उत्तराखण्ड में पुष्कर और कांवडिये बोले जय-जय शिव शंकर

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक ऐसे मुख्य सेवक बन चुके हैं जो बडे से बडे काम को भी छोटा समझकर उसे धरातल पर उतारने के लिए खुद आगे आ जाते हैं। दो साल से बंद पडी चारधाम यात्रा को जिस एतिहासिक रूप में पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के अन्दर बनाया उससे देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के मन में पुष्कर सिंह धामी को लेकर एक नया संदेश गया है कि उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री मन के अन्दर जो जुनून ठान लेते हैं उसे वह पूरा करके ही चैन से बैठते हैं। चारधाम यात्रा को एतिहासिक बनाकर राज्य में दो सालों से बंद पडी कावड यात्रा को अभूतपूर्व बनाने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने कांवडियों को वचन दिया था और इस वचन का पालन करते हुए उन्होंने शिव भक्तों के सम्मान में जिस तरह से राज्य के अन्दर उनका स्वागत किया और खुद गंगा घाट पर कांवडियों के पैर धोकर उनसे आशीर्वाद लिया और उन पर हैलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की उससे उत्तराखण्ड में पुष्कर ही पुष्कर के उद्घोष सुनाई पडे और आस्था के पथ पर आये करोडो कांवडियों ने हरि के द्वार में जिस तरह से जय-जय शिव शंकर के उद्घोष लगाकर भगवान भोले में अपनी आस्था दिखाई वह नजारा उत्तराखण्डवासियों के लिए किसी अलौकिक दृश्य से कम नहीं था। गजब की बात यह है कि इस कावंड यात्रा में करोडो शिव भक्तों ने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अपील का पालन करते हुए जहां पौधे लगाये वहीं वापस घर जाते समय उनके हाथों और गाडियों में जिस तरह से तिरंगे शान से लहरा रहे थे उसे देखकर हर कोई कह रहा था कि ऐसा होता है मुख्यमंत्री जिसके मन में आस्था की इतनी बडी जोत जल रही है जिसे वह चारधाम यात्रा और कांवड यात्रा में आने वाले करोडो श्रद्धालुओं को उसका रूप दिखा चुके हैं।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक ऊर्जावान मुख्य सेवक के रूप में मात्र एक साल के भीतर ही देशभर में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवा चुके हैं। दो साल बाद जब राज्य में चारधाम यात्रा शुरू होनी थी तो उसको लेकर यह शंका पनपने लगी थी कि कोरोना की तीसरी लहर कहीं चारधाम यात्रा पर तीसरे साल भी ग्रहण न लगा दे। हालांकि जब स्वास्थ्य मंत्री धनसिंह रावत ने उत्तराखण्ड में आने वाले श्रद्धालुओं का कोरोना टेस्ट कराने की प्रतिबद्धता की थी तो उससे श्रद्धालुओं व व्यापारियों के मन मे ंएक बडा डर देखने को मिला था लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने बडा साहस करते हुए ऐलान किया था कि श्रद्धालुओं के लिए टेस्ट कराना कोई अनिवार्य नहीं है और वह सीधे चारधाम यात्रा में दर्शन करने के लिए आ सकते हैं। पुष्कर सिंह धामी का एक बडे जज्बे के साथ देश विदेश के लाखों श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा में आमंत्रित कराने पर राज्यवासियों के मन मे ंएक शंका उठ रही थी कि अगर लाखों की भीड में कोरोना फैल गया तो उससे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने एक बडा संकट आकर खडा हो जायेगा लेकिन वचन के पक्के माने जाने वाले पुष्कर सिंह धामी ने कोरोना की परवाह किये बगैर लाखों श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा में आमंत्रित कराया और यात्रा मार्ग पर जिस तरह से डाक्टरों की टीम के साथ-साथ सभी इंतजाम किये उसे देखकर चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के मन में पुष्कर सिंह धामी को लेकर एक बडा जज्बा देखने को मिला उसी का परिणाम है कि पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार कावंडियों के लिए ऐसा कोई आदेश पारित नहीं होने दिया जिससे देवभूमि में आने वाले कांवडियों के मन में पुलिस का कोई भय दिखाई दे।
पुष्कर सिंह धामी ने जिस श्रद्धा के साथ कांवडियों को शिवभक्त मानकर उन्हें देवभूमि में गंगा के तट पर उनका स्वागत करने का जो खाका खींचा वह देशभर में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच को चार चांद लगा गया। बडी सोच रखने वाले मुख्य सेवक पुष्कर ंिसह धामी ने गंगा के तट पर जिस तरह से शिव भक्तों के पैर धोकर उनसे आशीर्वाद लिया और उन्हें गंगाजल भेट में दिया उससे उत्तराखण्ड में आने वाले करोडो कांवडिये पुष्कर सिंह धामी के इस सौम्य रूप को देखकर गद्गद् हो गये और उनकी खुशी का ठिकाना उस समय नहीं रहा जब हरि के द्वार में पुष्कर सिंह धामी का हैलीकॉप्टर शिव भक्तों पर फूल बरसाने के लिए उडा। पुष्कर सिंह धामी के राज में जिस तरह से देवभूमि की सडकों पर करोडो रूपये के डीजे शिव भक्ति की धुनो को बजाते हुए दिखाई दिये वह सुन्दर दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हरि के द्वार में पुष्कर सिंह धामी ने कोई अलौकिक चमत्कार धरातल पर उतार दिया हो।

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