देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में आज यह कहावत सत्य साबित हो रही है कि राजा के बदलने से शासन-प्रशासन भी उनके बताये रास्ते पर चल निकलता है और इसका सच उत्तराखण्ड में भी सामने आने लगा है। उत्तराखण्ड में सत्ता बदली तो सिस्टम भी समझ गया कि उसे किस राह पर आगे बढना है क्योंकि अगर उसने पूर्व शासक के बताये रास्ते पर अपने कदम आगे बढाने का जज्बा दिखाया तो उसे मुख्य सेवक अपनी टीम से बाहर का रास्ता दिखा देंगे और फिर वह सिस्टम में खलनायक के रूप में ही नजर आता रहेगा? उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब राज्य के अन्दर उन कावंडियों को शिवभक्त मानकर उनका आदर सत्कार किया जा रहा है जिन्हें पूर्व की कुछ सरकारों के कार्यकाल में डीजे पर डांस करने वाले कांवडियों को हुडदंगी करार दिया जाता था? शिवभक्तों के साथ पुष्कर सिंह धामी का यह असीम स्नेह उनके एक सारथी की सोच ही माना जा रहा है जो पुष्कर ंिसह धामी के लिए सत्ता के अन्दर श्रीकृष्ण बनकर उन्हें सही मार्ग की ओर ले जाने के लिए हमेशा प्रेरणा दे रहे हैं और उन्हीं की प्रेरणा के चलते सम्भवत: उत्तराखण्ड में आने वाले शिवभक्तों को उत्तराखण्ड की पुष्कर सरकार गंगा घाट पर उनका स्वागत कर रही है और जिले के सभी अफसरों को संदेश दिया गया है कि शिवभक्तों की राह में कोई भी विध्न न डाले जिसके चलते राज्य की शांति भंग हो इसलिए पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि शिवभक्त आस्था के पथ पर एक नये उत्साह के साथ हरि के द्वार में गंगाजल लेने के लिए शांति के साथ आगे बढता जा रहा है।
उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्री ऐसे देखने को मिले जो मुख्यमंत्री बनने से पहले तो सरल और व्यवहारिक नजर आते थे लेकिन जैसे ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली तो उनके कुछ सलाहकारों ने उन्हें ऐसे भ्रमजाल में बांध दिया जिससे बाहर निकलना चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों के बस में ही नहीं रहा और यही कारण रहा कि चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने अपने सलाहकारों के ज्ञान सागर में डूबकर अहंकार का चश्मा पहना और इस अहंकार के सागर में इतने गोते लगाये कि वह आवाम को अपना गुलाम समझने लगे और उन्होंने हिटलरशाही से सरकार चलाने का पैमाना तय किया तो उनके हाथ से सत्ता ऐसे फिसल गई मानो उन्होंने अपने आपको अभेद रखने का कितना बडा चक्र रचा हुआ था? उत्तराखण्ड में कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों को सहकर आवाम अपने आपको डर के साये में जीने में मजबूर था लेकिन इसी बीच जब राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और युवा पुष्कर ंिसंह धामी के हाथों में सत्ता आई तो उन्होंने अपनी किचन टीम में चंद ईमानदार अफसरों को जिस तरह से तैनात किया उसके बाद राज्य के अन्दर यह संदेश चला गया कि राजा के बदलने से शासन-प्रशासन भी बदलता है जिसकी छाया पुष्कर राज में अफसरों के अन्दर देखने को मिल रही है। उत्तराखण्ड के अन्दर एक साल से राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे हैं तो राज्य की जनता यह कहने से नहीं चूक रही कि सत्ता की कमान संभाले हुये पुष्कर सिंह धामी इस युग में अर्जुन की भूमिका में हैं और उनकी किचन टीम में उनके सबसे बडे सारथी श्रीकृष्ण की भूमिका में नजर आ रहे हैं जो पुष्कर सिंह धामी को सही मार्ग पर ले जाने के लिए उनके साथ अभेद होकर चल रहे हैं।
उत्तराखण्ड के अन्दर पहली बार ऐसा मुख्यमंत्री देखने को मिल रहा है जो गरीब, असहाय लोगों की पीडा को नजदीक से अहसास कर रहे हैं और उसी के चलते वह उसकी पीडा का निवारण करने के लिए आगे आ रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी को इस बात का तो इल्म उनके सारथी ने करा ही दिया था कि सत्ता चलाने का पैमाना उदारता और शालीनता है इसी राह पर चलकर राज्यवासियों का दिल जीता जा सकता है। उत्तराखण्ड में आस्था की कावंड यात्रा में पुष्कर सिंह धामी का सौम्य रूप देखकर देशभर के कावंडियों के मन में जो श्रद्धा और प्रेम देखने को मिल रहा है वह उत्तराखण्ड में एक नई इबारत लिखने की ओर आगे बढता हुआ नजर आ रहा है।
