संयुक्त नागरिक संगठन ने डीएम को लिखा खत
तो क्या नगर निगम को बधाई की राशि तय करने का है अधिकार?
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजधानी में एक बार फिर किन्नरों को बधाई दिये जाने को लेकर एक नई बहस उस समय छिड गई जब नगर निगम ने किन्नरों की बधाई की राशि एक मुश्त तय कर दी। किन्नरों को बधाई के रूप में राशि तय किये जाने को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन ने अपनी नाराजगी दिखाई है और साफ कहा है कि जब उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय ने किन्नरों को बधाई दिये जाने को लेकर रोक लगा दी है तो फिर राजधानी में किन्नरों को एकमुश्त राशि देने के लिए क्या नगर निगम के पास ऐसा कोई अधिकार है कि वह किन्नरों को बधाई देने के लिए एक राशि तय कर सके? संगठन ने डीएम को खत लिखते हुए इस बारे में अवगत कराया है और नगर निगम के इस फैसले पर विधिक राय लेने की भी मांग की है जिससे कि एक गरीब आदमी को हजारों रूपये बधाई के रूप में देने से बचाया जा सके।
राजधानी में एक लम्बे दशक से किन्नरों द्वारा शादी, समारोह और संतान के पैदा होने पर मुंह मांगी बधाई मांगने का जो खतरनाक खेल चल रहा है उससे आम जनमानस के मन में किन्नरों के आतंक को लेकर बेहद नाराजगी दिखाई देती रही है। संयुक्त नागरिक संगठन भी डीएम से लेकर अधिकारियों को अवगत करा चुका है कि राजधानी में किन्नर समाज द्वारा लोगों से बधाई के रूप में जबरन लाखों रूपये की मांग की जाती है और जब वह इतने पैसे देने में मनाही करते हैं तो उसके बाद किन्नरों द्वारा उनके घर पर जो उत्पात मचाया जाता है उससे एक आम नागरिक इन किन्नरों से हमेशा भयभीत रहता है। अब एक बार फिर नगर निगम ने किन्नरों को बधाई के रूप में 5100 सौ रूपये देने का प्रस्ताव पारित किया है। नगर निगम के इस फैसले से गरीब तबके के लोग काफी हैरान हैं और उनका मानना है कि वह इतनी बडी राशि कैसे किन्नरों को बधाई के रूप में दे पायेंगे। गरीब तबके के लोगों का मानना है कि अगर बधाई की राशि पांच सौ रूपये होती तो वह देने में भी सक्षम थे लेकिन दिहाडी मजदूरी कर परिवार का पालन करने वाले कैसे किन्नरों को बधाई के रूप में हजारों रूपये दे पायेंगे। वहीं संयुक्त नागरिक संगठन ने डीएम को एक खत लिखा है जिसमें कहा गया है कि निगम ने बैठक में हमारे समाज के अंग किन्नरों की बधाई राशि 5100- निर्धारित किए जाने हेतु पार्षदों की प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाना है। किन्नरों द्वारा बधाई राशि वसूलने, नगर निगम द्वारा इस राशि को निर्धारित करने हेतु क्या विधिक अधिकार प्राप्त है? इस विषय पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा 28 अप्रैल 2026 को याचिका संख्या रिट-सीएनओ- 3495, 2026 रेखादेवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में पारित आदेश को मंगा कर अध्ययन करने का आपसे सादर अनुरोध है। आदेश में बताया गया है कि पारंपरिक रूप से किन्नरों द्वारा बधाइयां जजमानी के नाम पर पैसे वसूलने का कोई कानूनी आधार नहीं है और बिना कानूनी अधिकार के धनराशि वसूलना भारतीय न्याय संहिता में अपराध है।यह मौलिक अधिकार भी नहीं है। किन्नरों द्वारा निश्चित क्षेत्र में बधाई मांगने के अधिकार की मांग को भी उच्च न्यायालय ने नामंजूर कर दिया है। महोदया,किन्नरों को बधाई के नाम पर यदि आम नागरिक अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार एक से सौ रूपये भी देता है तो इन्हें किन्नरों द्वारा इसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए। अधिकतम मुंहमांगी बधाई वसूलने के लिए लोगों को डराना,धमकाना, शोर मचाकर आतंक फैलाना,अश्लील आचरण कर उत्पीड़न करना,जबरन वसूली करना आपराधिक कार्य हैं जिन पर रोक लगाने हेतु विगत वर्ष उत्तराखंड के पुलिस विभाग द्वारा भी राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।अतः आपसे अनुरोध है कि कोई भी निर्णय लिए जाने से पहले सभी संदर्भित तथ्यों पर विधिक राय लेने का कष्ट करें अन्यथा उत्पीड़ित नागरिक न्यायालय का सहारा भी ले सकते हैं।
