उत्तराखण्ड की जुबान पर एक ही नाम रक्षक हैं धामी

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री को अगर उत्तराखण्ड की जनता अपने रक्षक के रूप में देखने लगी है तो उससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह एक कुशल राजनेता के रूप में आवाम के दिलों में राज करने लगे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर हर संकटकाल में मुख्यमंत्री का अभेद होकर आवाम के साथ खडा होना यह बता रहा है कि वह उत्तराखण्ड को एक नई दिशा में ले जाने की चाहत रखते हैं और उसी चाहत को पूरा करने के लिए वह समूचे उत्तराखण्ड को अपना परिवार मानकर उनके हर सुख-दुख में उनके साथ खडे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर आ रही दैवीय आपदाओं ने आवाम को जिस तरह से एक बडा दर्द दिया हुआ है उसके चलते मुख्यमंत्री उनका दर्द हरने के लिए उनके साथ खडे हुये हैं और वह पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जिन्होंने आपदा के चंद दिनों बाद ही प्रभावित लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए सरकारी खजाना खोल रखा है और इसी के चलते आवाम को अब विश्वास हो चला है कि धामी ही उत्तराखण्ड के रक्षक हैं।
उत्तराखण्ड में चार साल से अधिक से सत्ता चला रहे मुख्यमंत्री ने जिस विजन के साथ सरकार चलाने का हुनर आवाम को दिखा रखा है उसको लेकर उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर के लोग भी मुख्यमंत्री की दबंग और फलावर रूप की धमक के कायल हो रखे हैं और उन्हें यह आश्चर्य हो रहा है कि जिस राज्य मे बाइस सालों से भ्रष्टाचार और घोटालांे का शोर सुनाई देता रहा था उस उत्तराखण्ड में पिछले तीन सालों से भ्रष्टाचार और घोटालों का शोर अब सबसे निचले पायदान पर दिखाई दे रहा है। उत्तराखण्ड की जनता इस बात को लेकर गदगद है कि उनका सीएम सुपर है और सुपर सीएम उत्तराखण्ड को भी सुपर बनाने के विजन पर आये दिन आगे बढे हुये हैं। मुख्यमंत्री ने सादगी के साथ सरकार चलाने का हुनर दिखा रखा है और देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा हाईकमान के सामने उनका रिपोर्ट कार्ड हमेशा अव्वल आ रहा है जिसके चलते मोदी टीम उत्तराखण्ड के विकास के लिए लगातार मुख्यमंत्री की झोली मे एक के बाद एक विकास योजनाओं का तोहफा देने मे जुटी हुई हैं और अब राज्य के अन्दर यह साफ दिख रहा है कि मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को देश का सबसे बेहतर राज्य बनाने के एजेंडे पर किस तरह से रात दिन आगे आकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का पहाडी जनपदों में अकसर रात्रि प्रवास पहाड के लोगों को खूब रास आ रहा है और वह यह अनुभव कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री का पहाड प्रेम उनके पहाडों को गुलजार कर रहा है।
उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि राज्य की सत्ता चलाने वाले अधिकांश एक्स मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल पर हमेशा उंगलियां उठती रही और आवाम इस बात को लेकर काफी नाराज दिखता रहा कि जिस उद्देश्य को लेकर उत्तराखण्ड का गठन किया गया था वह कभी पूरा ही नहीं हो पाया? उत्तराखण्ड मे भ्रष्टाचार, घोटाले, अपराधी और माफियाराज के काले साये से राज्य की जनता हमेशा डरती रही और अधिकांश सरकारों ने इस काले साये से आवाम को आजादी दिलाने के लिए कभी कोई कोई पहल नहीं की इसी के चलते उत्तराखण्ड मे अकसर भाजपा व कांग्रेस के हाईकमान अपने पूर्व मुख्यमंत्रियों को गद्दी से हटाने के लिए आगे आते रहे। वहीं उत्तराखण्ड की कमान जबसे युवा मुख्यमंत्री ने संभाली है तबसे उन्होंने हर दिन उत्तराखण्ड के विकास का खाका खींचने मे ही अपनी सारी ताकत झोंक रखी है और उनके विजन को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री से लेकर उनकी कैबिनेट के मंत्री उत्तराखण्ड के विकास के लिए बडी-बडी योजनायें मुख्यमंत्री की झोली मे डाल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दिलेरी के साथ भ्रष्टाचारी, घोटालेबाज और माफियाराज का अंत करने के लिए धाकड़ रूख अपना रखा है उसे देखकर राज्य की जनता मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड का विकास पुरूष मान रही है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही राज्य की राजनीति को करीब से पहचाना और उन्हें इस बात का इल्म था कि सरकार चलाने के लिए एक कुशल राजनेता को किस दिशा मे आगे बढ़ना है। मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुरूमंत्र को धारण कर सरकार चलाने के लिए दबंग अंदाज मे सत्ता चलाने का जो रोड-मेप तैयार किया उस पर वह एक बडे विजन के साथ आगे बढ़ते चले गये और उनकी स्वच्छ और पारदर्शी कार्यशैली ने उन्हें उत्तराखण्ड की राजनीति का सुपर हीरो बना दिया। उत्तराखण्ड के बच्चों से लेकर बडों के बीच मुख्यमंत्री ने अपनी सादगी का जो रूप दिखाया उसके चलते वह उत्तराखण्ड के चप्पे-चप्पे मे धाकड़ धामी के नाम से एक बडी प्रसिद्धि पाने मे कामयाब हो गये।
मुख्यमंत्री ने धाकड़ अंदाज मे सरकार चलाने का जो दौर शुरू कर रखा है उससे राज्य की जनता युवा मुख्यमंत्री की स्वच्छ कार्यशैली से खूब गदगद है और उन्हें यह विश्वास हो गया है कि जो उत्तराखण्ड तेइस सालों से विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ पाया था वह उत्तराखण्ड अब हर तरफ विकास की नई दास्तां लिख रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री दिखाई दे रहे हैं जो राज्य में आने वाली किसी भी आपदा के दौरान खुद मोर्चा संभालने के लिए आपदा स्थल पर डट जाते हैं और वहीं से वह रेस्क्यू ऑपरेशन कराकर तब तक शांत नहीं बैठते जब तक वहां के लोग अपना दर्द नहीं भूला देते।

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