सियासत में छल करने का हुनर नहीं रखते सीएम
सिर्फ मोदी के विजन को धरातल पर उतारने का जुनून
सादगी ऐसी की हर कोई धामी का कायल
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। देश के प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री को सत्ता संभालने के बाद एक ही मंत्र दिया था कि आवाम की नब्ज को पहचानते हुए उसकी उम्मीदों पर खरा उतरे और राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार पर प्रहार करें जिससे जनता को यह इल्म हो जाये कि उनका मुख्यमंत्री एक नई सियासत करने के लिए उनके बीच आ गया है। मुख्यमंत्री ने अपने चार सालों के कार्यकाल में प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने का जुनून अपने मन के अन्दर पाल रखा है और वह जिस इच्छाशक्ति के साथ सरकार चला रहे हैं उससे यह साफ नजर आ चुका है कि मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों की नब्ज पर कब्जा कर लिया है और उसी के चलते आज राज्य की जनता हर चुनाव में कमल खिलाने के लिए आगे बढती जा रही है। मुख्यमंत्री ने अपने चार साल के कार्यकाल में सियासत के अन्दर छल करने का कोई हुनर नहीं दिखाया और वह सबको साथ लेकर विकास की उडान पर उडने में ही अपनी सारी ताकत झोंक रहे हैं और यही कारण है कि आज मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की राजनीतिक पाठशाला में हमेशा अव्वल पायदान पर आकर खडे हुये हैं।
देश के अन्दर भाजपा ने पहली बार अपने हारे हुये मुख्यमंत्री को दुबारा राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश दिया था कि पुष्कर सिंह धामी को पार्टी के ही कुछ लोगों ने एक साजिश के तहत सिर्फ इसलिए हरवाने का खेल खेला था कि वह दुबारा मुख्यमंत्री न बन पाये लेकिन मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्दर जिस अंदाज में सारे मिथक तोडकर भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलाया था उसका ताज उन्हीं के सिर पर सजा और दिल्ली में भी उन्हें एक स्वच्छ छवि का राजनेता माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने हमेशा स्वच्छता और पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने का हुनर दिखाया और राज्य की जनता की नब्ज पहचानते हुए उन्होंने जिस तरह से उन्हें अपना परिवार मानकर हर सुख दुख में उनके साथ खडे होने का जो अटल रूप दिखा रखा है उससे उनकी राजनीतिक विरासत को छल से हडपना असम्भव ही नजर आता है।
उत्तराखण्ड की राजनीति में राज्यवासियों को एक से एक बडे राजनीतिज्ञ मिले और उन्होंनेे सत्ता चलाने के लिए अपने आपको जिस तरह से भौकाल के रूप मे पेश किया वह किसी से छिपा नहीं है। वहीं उत्तराखण्ड के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल राज्यवासियों ने करीब से देखा जिनमे कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सादगी से सत्ता चलाई तो वहीं कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने हिटलर अंदाज मे सरकार चलाने के लिए अपने आपको आगे किया और उनके शासनकाल मे अगर किसी ने भी सरकार के भ्रष्टाचार व घोटालों का आईना उन्हें व जनता को दिखाने की पहल की उसे फर्जी मुकदमों के मकडजाल मे फंसाकर आवाम को संदेश दिया जाता रहा कि अगर उन्होंने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी दिखाई तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पडेगा। वहीं भाजपा हाईकमान ने जबसे युवा राजनेता को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी है तबसे वह धाकड अंदाज मे सरकार चलाने के लिए आगे बढते जा रहे हैं और उन्होंने अपने तीन साल के शासनकाल मे आवाम की नब्ज पहचानकर उस पर अपना कब्जा कर लिया जिससे अब मुख्यमंत्री को राज्य नहीं देशभर मे राजनीति का बाजीगर माना जा रहा है।
बता दें कि जब केदारनाथ उपचुनाव मे कांग्रेस व भाजपा के बीच शुरूआती दौर मे रोचक मुकाबला माना जा रहा था लेकिन चुनाव से मात्र चंद दिन पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केदारनाथ मे खुद डेरा डालकर वहां पार्टी प्रत्याशी के समर्थन मे ताबडतोड प्रचार-प्रसार का जो सिलसिला शुरू किया उससे हर तरफ धाकड धामी-धाकड धामी का शोर मचना शुरू हो गया था और उसी से भाजपा के काफी छत्रपों और पार्टी संगठन के पदाधिकारियों की बांछे खिल गई थी कि अब चुनाव भाजपा के हाथो मे आ चुका है। पिछले चार सालों से दबंग और धाकड राजनीति करने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता चलाने के लिए जो एक बडी लकीर राजनीतिक पिच पर खींच रखी है उससे उन्हें उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर मे अब राजनीतिक बाजीगर माना जा रहा है। हारी हुई बाजी को जीतने का हुनर सैनिक पुत्र ने उत्तराखण्ड के अन्दर दिखाया है उससे यह बात तो साफ हो गई है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आवाम की नब्ज पर कब्जा कर उनके दिलों को जीतते हुए उत्तराखण्ड को हर तरफ गुलजार करने के मिशन मे आगे बढ़ रहे हैं। उत्तराखण्ड में एक ही आवाज बुलंद हो रही है कि मुख्यमंत्री जिस रणनीति से सरकार चला रहे हैं उससे कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें हैं कि 2027 के चुनाव में वह कैसे राज्य के अन्दर कमल को खिलने से रोक सकेंगे? मुख्यमंत्री ने अभी से ही 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बडी जीत हासिल करने का रोड मैप तैयार करना शुरू कर दिया है।

