मंत्री प्रेमचन्द की बर्खास्तगी को खोला मोर्चा

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देहरादून(नगर संवाददाता)। ऋषिकेश क्षेत्र के गैर राजनैतिक संगठनों से जुड़े हुए लोगों के साथ ही मारपीट के मामले में पीडित परिवारों ने कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल की बर्खास्तगी को मोर्चा खोल दिया है और इसके लिए 25 मई को महापंचायत ऋषिकेश के गुमानीवाला में होगी और जिसमें आगे की रणनीति पर मंथन किया जायेगा और प्रदेश के लोगों से इस महापंचायत में अधिक से अधिक संख्या में आने का आहवान किया गया है। इस महापंचायत में केवल कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल की बर्खास्तगी की मांग की जायेगी।
यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में मारपीट प्रकरण में पीडि़त सुरेन्द्र सिंह नेगी की पत्नी दमयंती देवी ने कहा कि कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल के मारपीट मामले में आज तक प्रदेश सरकार ने कैबिनेट मंत्री को बर्खास्त नहीं किया और न ही उन पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग को लेकर वह जनता की अदालत में जायेंगी और इसके लिए 25 मई को गुमानीवाला में सांय चार बजे महापंचायत की जायेगी और इसमें प्रदेश भर के लोगों को आने का आहवान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस महापंचायत में केवल एक सूत्रीय मांग रहेगी की मारपीट करने वाले कैबिनेट मंत्री को मंत्री पद से बर्खास्त किया जाये। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से आज तक कैबिनेट मंत्री के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
इस अवसर पर दमयंती देवी ने कहा कि मेरे पति व उनके साथी धर्मवीर के ऊपर सरकार के काबीना मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल जो कि ऋषिकेश के विधायक है उन्होंने अपने दो सरकारी गनरों, अपने स्टाफ व कार्यकर्ताओं सहित बीच सड़क में जानलेवा मारपीट की जिसके कारण उनको बेहद गम्भीर गुम चोटें आई हैं और डाक्टर ने जांच के बाद तीन माह के पूर्ण आराम करने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि मारपीट के बाद पुलिस ने मंत्री व उनके सरकारी गनरों व स्टाफ को गिरफ्तार करने की बजाय मेरे पति व उनके साथी को गिरफ्तार किया और उनको सारी रात अलग अलग थानों में घुमाया गया जिस थाने में उन्हें रात रखा गया उसकी बेरक में सांप घुस आया था और उस सांप को भी उनके पति ने वहां से हटाया तथा पुलिस द्वारा बिना मेडिकल किये सुरेंद्र सिंह नेगी को दवाइयां दी गयी जिनका असर अगले दिन तक रहा जिसके कारण वह पूरी तरह होश में बातें नहीं कर पा रहे थे, जिसकी वजह से एफआईआर लिखवाते वक्त भी बहुत सी बातें छूट गयी जिन्हें बाद हालांकि उन्हें पुलिस ने अपनी गलतियां छुपाने के लिए बाद में समायोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि जब सभी ने देर रात तक थाने में पहुँचकर अपने पति व उनके साथी के बारे में पूछा तो पुलिस के द्वारा कोई जवाब नहीं मिला फिर अगले दिन सुबह साढ़े दस बजे पुलिस ने प्राइवेट कार से उनके पति व उनके साथी को हमारे घर पर छोड़ा और साथ उन दोनों पर मंत्री के इशारे पर गम्भीर घाटाओं में मुकदमा दर्ज किया गया और अगले दिन हमारे दवाब बनाने के बाद पुलिस ने मंत्री व उसके साथियों पर मुकदमा दर्ज किया गया लेकिन हमें पुलिस की कार्यप्रणाली पर शंका है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ऋषिकेश पुलिस पूर्णतया मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के दवाब में काम कर रही है इतने दिन बीतने के बाद भी पुलिस ने मारपीट करने वाले अन्य लोगों को नहीं खोज पाई है और उससे साफ लगता है कि पुलिस कुछ लोगों को बचाना चाहती है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हमारे परिवार पर भी मंत्री के इशारों पर हमला किया जा सकता है हमें अब सरकार पर भरोसा नहीं है जबकि मेरे पति स्वयं एक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े कार्यकर्ता है और पूर्व में संघ के गो रक्षा समिति के नगर प्रमुख रहे हैं और धर्मवीर भी गौ सेवा से जुड़े कार्यकर्ता है फिर भी सरकार में कोई सुनवाई नहीं हो रही है और मंत्री अभी तक पद पर बरकरार है,।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग कीे है कि सरेआम गुंडई करने वाले कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल को पद से मुक्त किया जाय और जब आज प्रदेश सरकार ने हमसे मुंह मोड़ लिया है और मुख्यमंत्री और राज्यपाल से गुहार लगाने जब वह ऋषिकेश के एक कार्यक्रम में पहुंची तो उन्हें जबरन गिरफ्तार कर पुलिस की गाड़ी में घर ले जाकर घर में ही बंधक बना दिया गया, तो यह सरकार द्वारा पीडि़तों की उपेक्षा का अनुपम उदाहरण है। इस अवसर पर कई वक्ताओं ने इस मामले पर अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर वार्ता में पीडित धर्मवीर प्रजापति की माता कुसुम रानी, प्रमिला रावत, शकुन्तला रावत, संजय, राजेश पयाल, विकास रयाल, जबर सिंह पावेल आदि शामिल रहे।

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