पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का स्टे

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा हुये अभी 48 घंटे का ही समय बीता था कि नैनीताल उच्च न्यायालय ने इन चुनाव पर रोक लगा दी। उच्च न्यायालय द्वारा पंचायत चुनाव पर रोक लगाये जाने से सरकार को एक बडा झटका लगा है। चुनाव की तारीख घोषित होते ही सरकार और सिस्टम चुनाव को लेकर अलर्ट मोड मे आ गया था और चुनाव लडने वाले नेताओं ने भी सोशल मीडिया से लेकर पोस्टर बैनर में चुनाव लडने की ताल ठोक दी थी। मजेदार बात तो यह है कि चुनाव लडने वाले काफी प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया में अपने आपको नम्बर वन राजनेता बनने के लिए सेटिंग-गेटिंग का खेल खेलते हुए अपने पक्ष में खबरें लिखवाने का भी तानाबाना बुन लिया था लेकिन हाईकोर्ट ने आज सख्ती के साथ जैसे ही चुनाव पर रोक लगाई उससे उन राजनेताओं के अरमा आसुओं में बह गये जो अपने आपको जीत का दावेदार मान रहे थे। उच्च न्यायालय ने आरक्षण नोटिफिकेशन के मसले पर यह रोक लगाई है तो वहीं विपक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है क्योंकि विपक्ष के कई नेता इस बात को लेकर अपनी नाराजगी दिखा रहे थे कि सरकार अपने हिसाब से पंचायत चुनाव कराने के लिए आगे आ रही है?
चुनाव आयोग ने उत्तराखण्ड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर दो चरणों में चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी इसके लिए 25 जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू होनी थी। चुनाव आयोग द्वारा पंचायत चुनाव की घोषणा किये जाने के बाद से ही राज्यभर में पंचायत चुनाव लडने वाले राजनेताओं के मन में एक बडा उत्साह देखने को मिल रहा था और काफी राजनेताओं ने तो सोशल मीडिया पर अपना बखान करना भी शुरू कर दिया था, इतना ही नहीं वह अपने प्रचार को तेजी के साथ धार देने के लिए भी आगे बढ निकले थे। उत्तराखण्ड के अन्दर आरक्षण नोटिफिकेशन के मसले पर विपक्ष के काफी नेता सरकार से खफा नजर आ रहे थे और उनका कहना था कि सरकार अपने हिसाब से इन चुनाव को कराने के लिए आगे आ रही है। चुनाव की घोषणा होते ही सरकार और सिस्टम के अफसर चुनावी मोड में जाते हुए नजर आये लेकिन आज जब हाईकोर्ट में आरक्षण नोटिफिकेशन के मसले पर बहस हुई तो हाईकोर्ट ने इन चुनाव पर रोक लगा दी और यह भी टिप्पणी की कि आगे किसी भी तरह की चुनावी कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब पेश करने को कहा है। बता दें कि पिछले शुक्रवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति से अवगत कराने को कहा था लेकिन सरकार आज स्थिति से अवगत कराने में असफल रही। कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने चुनाव की तिथि निकाल दी थी जबकि मामला हाईकोर्ट में चल रहा है इसके बाद कोर्ट ने पूरी चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
पंचायत चुनाव पर लगी रोक के बाद राज्य के अन्दर एक बार फिर पंचायत चुनाव टल गये हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह कटाक्ष भी किये जा रहे हैं कि कई लोगों ने तो अपना प्रचार-प्रसार भी शुरू कर दिया था और पोस्टर से लेकर सोशल मीडिया पर अपनी खबरें प्लांट कराने का भी खाका तैयार किया था और कुछ ने तो चौराहों पर अपने पोस्टर तक लगा दिये थे जिसको देखकर यह गीत भी गुनगुनाया जा रहा है कि ‘दिल के अरमां आसुओं में बह गयेÓ।

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