गजबः दून में भी बंदिशों का ‘फरमान’
सवालः न आतंकवाद, न कोरोना, न अपराधों का तांडव फिर भी सडकों पर निकलना अपराध?
सीएम साहब के आदर्श उत्तराखण्ड की राजधानी में तुगलकी फरमान से आवाम ‘हैरान’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन चुके हैं जो एक बडे संकल्प के साथ राज्य के अन्दर चारधाम यात्रा और कावंड यात्रा को एतिहासिक बनाने के लिए देशभर में महानायक के रूप मंे अपनी पहचान बना गये। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को पर्यटन व तीर्थाटन के रूप में विकसित करने के लिए और तेजी से अपने विजन पर काम करना शुरू कर रखा है और उसी के चलते उत्तराखण्ड के व्यापारियों में मुख्यमंत्री की जिंदादिली को लेकर उन्हें अपना संकटमोचन मान चुके हैं। दो साल कोरोना काल मंे व्यापार बंद होने के कारण व्यापारियों के सामने बडा संकट खडा हुआ और अब जब कोरोना काल का लगभग अंत हो चुका है तो उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी मंे ही जिले के कप्तान ने आवाम की आजादी पर पहरा लगाने के लिए तुगलकी फरमान जारी कर दिया कि रात्रि ग्यारह बजे के बाद जो अनावश्यक सडकों पर धूमता हुआ पाया गया तो उससे पुलिस पूछताछ करेगी और तो और उन्होंने राजधानी के होटल में बार, रेस्टतरा, ढोबे व खाने पीने के सामान की दुकानें रात ग्यारह बजे बंद करने का आदेश दिया तो दून के काफी व्यापारी और आवाम भी इस फरमान को सुनकर हैरान हो गई और उनका मानना है कि एक ओर तो उत्तराखण्ड के सीएम राज्य को पर्यटन प्रदेश के रूप मंे विकसित कर देशभर के पर्यटकों को उत्तराखण्ड में आमंत्रित कर रहे हैं वहीं अगर रात ग्यारह बजे रेस्तरा, ढाबों में ताले लटके मिलेंगे तो फिर रात में बाहर से आने वाले पर्यटक खाने के लिए भी तरस जायेंगे जिससे राजधानी में पर्यटक आने से भी संकोच करेगा? कप्तान के इस आदेश से राजधानी मंे बहस छिड गई है कि न दून में आतंकवाद है न कोरोना का तांडव है और न ही यहां सडकों पर अपराधों का बोलबाला है तो फिर आवाम पर सडकों पर निकलने के लिए कप्तान की बंदिशें लगाना कहीं न कहीं सीएम के सपनों पर एक बडा ग्रहण लगाने जैसा है? अगर उत्तराखण्ड को पर्यटन प्रदेश बनाना है तो यहां भी गोवा की तर्ज पर रातभर होटल, ढाबे और सड़कें पर्यटकों से गुलजार होनी चाहिए और अगर रात के ग्यारह बजे होटल, ढाबों और सडकों पर बंदिशें ही लगानी है तो फिर इससे देशभर के पर्यटकों में उत्तराखण्ड सरकार को लेकर क्या संदेश जायेगा कि उनके यहां राजधानी मंे सडकों पर रात ग्यारह बजे ही ब्लैक ऑउट हो जाता है?
उत्तराखण्ड के चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में पुलिस के कुछ अफसर रात दस बजे ही राजधानी के मुख्य मार्गों से लेकर हर चौराहे पर जिस तरह से लोहे के बैराकेटिंग लगाकर वहां हथियारों के साथ पुलिस फोर्स को चैकिंग के लिए तेनात कर देते थे तो उससे राज्यवासियांे और बाहर से आने वाले लाखों पर्यटकों के मन में एक भय बना रहता था कि आखिरकार शांतप्रिय दून में पुलिस के कुछ अफसरों को सडकांे और चौराहों पर ऐसा माहौल बनाने की क्या जरूरत आ पडती थी कि रात में सडकांे पर निकलने वाली युवा पीढी और आम इंसान के मन में एक बडे डर की भावना बनी रहती थी। उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी में पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल मंे राजधानी के अन्दर नये कप्तान की तैनाती से पहले रातभर सडकों पर आवाम खुले मन से बेखौफ होकर अपने परिवारों के साथ धूमता हुआ नजर आता था और सडकों पर बैरियर लगाकर आवाम को डराने का भी कोई दृश्य देखने को नहीं मिला और रातभर राजधानी का दृश्य गोवा की तर्ज पर दिखाई देता था कि कोई भी युवा पीढी कहीं जाकर बंद मक्खन और चाय पीकर आनंद का अनुभव लेते थे तो दर्जनों परिवार ऑउटिंग के लिए कहीं पर भी रेस्तरा व ढाबे में जाकर रात्रि में खाने का आनंद लेकर देर रात बिना किसी पुलिसिया डर के वह घर लौटते थे लेकिन हैरानी वाली बात है कि राजधानी के नये कप्तान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखण्ड पर्यटन प्रदेश की अस्थाई राजधानी मंे ही आवाम पर रात ग्यारह बजे के बाद निकलने के लिए पहरा लगा दिया? राजधानी में सैकडों ऐसे युवा और परिवार हैं जो रात के समय अपना काम खत्म करके दस से ग्यारह बजे के बीच धूमने के लिए सडकों पर निकलते हैं और वहीं परिवार के साथ होटल, रेस्तरा व ढाबों में डिनर करते हैं लेकिन गजब की बात यह है कि अब कप्तान ने फरमान जारी कर दिया कि ढाबों, रेस्तराओं में रात ग्यारह बजे ताले लगा दिये जाये और रात्रि ग्यारह बजे के बाद जो भी अनावश्यक धूमता हुआ दिखाई दे उससे पूछताछ की जाये। सवाल उठ रहे हैं कि राजधानी मंे न तो आतंकवाद पनप रहा है न ही मौजूदा समय में कोरोना काल का कोई कहर है और न ही शहर की सडकों पर अपराधी खुलेआम कोई तांडव मचा रहे हैं फिर भी पुलिस सडकांे पर आखिर कौन से संदिग्धों से पूछताछ करने के लिए आगे आयेगी यह राजधानी की जनता को समझ नहीं आ रहा? राजधानी का आवाम दिल्ली की तर्ज पर रातभर खुली हवा में सांस लेने के लिए पर्यटन नगरी मंे अपने आपको आजाद रूप से जीने की चाहत रखता है और अगर सडकों पर पुलिस की बंदिशें हुई तो उससे राज्य की अस्थाई राजधानी को कौन पर्यटन नगरी का खिताब देगा यह अपने आपमें एक बडा सवाल खडा हो चुका है? राजधानी में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और यहां लूट, डकैती, हत्या, राहजनी जैसे अपराध सडकांे पर देखने को नहीं मिलते और छोटा-मोटा अपराध होना लाखों की आबादी में कोई मायने नहीं रखता इसलिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी कप्तान के नये फरमान पर ब्रेक लगाना पडेगा नहीं तो व्यापारी, युवा पीढी और आवाम के साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों के मन में बेहतर सरकार की कोई छाप दिखाई नहीं देगी?
