पत्रावलियों को कूडे का ढ़ेर बना रहे अफसर

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री का विजन है कि जब भी किसी सरकारी महकमे मे कोई फरियादी अपनी फरियाद लेकर आये तो उसकी शिकायत पर तत्काल एक्शन होना चाहिए जिससे कि राज्य में संदेश जाये कि उत्तराखण्ड के अन्दर सरकार और उसका सिस्टम फरियादियों को न्याय देने में कोई देरी नहीं करता। वहीं मुख्यमंत्री हैल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की समीक्षा करने के लिए खुद आगे आते हैं और वह अकसर कुछ फरियादियों को फोन करके उनसे संवाद करते हैं कि उन्होंने हैल्पलाइन पर जो शिकायत दी थी उसका हल हुआ कि नहीं। वहीं भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ हमेशा लडाई लडने वाले जनसंघर्ष मोर्चे के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से रूबरू होते हुए उन्हें अपना दर्द बयां किया कि अधिकारी सुविधा शुल्क के इंतजार में पत्रावलियों को कूडे का ढेर बना देते हैं और उसके चलते एक आम इंसान जिसने शिकायत के रूप में अपनी पीडा मुख्यमंत्री तक पहुंचाई वह यह सोचकर दर्द में रहता है कि जब मुख्यमंत्री के यहां दी शिकायत भी हवा-हवाई हो रही है तो फिर वह किससे न्याय की उम्मीद करें? जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने सीएम से रूबरू होते हुए उन्हें सच्चाई से रूबरू कराते हुए बताया कि शासन ने कुछ अधिकारियों की ढींगामस्ती और उनकी हठधर्मिता के चलते आम जनमानस को सुलभ न्याय नहीं मिल पा रहा है।
जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि अधिकारी कई महीनों तक पत्रावलियों पर कुंडली मारकर बैठ जाते हैं जिससे आम आदमी इंसाफ पाने के लिए एक लम्बे समय तक बेचैन बना रहता है। रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री को बताया कि विभागी मंत्रियों और अधिकारियों के गठजोड के चलते आम जनमानस की पीडा को समझना तो दूर उनकी बात सुनने को भी कोई तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि कौन सा मामला कितना गंभीर है व पीडित व्यक्ति कितना परेशान है उससे अधिकारियों का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि कई बार आम जनमानस की पत्रावलियां उनके छोटे मोटे काम से सम्बन्धित पत्र एक पटल से दूसरे पटल पर पहुंचने मे महीनों लगा देते हैं एवं कई बार पत्र ढूंढे नहीं मिलते। रघुनाथ सिंह ने सीधा आरोप लगाया कि हालात यह हो गये हैं कि अधिकारी सुविधा शुल्क के इंतजार में पत्रावलियों को कूडे का ढेर बना देते हैं। मोर्चे को भरोसा है कि व्यवस्था में परिवर्तन होगा, जिसके फलस्वरूप आम जन को न्याय मिल सकेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने मोर्चे के अध्यक्ष का दर्द समझते हुए तुरंत अधिकारियों के पेच कसे और उन्होंने साफ संदेश दिया कि अगर किसी ने भी आम जनमानस की पत्रावली को इधर से उधर धूमाने व उस पर जल्द फैसला लेने में देरी की तो उनके खिलाफ एक्शन किया जायेगा।

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