देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में एनएच-74 घोटाला राज्य की राजनीति में एक बडा तूफान मचा गया था जिसको लेकर कुछ राजनेताओं और अफसरों की कार्यशैली पर बडा ग्रहण लगा था एनएच-74 घोटाले का शोर खूब मचा था और काफी लोग जेल की सलाखों के पीछे भी पहुंचे थे अब इस मामले में एक बार फिर ईडी की एंट्री होने से उत्तराखण्ड की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब ईडी की टीम ने इस घोटाले मे शामिल रहे डीपी सिंह के आवास पर दस्तक दे दी। ईडी के इस छापे से हर उस भ्रष्टतंत्र में खलबली मच गई जो राज्य के अन्दर लम्बे समय से भ्रष्टाचार का खेल खेलकर अपने आपको सेफ जोन में होने का सपना पाले हुये हैं?
आज ईडी की टीम ने एनएच-74 घोटाले में शामिल रहे अफसर डीपी सिंह (सेवानिवृत्ति) के आवास पर दस्तक दी और वहां हो रही छापेमारी की खबर राजधानी के गलियारों में आग की तरह फैल गई। उत्तराखण्ड की सडकों से जुडे जिस घोटाले को बीते वर्षों में पुराना समझकर भुला दिया गया था, वह एक बार फिर आवाम के सामने आकर उस समय खडा हो गया जब ईडी की टीम ने इस घोटाले मे शामिल रहे पीसीएस रहे अधिकारी डीपी सिंह के घर अपनी एंट्री की। नेशनल हाईवे-74 मुआवजा घोटाला, जिसकी परतें 2०17 में खुलनी शुरू हुई थी और अब 2०25 में एक बार फिर प्रशासन और भ्रष्टतंत्र की असलियत उजागर होती हुई नजर आ रही है? गौरतलब है कि इस पूरे घोटाले की जडें 2०11 से 2०16 के बीच बिछी थी, जब काशीपुर, जसपुर, बाजपुर, गदरपुर जैसे क्षेत्रों में एनएच-74 के चौडीकरण के लिए किसानों से जमीन अधिग्रहित की गई थी। हालांकि किसानों को मुआवजा देने के नाम पर जमीनों को कृषि से वाणिज्यिक क्षेणी में दिखाकर करोडो रूपये का सरकारी पैसा गलत तरीके से बांटा गया था और जिस जमीन की कीमत मात्र कुछ लाख थी उसे कई गुना ज्यादा दिखाकर मुआवजा के नाम पर तीन सौ से चार सौ करोड का घोटाला कर दिया गया था। इस घोटाले में प्रशासनिक अफसर, लेखपाल, दलाल और कुछ राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी। इस घोटाले की याद एक बार फिर उस समय ताजा हो गई जब ईडी ने इस घोटाले में शामिल रहे पीसीएस अफसर डीपी सिंह (सेवानिवृत्ति) के आवास पर अपनी दस्तक दी। हालांकि ईडी की कार्यवाही गोपनीय थी इसलिए अभी इस बात से पर्दा नहीं उठ पाया कि ईडी को वहां क्या मिला और क्या नहीं?

