देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड़ का जबसे जन्म हुआ है तबसे राज्य के अन्दर अवैध खनन का काला कारोबार बेखौफ होकर चल रहा है और इस धंधे पर नकेल लगाने के लिए सरकारों ने हमेशा दावे तो बडे-बडे किये लेकिन धरातल पर अवैध खनन पर प्रहार करने के लिए सरकार और सिस्टम जिस तरह से खामोशी साधे हुये हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पच्चीस सालों से खनन माफिया सरकारों को किस तरह से खुली चुनौती देते आ रहे हैं? अवैध खनन के इस काले कारोबार में काफी राजनेता, सफेदपोश और अफसरों का एक बडा गठजोड़ बना हुआ है जो भले ही आवाम को सामने से कभी नजर न आया हो लेकिन पर्दे के पीछे से यह गठजोड अवैध खनन के धंधे का बादशाह बना हुआ है? गजब की बात है कि सरकार की नदियों का सीना चीर कर खुलेआम राज्य के कुछ जिलों में अवैध खनन का खुला तांडव चल रहा है लेकिन सरकार और सिस्टम में बैठे अफसर अवैध खनन रोकने के लिए आगे आने से क्यों कतराते हैं यह उनकी मंशा पर एक बडा सवालिया निशान लगता आ रहा है? उत्तराखण्ड के अन्दर अब एक ही बहस चल रही है कि आखिर अवैध खनन का यह काला धंधा कब तक चलता रहेगा? सरकार के काले सोने को रात-दिन लूटने वाले खनन माफियाओं में अगर सिस्टम का कोई डर नहीं दिख रहा है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस काले धंधे में बडे-बडे पॉवरफुल लोगों ने अपने आपको खुद ‘सरकारÓ समझ लिया है जिससे वह आये दिन अवैध खनन से अपना खजाना भर रहे हैं।
उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या फिर भाजपा की सभी के शासनकाल में अवैध खनन का काला कारोबार इतना विशाल होता है कि उसकी कल्पना करना भी असम्भव सा नजर आता है? उत्तराखण्ड के गलियारों में हमेशा यह बात उठती रही है कि अवैध खनन के काले कारोबार में राज्य के काफी राजनेता, सफेदपोश और काफी अफसरों ने गुप्त रूप से अपना एक बडा गठजोड किया हुआ है जिसके चलते वह कुछ जनपदों में नदियों का सीना चीरने के दौरान तिनकाभर भी भय नहीं खाते कि कहीं सरकार उन पर अपना शिकंजा न कस दे? उत्तराखण्ड में पच्चीस सालों से राज्य के अन्दर अवैध खनन का काला धंधा राजनेताओं से लेकर काफी अफसरों के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बना हुआ है और यही कारण है कि राज्य के अन्दर सरकार की नदियों का आये दिन सीना चीरा जा रहा है लेकिन सरकार और सिस्टम के काफी अफसर घृतराष्ट्र बने हुये हैं? उत्तराखण्ड के अन्दर अवैध खनन को रोकने के लिए कभी भी अधिकांश सरकारों ने कोई सख्त रूख नहीं अपनाया जिसके चलते राज्य के अन्दर अवैध खनन का काला धंधा बंद हो सके?
उत्तराखण्ड के गलियारों में यह बात हमेशा उठती रही है कि हर सरकार में सत्ता के काफी नेता, सफेदपोश और दर्जनों अफसरों ने अवैध खनन के धंधे में गुप्त रूप से अपनी बडी एंट्री कर रखी है और राज्य के अन्दर कितने सफेदपोश, राजनेताओं और अफसरों ने अपने रिश्तेदारों के नाम से डम्पर और ट्रक खरीद रखे हैं अगर इसकी जांच हो जाये तो उससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा? उत्तराखण्ड के अन्दर मौजूदा दौर में कुछ जिलों के अन्दर जिस तरह से अवैध खनन का काला धंधा बेखौफ होकर चल रहा है उसको लेकर सवाल यही तैर रहे हैं कि आखिरकार क्या सरकार अवैध खनन करने वाले माफियाओं की नाक में नकेल डालने में आगे नहीं आ सकती जिसके चलते राज्य की नदियों में हो रहे अवैध खनन के तांडव पर ब्रेक लग सके।

