सीएम के पाले में मोर्चा ने डाली गेंद

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देहरादून। उत्तराखण्ड के उपनलकर्मियों के नियमितीकरण का मामला लम्बे समय से अदालत की चौखट पर तैर रहा है और उससे उपनल कर्मियों के मन में एक ही सवाल पैदा हो रहा है कि आखिरकार सरकार उनके साथ भेदभाव क्यों कर रही है जिसके चलते उनके भविष्य पर एक बडा ग्रहण लगता जा रहा है। जनसंघर्ष मोर्चा लम्बे समय से उपनलकर्मिैयों के नियमितीकरण को लेकर शासन में भी अपनी दस्तक देता आ रहा है लेकिन उपनलकर्मियों को राहत देने के लिए शासन लम्बे समय से खामोशी साधे हुये है जिसके चलतेे जनसंघर्ष मोर्चा ने ऐलान किया था कि वह उपनलकर्मियों के नियमितीकरण की लडाई सडक से लेकर न्यायालय तक लडेगा। अब उपनलकर्मियों के नियमितीकरण को लेकर जनसंघर्ष मोर्चा ने सीएम के पाले में गेंद डाल दी है और उनसे कहा है कि उपनलकर्मियों और मोर्चे को उम्मीद है कि वही इस मामले में धाकड फैसला लेकर उपनलकर्मियों को एक बडी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री ने जनसंघर्ष मोर्चे को विश्वास दिलाया है कि वह जल्द इस मामले में कोई बडा फैसला लेंगे।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उपनलकर्मियों के नियमितीकरण व अन्य लाभ प्रदान किए जाने विषयक मामले में सरकार से उच्च न्यायालय के आदेश बारह नवम्बर 2०18 का अनुपालन कराने का आग्रह किया तथा इन कर्मियों की राह में रोडा बनी सुप्रीम कोर्ट में योजित रिव्यू पिटिशन वापस लेने का भी आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कार्यवाही का भरोसा दिलाया। नेगी ने कहा कि सरकार को इन कर्मियों के नियमितीकरण व अन्य लाभ प्रदान किए जाने की दिशा में सबसे पहले उच्चतम न्यायालय में योजित रिव्यू पिटिशन वापस लेने की दिशा में काम करना चाहिए। नेगी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में सरकार द्वारा योजित एसएलपी पन्द्रह अक्टूबर 2०24 को खारिज होने के उपरांत सरकार द्वारा आठ नवम्बर 2०24 को रिव्यू पिटिशन दायर गई थी, जोकि अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
नेगी ने कहा कि सरकार द्वारा कुछ माह पूर्व इन उपनलकर्मियों के नियमितीकरण आदि मामले में कार्यवाही का आश्वासन दे चुकी है, लेकिन अभी तक धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार को इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि इन अल्प वेतन भोगी कर्मियों के भविष्य का क्या होगा। इनके परिवार का गुजर- बसर कैसे होगा। बड़ा दुख होता है जब पक्ष- विपक्ष के विधायक एक आवाज में अपने वेतन- भत्तों में बढ़ोतरी करा लेते हैं, लेकिन वहीं दूसरी और इन कर्मियों के बारे में इनकी जुबान पर ताले लग जाते है। नेगी ने कहा कि उपनल कर्मियों के मामले में उच्च न्यायालय ने बारह नवम्बर 2०18 के द्वारा सरकार को इन कर्मियों के नियमितीकरण व अन्य लाभ प्रदान किए जाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने उक्त फैसले, आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी योजित की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की एसएलपी खारिज कर दी थी। सरकार को सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में इनको हक देना चाहिए, जिससे ये अल्प वेतन भोगी कर्मी अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित रख सकें।

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