होमस्टे का साम्राज्य खडा कर हीरो बने धामी

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री एक बडे विजन के राजनेता के रूप में अपनी बडी पहचान स्थापित कर चुके हैं क्योंकि उन्होंने पहाड से पलायन रोकने के जिस विजन को धरातल पर उतारने के लिए अपने आपको आगे किया उससे आज पहाड के युवा पहाड में ही अपने रोजगार को आगे बढाने के संकल्प पर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जहां मातृशक्ति को स्वरोजगार से जोडने की दिशा में बडे विजन के साथ काम किया है उससे आज पहाड की मातृशक्ति मुख्यमंत्री को एक बडे विजन का राजनेता मान चुकी है। मैदान से लेकर पहाडों में मुख्यमंत्री ने होमस्टे का जो चलन शुरू कराने के लिए अपनी हरी झंडी दी थी उसके चलते आज राज्य के पहाड व मैदान में युवा पीढी अपने घरों में होमस्टे चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने के मिशन में आगे बढी हुई है। आज उत्तराखण्ड के अन्दर होमस्टे एक आम परिवार के लिए आमदनी का बडा सहारा बन गया है और यही कारण है कि पहाड से लेकर मैदान तक में अब पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को बेहतर होमस्टे का तोहफा मिल रहा है जिससे उन्हें कम कीमत पर ठहरने की जो सुविधा सरकार ने मुहैया कराई है उससे जहां होमस्टे चलाने वालों की बल्ले-बल्ले हो रखी है तो वहीं बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की जेबों पर भी होमस्टे के चलते किराये का बोझ नहीं बढ रहा है।
उत्तराखण्ड के अन्दर बाइस सालों से युवाओं को बेरोजगारी के दौर से रूबरू होना पड रहा था और उसी के चलते वह सभी सरकारों के कार्यकाल में अपनी नाराजगी प्रकट करते थे कि आखिरकार सरकार बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की दिशा में क्यों आगे नहीं बढ पाती है। विधानसभा चुनाव से पूर्व हर पांच साल में कांग्रेस व भाजपा बेरोजगार युवाओं को सपने दिखाती रही कि अगर उनकी सरकार सत्ता मे आई तो सरकार युवाओं को रोजगार देने की दिशा मे तेजी के साथ आगे बढेगी लेकिन हर सरकार के कार्यकाल में युवाओं के साथ छल होता चला गया और वह बेरोजगारी के उस द्वार पर खडे रहे जहां उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा था। उत्तराखण्ड की सियासत में एक नई रोशनी उस समय दिखाई दी जब युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बना दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो कि राज्य की सारी हकीकत को लम्बे समय से देखते आये थे उन्होंने उत्तराखण्ड के अन्दर शहर से लेकर पहाड तक में होमस्टे से युवाओं को एक नया रोजगार देने की दिशा में अपने कदम आगे बढाये। मुख्यमंत्री के होमस्टे से राज्य के बेरोजगार युवाओं की बल्ले-बल्ले होने लगी और आज उत्तराखण्ड के अन्दर पहाड से लेकर मैदान तक में होमस्टे का जो कल्चर पनपने लगा है उससे एक आम इंसान को रोजगार का बडा साधन मिल चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रूद्रप्रयाग मे भी ऐसी अलख जगाई कि वहां होमस्टे का कल्चर तेजी के साथ उभरता हुआ दिखाई देने लगा और उसके चलते वहां बेरोजगारों के लिए रोजगार का एक बडा साधन उन्हें हासिल हो गया। मुख्यमंत्री ने हमेशा राज्य के किसी जनपद में रात्रि विश्राम किया तो उन्होंने साफ कहा कि आज होमस्टे में वहां उपलब्ध सुविधाओं, पर्यटकों के अनुभवों से साफ नजर आ रहा है कि राज्य के अन्दर होमस्टे बेरोजगार युवाओं, मध्यम वर्गों के परिवारों के लिए जहां वरदान बन गया है वहीं पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को होमस्टे में रहना खूब रास आ रहा है। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि होमस्टे ग्रामीण आर्थिकी को सशक्त करने के साथ ही देश-विदेश से उत्तराखण्ड आने वाले पर्यटकों को राज्य की समृद्ध संस्कृति से भी अवगत कराते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि प्रदेश मे बडी संख्या में होमस्टे संचालित किये जा रहे हैं जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के होमस्टे योजना का लाभ राज्य के बेरोजगार युवकों को भी खूब रास आ रहा है और उसी के चलते वह अब अपने यहां होमस्टे बनाकर रोजगार पाने की एक नई दिशा में आगे बढ चुके हैं। पहाडों से लेकर मैदानों तक हजारों लोग होमस्टे बनाकर अपने कारोबार की एक नई पटकथा लिखने के लिए जिस तरह आगे बढे हैं उससे उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री आवाम के राजनीतिक हीरो बन गये हैं।

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