प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री गढवाल व कुमांऊ में सामान्तर विकास की अलख जगाने के लिए आगे बढे हुये हैं और मैदानी इलाकों की तरह वह पहाडों में भी विकास की अलख जगाने के अपने सपने को पंख लगाते हुए नजर आ रहे हैं और यही कारण है कि पहाड के पानी और पहाडी की जवानी को यह विश्वास हो चला है कि मुख्यमंत्री पहाडों को सवारने के लिए आगे आ रहे हैं तो उससे पहाडों के इलाके गुलजार होंगे और गांव-गांव में युवाओं के न रहने से जो विरानी छाई हुई है वह भी दूर होगी। मुख्यमंत्री के विजन से पहाडवासी गदगद हैं और मानसून मेें जिस तरह से पहाड के कुछ जिलों में बादल फटने से आपदा आई उससे मुख्यमंत्री बहुत आहत हैं और यही कारण है कि वह आपदा पीडितों को सीने से लगाकर उनके रक्षक बनकर उनके सामने यह कहकर खडे हो रहे हैं कि वह घबराये नहीं मैं साथ खडा हंू।
उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही राज्य के अन्दर यह बहस चलने लगी थी कि जिस उद्देश्य के लिए राज्य का निर्माण किया गया है उसे पूरा करने के लिए सरकारों को पहाडों का विकास करना होगा क्योंकि पहाड़ के लोग पहाड की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। राज्य का निर्माण होने के बाइस साल बाद भी पहाडों में विकास का पहिया आगे बढता हुआ नजर नहीं आया और पहाडों से युवाओं का पलायन और वहां खाली होते गांव उत्तराखण्ड के पहाडों की दास्तां हमेशा बयां करते रहे?
उत्तराखण्ड के पहाड कब विकास से गुलजार होंगे इसको लेकर पहाडवासियों के मन में हमेशा एक चिंता की लकीर दिखाई देती थी और सिर्फ पलायन आयोग बनाने से पहाडों में पलायन रूक पायेगा यह भी एक रहस्यमय सवाल हमेशा बना हुआ है? पहाडों में विकास की नई उडान भरने के लिए पहाड़वासियों को एक ऐसे राजनेता की तलाश थी जो पहाडो ंमें विकास की नई अलख जगा सके। देश के प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड के युवा राजनेता को जब मुख्यमंत्री की कमान सौंपी तो उन्होंने पहाडों को एक नई उडान पर ले जाने का मन के अन्दर संकल्प ले लिया था और इस संकल्प को वह धरातल पर उतारने के लिए एक बडे विजन के साथ आगे बढते जा रहे हैं। बाइस साल बाद राज्य को ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो बार-बार पहाडों में जाकर वहां विकास की नई बयार बहाने के लिए रात्रि प्रवास भी कर रहे हैं और उनके इस विजन को देखकर पहाडवासियों के मन मे भी आशा की अलख जग चुकी है अब उनके पहाड विकास से गुलजार हो जायेंगे। मुख्यमंत्री पहाड की महिलाओं को स्वरोजगार से जोडकर जो एक नई पटकथा लिखी है उसी के चलते आज पहाड की महिलायें स्वरोजगार से अच्छी खासी आमदनी कर रही हैं और मुख्यमंत्री का यही संकल्प है कि वह पहाडों को गुलजार करने की दिशा मंे आगे बढते रहेंगेे।
उत्तराखण्ड की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आगे बढते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में राजनीति का अर्थ ही बदल कर रख दिया है और वह एक नई दिशा में आगे बढ़कर राजनीति करते हुए आवाम के दिलों में अपनी जगह बनाने के मिशन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर अधिकांश राजनेता राजनीति मे आते ही दम भरते रहे कि वह जनता की सेवा और उनके हितों की रक्षा करने के लिए राजनीति मे अपने कदम रख रहे हैं। समय के साथ राजनीति में आये उत्तराखण्ड के काफी राजनेता पॉवर मे आते ही अपने अहंकार के सागर मे डूबकी लगाने लगे और उन्होंने राजनीति मे आने का जो उद्देश्य आवाम के सामने बताया था उस उद्देश्य से वह दूर बढकर स्वाथ की राजनीति मे आगे बढते चले गये। आज उत्तराखण्ड के अधिकांश नेता जनसेवा की बजाए अपने एजेंडे पर अपनी राजनीति को आगे बढाने के मिशन में खडे हुये नजर आ रहे हैं। उत्तराखण्ड के चौबीस सालों के इतिहास से यह स्पष्ट होता है कि राज्य निर्माण के लिए पहाड की आवाज उठाने वाले काफी नेताओं का मुख्य उद्देश्य जनहित से ज्यादा स्वंहित रहा है। राज्य निर्माण के बाद पहाड के विकास का सपना दिखाने वाले अधिकांश राजनेताओं ने पहाडों से पलायन कर मैदानी जिलों में अपने कदम आगे बढा दिये और वह मैदान मे रहते हुए पहाड के विकास का दम भरने के लिए आगे तो दिखाई देते हैं लेकिन उनका एजेंडा सिर्फ एक दिखावे से ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी से पहले के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री और राजनेताओं ने पहाडों के विकास की दिशा में कोई अलख जगाने का काम नहीं किया और उसी के चलते युवा बेरोजगारी के भवर में फंसकर उत्तराखण्ड से बाहर रोजगार की तलाश में जाते रहे जिससे पहाड के पहाड खाली होने का शोर हमेशा मचता रहा है। कई जनपदों में पहाड़ विरान हुये और काफी घरों में उग आई घास और सन्नाटा यह बताने के लिए काफी है कि पहाडों में विकास का पहिया हमेशा थमा रहा। उत्तराखण्ड की कमान जबसे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आई है उन्होंने पहाड में विकास को लेकर एक नई लकीर खींच दी है और उन्होंने पहाडों में रहने वाली महिलाओं को स्वरोजगार से जोडने का जो सिलसिला शुरू किया है उससे आज पहाडों की महिलायें स्वरोजगार को अपनाकर एक नई दिशा में आगे बढती हुई दिखाई दे रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को शुरूआती दौर से ही इस बात का इल्म रहा कि अब उन्हें पहाड मे विकास की एक नई पटकथा लिखनी है जिससे कि पहाडों से हो रहे पलायन पर ब्रेक लग सके और राज्य के जो युवा पहाडों से पलायन कर रोजगार की तलाश मे दूसरे राज्यों में नौकरी करने के लिए जा रहे हैं वह पहाड मे ही रहकर स्वरोजगार को अपनाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करें।

