देहरादून(संवाददाता)। राजधानी के रायपुर इलाके में खलंगा जंगल के अन्दर हरे पेड काटकर वहां एक बडा निर्माण होते देख लोगों के होश उड गये थे और उसके बाद पर्यावरण प्रेेमियों से लेकर आम जनमानस ने जंगल के अन्दर हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया तो उसके बाद वन महकमा नींद से जागा और जब महकमे ने जंगल के अन्दर जांच शुरू की तो पाया कि वहां काफी पेड कटे हुये थे। खलंगा जंगल में किसने और किसके इशारे पर पेड काटे यह वन महकमे को कटघरे मे खडा कर गया था और उस समय लोग हैरत में आ गये जब यह दास्तां सुनाई गई कि ऋषिकेश के एक व्यक्ति ने जंगल के अन्दर चालीस बीद्या जमीन खरीदी हुई है। जंगल के अन्दर चालीस बीद्या जमीन किसने और कैसे बेच दी यह सबको हैरान कर गया और राजधानी के अन्दर हर तरफ एक ही सवाल खडा हो रहा है कि सरकार खलंगा जंगल में चालीस बीद्या जमीन बिकने के सारे राज को बेनकाब करने के लिए एक बडी जांच करायें जिससे कि यह साफ हो सके कि आखिरकार किसने और किसके इशारे पर जंगल के अन्दर जमीन बेचने के लिए सारी पटकथा लिखी थी?
राजधानी में खलंगा जंगल और खलंगा स्मारक अपनी एक बडी पहचान रखते हैं और खलंगा स्मारक ऐतिहासिक माना जाता है जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। वहीं खलंगा जंगल भी अपनी एक बडी पहचान रखता है और इस जंगल में हर सुबह इलाके के लोग सैर करने के लिए आते हैं। चंद समय पूर्व खलंगा जंगल में जब एक महिला ने वहां अवैध निर्माण होते हुए देखा तो वह हैरान हो गई थी और उसने जब वहां निर्माण करा रहे व्यक्ति से इस बारे में सवाल-जवाब किये थे तो उन्हें बताया गया कि जंगल के अन्दर चालीस बीद्या जमीन ऋषिकेश के एक व्यक्ति ने खरीद रखी है। जंगल के अन्दर चालीस बीद्या जमीन की रजिस्ट्री की बात सुनकर महिला दंग रह गई थी और उसने सोशल मीडिया पर यह सारा खेल बेनकाब करके रख दिया था। सोशल मीडिया पर जैसे ही खलंगा जंगल में अवैध निर्माण की वीडियो वायरल हुई तो पर्यावरण प्रेमी और सैकडों की संख्या में लोग भडक गये थे और उसके बाद उन्होंने वहां निर्माण कार्य बंद करवाया जिसके बाद यह सच सामने आया कि जंगल के अन्दर पेड काटे गये थे यह पेड किसकी शह पर काटे गये यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है। सवाल यह है कि खलंगा जंगल में चालीस बीद्या भूमि भले ही किसी के नाम दर्ज हो लेकिन चारो ओर धना जंगल है जो फॉरेस्ट एक्ट से गर्वन होता है। बताया जाता है कि भूमि की सीमायें स्पष्ट हैं कि वहां सभी तरफ फॉरेस्ट है। चर्चा है कि इस मामले में कुछ जांच हुई तो यह बात उठी कि जमीन उपरोक्त सम्बन्धित विवरण का एक रिपोट में कोई उल्लेख नहीं है? ऐसे में यह मामला केवल पेड काटने तक सीमित नहीं है बल्कि चारो तरफ की वन भूमि के खसरे में इस चालीस बीद्या जमीन के मूल भूस्वामी कौन थे और उन्होंने सबसे पहले किस व्यक्ति को यह जमीन बेची यह एक बडी जांच का विषय है? सवाल उठा कि क्या जमीन का सौदा मूल भूस्वामी होने का दावा करने वाले व्यक्ति के जीवन काल में हुआ या किसी पॉवर ऑफ अर्टोनी के धारक व्यक्ति के द्वारा सौदा कर जमीन बेची गई? सवाल यह है कि यह खसरा वन भूमि है तो फिर यह चालीस बीद्या जमीन कैसे बेची गई ऐसे अनेक सवाल आज भी राजधानी के लोगों के जहन में उठ रहे हैं? कुल मिलाकर कहा जाये तो यह मामला काफी रहस्यमय है और इस रहस्य का राज तब बेपर्दा हो सकता है जब सरकार इस मामले में एक बडी एसआईटी बनाकर उसे इस मामले की जांच सौंप दे।

