देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड की राजधानी में महिला अपराध अब न के बराबर हो चुके हैं और मुख्यमंत्री ने हमेशा महिला अपराध को लेकर सख्त रूख अपनाया हुआ है और उन्होंने साफ संदेश दिया हुआ है कि अगर राज्य में किसी ने भी महिलाओं के साथ अपराध करने का दुसाहस किया तो उसे अपराध स्थल के दूसरे चौराहे पर उसका अंजाम भुगतना पडेगा। मुख्यमंत्री के इस अल्टीमेटम से राज्य के अन्दर महिला अपराध का तांडव अब खत्म होता जा रहा है लेकिन हैरानी वाली बात है कि एक निजी कम्पनी द्वारा महिला अपराध को लेकर कराये गये हैरान करने वाले सर्वे में दून के अन्दर महिलाओं को असुरक्षित बताने का जो भोपू बजाया गया उसको लेकर राजधानी की महिलाओं में भी जहां बडा आक्रोश है तो वहीं राज्य की महिला आयोग अध्यक्ष भी इस सर्वे को लेकर सख्त नाराज नजर आ रही हैं और उन्होंने इस कथित सर्वे पर अपनी बेबाक बात रखते हुए साफ कहा है कि दून की महिलायें रात-दिन सुरक्षित हैं और उन्हें इस बात का इल्म है कि राजधानी का पुलिस प्रशासन महिला अपराध को लेकर हमेशा अलर्ट रहता है और यही कारण है कि राजधानी के अन्दर महिला अपराध करने का कोई दुसाहस नहीं कर पा रहा।
उल्लेखनीय है कि निजी कंपनी द्वारा जारी महिला सुरक्षा की एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स (नारी) को लेकर उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने सख्त आपत्ति जताई है। आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने साफ कहा कि इस रिपोर्ट का महिला आयोग से कोई संबंध नहीं है और न ही आयोग किसी निजी सर्वे का समर्थन करता है। वहीं महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने निजी सर्वे पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई है। बता दें कि दिल्ली में 28 अगस्त को आयोजित नारी 2०25 कार्यक्रम में पीवैल्यू एनालिटिक्स के सर्वे के आधार पर ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडमिशियंस ने पुस्तक ‘नारी 2०25Ó प्रकाशित की। इसमें देहरादून को महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों की सूची में शामिल किया गया। इस पर कुसुम कण्डवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा सिर्फ 12,77० महिलाओं से 31 शहरों में कराए गए सर्वे पर महिला असुरक्षा का निष्कर्ष निकालना पूरी तरह भ्रामक है। देहरादून की महिलाएं जानती हैं कि यहां सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी अप्रिय घटना पर तुरंत कड़ी कार्रवाई होती है।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि इस सर्वे का राष्ट्रीय महिला आयोग का भी समर्थन नहीं किया है। कण्डवाल ने बताया कि इस पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने भी इस सर्वे का समर्थन नहीं किया। बाद में फोन पर बातचीत में रहाटकर ने स्पष्ट किया कि न तो इस रिपोर्ट का राष्ट्रीय महिला आयोग से कोई लेना-देना है और न ही यह उनकी ओर से जारी की गई है। वहीं महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि देहरादून की छवि को धूमिल करने का यह प्रयास बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। आयोग जल्द ही इस रिपोर्ट से जुड़े आंकड़ों को तलब करेगा और आवश्यक कार्रवाई करेगा।

