धामी की यलगार नशा माफियाओं को मिट्टी में मिला दूंगा

0
185

सैकडों परिवार केे लॉडले फंस गये नशे के जाल में
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड़ में सैकडों परिवारों के लिए अपनी युवा पीढ़ी को बचाने के लिए अब राज्य के मुख्यमंत्री ही उनकी आखिरी उम्मीद बने हुये हैं और वह मुख्यमंत्री के विजन को भापकर मन मंे एक सोच पैदा किये हुये हैं कि राज्य के अन्दर पनप चुके नशा माफियाओं के नेटवर्क को मिट्टी में मिलाने के लिए वह कोई कसर नहीं छोडेंगे। सैकडों परिवारों के लॉडले एक लम्बे दशक से नशे के मकडजाल में इस कदर फंस चुके हैं कि वह चाहकर भी उससे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और वह नशे के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार दिखते हैं जिससे उनके परिजनों के सामने चौबीस घंटे एक डर की भावना बनी रहती है कि उनके लॉडले कहीं नशे के लिए कोई ऐसा अपराध न कर दें जिससे उनका जीवन खत्म हो जाये। मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया हुआ है कि वह राज्य को नशामुक्त करके ही चैन से बैठेंगे और वह अकसर पुलिस के आला अफसरों को आदेश देते आ रहे हैं कि उत्तराखण्ड़ को नशामुक्त करना उनका एक बडा विजन है और राज्य की युवा पीढी को नशे से बचाने के लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री का संकल्प है कि युवा पीढ़ी को नशे से आजादी दिलाने के लिए वह कुछ भी कर गुजरेंगे और यही कारण है कि वह अकसर नशा माफियाओं पर दहाड़ते हुए नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी उत्तराखण्ड़ को उडता पंजाब की तर्ज पर नहीं देखना चाहते और वह राज्य के अन्दर नशा माफियाओं के खिलाफ एक बडा युद्ध छेड़े हुए हैं और यह युद्ध में सभी जनपदों के पुलिस कप्तानों ने अपने आपको आगे किया हुआ है। उत्तराखण्ड़ पुलिस नशा माफियाओं के एक-एक नेटवर्क को ध्वस्त करने के मिशन में आगे बढ़ी हुई है और मुख्यमंत्री ने जेलों में बंद नशे के आदी कैदियों को नशे से बचाने के लिए उनकी कॉउसलिंग भी करवा रखी है जिससे कि नशे के आदी हो चुके हर इंसान को एक नया जीवनदान मिल सके। जेलों में नशा करने के आदी कैदियों को काउंसलिंग कराकर उन्हें एक बडी राहत देने का सिलसिला शुरू हो रखा है और मुख्यमंत्री को उम्मीद है कि राज्य में नासूर बन चुके नशा माफियाओं के सारे नेटवर्क को वह मिट्टी में मिला देंगे। उत्तराखण्ड में एक दशक से नशे के बडे-बडे सौदागरों ने राज्य की काफी युवा पीढी को अपना ऐसा गुलाम बना दिया है कि उससे वह बाहर निकलने की कोशिश करेंगे तो भी वह उसमें सफल नहीं हो पायेंगे। युवा पीढी की नसों में नशे का जहर डालने वाले सैकडों नशा माफिया राज्य की पुलिस को चुनौती देता आ रहा है और आये दिन नशा तस्करों के पकडने के बावजूद भी अगर नशे का काला कारोबार खत्म नहीं हो पा रहा है तो उससे समझा जा सकता है कि नशा माफियाओं का नेटवर्क कितना बुलंद है कि वह किसी न किसी रास्ते अपने इस नशे के काले कारोबार को आगे बढाने के एजेंडे पर बेखौफ होकर निकल पडे हैं?
उत्तराखण्ड एक लम्बे अर्से से नशा माफियाओं के कैद में है और उन्होंने युवा पीढी को जिस तरह से अपने मकडजाल में फसा रखा है उससे सैकडों परिवारों के सामने अपने लॉडलों को मौत के मुंह से बचाने की एक बडी चुनौती आ रखी है और वह इस डर में जी रहे हैं कि अगर नशे के लिए उनके लॉडलों ने कोई बडा अपराध कर दिया तो फिर उनका जीवन बर्बादी के अंतिम पायदान पर आकर खडा हो जायेगा? उत्तराखण्ड मंे पूर्व सरकारें नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान और सडकों पर रैलियां निकालने तक ही सीमित रही लेकिन ऐसे राजनेताओं और अफसरों पर हमेशा सवालिया निशान लगते रहे कि आखिरकार क्या रैलियां निकालने से कभी नशे के आदी बन चुके युवा नशे को हमेशा के लिए त्याग देंगेे? उत्तराखण्ड में नशा माफियाओं का इतना बडा साम्राज्य हो चला है कि उसकी कल्पना करना भी असम्भव नजर आ रहा है? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 तक उत्तराखण्ड को नशामुक्त करने का संकल्प लिया था लेकिन मौजूदा दौर मे तो दूर-दूर तक ऐसा देखने को नहीं मिल रहा कि उत्तराखण्ड की युवा पीढी नशे के दलदल से बाहर आ पायेगी? उत्तराखण्ड के कई जनपदों में जिस तेजी के साथ नशा मुक्ति केन्द्र बनते हुए दिखाई दिये हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज उत्तराखण्ड के अन्दर युवाओं की नसों में किस तेजी के साथ नशा प्रवेश कर गया है कि अब नशा मुक्ति केन्द्रों की राज्य के चंद जनपदों में कतार लगनी शुरू हो गई है।

LEAVE A REPLY