रूकना मेरा काम नहीं…

0
175

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री सत्ता के नशे में कभी भी आवाम के सामने अहंकार करते हुए नजर नहीं आये और वह विकास के पथ पर सबको साथ लेकर चलने का जो राजनीतिक हुनर दिखा रहे हैं उससे उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में उनका राजनीतिक इकबाल इतना बुलंद हो चुका है कि भाजपा के ही कुछ नेता मुख्यमंत्री के खिलाफ पर्दे के पीछे रहकर साजिशें रचने का कोई न कोई चक्रव्यूह रचने से बाज नहीं आ रहे हैं? मुख्यमंत्री को अस्थिर करने के लिए उनके खिलाफ शोर मचाया जा रहा है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है लेकिन राजनीतिक पंडित मानते हैं कि मुख्यमंत्री जिस तरह से हर मोर्चे पर अकेले अटल होकर खडे हो रहे हैं उसे देखकर देश के प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक मुख्यमंत्री को अपना साथ और आशीर्वाद दे रहे हैं जिससे कि उत्तराखण्ड को एक नये पथ पर ले जाया जा सके। मुख्यमंत्री की निडर और दबंग कार्यशैली ने अपराधियों, माफियाओं और देश के खिलाफ साजिशें रचने वालों की आंखों में एक अर्से से मुख्यमंत्री खटक रहे हैं लेकिन वह किसी की परवाह किये बगैर जिस तरह से एक के बाद एक राज्यहित में धाकड फैसले ले रहे हैं उससे आवाम उन्हें एक दशक तक उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री देख रहा है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राजनीति में कोई चाले चलने के लिए आगे नहीं आते बल्कि वह राज्य के विकास के पहिये को कैसे आगे बढाना है उस पर ही महामंथन करके सडक से लेकर आकाश तक विकास का खाका खींच चुके हैं। उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी, चमोली, पौडी में जब दैवीय आपदा आई तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद मोर्चा संभाला और वह आपदा पीडितों के बीच जाकर उनका दर्द हरते आ रहे हैं कि वह उनके साथ खडे हैं और उन्हें इस संकटकाल में खबराने की कोई जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने आपदा पीडितों के आसूओं को पोछकर उन्हें तत्काल पांच-पांच लाख रूपये का मुआवजा देकर यह संदेश दे दिया कि वह उनके साथ इस आपदा की धडी में अटल होकर खडे हैं। उत्तराखण्ड में हर तरफ मुख्यमंत्री आवाम के साथ खडे हुये नजर आ रहे हैं तो वहीं आवाम की भी एक सुर में यही आवाज बुलंद हो रही है कि भले ही कोई मुख्यमंत्री के खिलाफ तमाम साजिशें रचता रहे लेकिन राज्य में वह जिस तरह से अभेद होकर काम कर रहे हैं उसके चलते वह एक दशक तक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
उत्तराखण्ड में विकास का पहिया बाइस सालों से राज्य के अन्दर जाम हो रखा था और राज्य की जनता के मन मे हमेशा यही सवाल खडा होता था कि जिस राज्य की कल्पना उन्होंने की थी वह कल्पना तो कोरी की कोरी ही दिखती रही? वहीं देश के प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड मे विकास को एक नई उडान देने के लिए सैनिक पुत्र को मुख्यमंत्री की कमान सौंपकर उन्हें उत्तराखण्ड को एक आदर्श राज्य बनाने का टास्क दिया और उसी टास्क पर आगे बढते हुए मुख्यमंत्री ने चार सालों मे विकास की जिस उडान को उडा है उससे उत्तराखण्ड आज एक नये स्वरूप मे ढलता हुआ नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री चार सालों से सभी जनपदों मे विकास का नया चेहरा आवाम को दिखाने के लिए रात-दिन बडे विजन के साथ काम करते हुए नजर आ रहे हैं और उसी का परिणाम है कि आज राज्य की जनता मुख्यमंत्री की विकास को लेकर दिखाई दे रही सोच पर गदगद नजर आ रही है और मुख्यमंत्री का भी एक ही मंत्र है कि रूक जाना नहीं…।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन साल के अन्दर विकास की ऐसी पटकथा लिख दी है जिससे राजनीतिक हल्को में हलचल है कि आखिरकार युवा मुख्यमंत्री ने अपने अल्प कार्यकाल मे कैसे विकास की वो उडान भर ली जो बाईस सालों से राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री नहीं भर पाये थे? उत्तराखण्ड के पहाडो मे मुख्यमंत्री की पिछले चार साल मे दिखाई दी दस्तक यह बताने के लिए काफी है कि वह पहाडों को विकास से गुलजार करने के एक बडी भूमिका निभा रहे हैं और जो पहाडी जनपद विकास के पथ पर रेंग-रेंग कर चलते थे आज वह तेज गति से विकास के पथ पर दौडते हुए नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष व उन लोगों को भी आईना दिखाना शुरू कर रखा है जो यह ढोल पीटते आ रहे हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गैरसैंण से दूरी बनाकर रखते हैं लेकिन मुख्यमंत्री जिस जज्बे के साथ गैरसैंण में विधानसभा सत्र कराते हैं उससे उनका राजनीतिक रूतबा खूब बुलंद हो रहा है।

LEAVE A REPLY