास को सही साबित करते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इतिहास रचते हुए उत्तराखंड के तथाकथित मिथक को तोड़ा और उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई।
उत्तराखण्ड में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में हैं, जिसको लेकर भाजपा काफी उत्साहित है और उसके कार्यकर्ता जीत की हैट्रिक लगाने को आतुर नजर आ रहे हैं। कार्यकर्ताओं के इसी उत्साह और आतुरता में ईंधन डालने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उत्तराखंड आ रहे हैं। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के तराशे हुए दो राजनीतिक हीरों नितिन नवीन और पुष्कर सिंह धामी का मिलन काफी सुखद होने वाला है और उत्तराखंड की राजनीति को समझने वाले यहां तक कह रहे पहाड़ी राज्य में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए भाजपा को इसी मिलन की आवश्यकता है और यहीं कारण है कि भाजपा के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष धामी की ‘नवीन’ सरकार का बिगुल फूंकने उत्तराखंड आ रहे हैं।
