सीएम साहबः उत्तराखण्ड की जेलों में चल रही डांस पार्टी

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। भाजपा शासनकाल में त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य में चार साल तक सत्ता चलाई और गृह विभाग भी उनके पास था लेकिन उन्होंने कभी भी राज्य की जेलों से चल रहे कुख्यात बदमाशों के गैंगों पर नकेल लगाने के लिए एक कदम भी आगे नहीं बढाया और यही कारण रहा कि राज्य की अधिकांश जेलों में कुख्यात बदमाशों ने अपना बडा समराज्य बना लिया और वहां से कुख्यातों ने हत्या कराने और फिरौती मांगने का खुला खेल खेला। उत्तराखण्ड के इतिहास मंे पहली बार राज्य के नये मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को अपराधमुक्त कराने के लिए आगे आये हैं और यही कारण रहा कि अल्मोडा जेल से फिरौती मांगने का खेल खेलने वाले कुख्यात कलीम की बैरिक में छापा मारकर वहां से कुछ मोबाइल फोन, सिम कार्ड व एक लाख से अधिक नगदी बरामद की थी। कलीम के इस खेल को बेनकाब करने के लिए अल्मोडा पुलिस ने कलीम व उसके गुर्गों को पुलिस रिमांड पर लिया तो चर्चा है कि यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि कलीम व उसका गैंग अकसर जेल में शराब व डांस पार्टी का आयोजन करता था और उसने यहां तक भी पर्दा उठाया कि राज्य की अधिकांश जेलों में वह बंद रहा और वहां भी ऐसी डांस पार्टियां आयोजित होती हैं। अब राज्य के मुख्यमंत्री जो कि प्रदेश को अपराधमुक्त करने का वचन राज्यवासियों को दे चुके हैं उन्हें अब सख्त रूख अपनाते हुए राज्य की अधिकांश जेलों में चल रही शराब व डांस पार्टियों पर एक बडी नकेल लगाकर उन कुख्यातों को अपनी सरकार का इकबाल दिखाना चाहिए जो कुख्यात उत्तराखण्ड सरकार का भय आज तक कभी माने ही नहीं? मुख्यमंत्री को शायद इस बात का इल्म भी नहीं है कि राज्य की कुछ जेलों में न तो जैमर लगे हुये हैं और न ही सीसीटीवी। इसी का परिणाम है कि कुख्यात बदमाशों ने जेलों को अपना महफूज ठिकाना समझ लिया है और यहां तक चर्चा है कि अल्मोडा जेल के कुछ बंदी रक्षकों का अपराधियों से बडा गठबंधन हो रखा है जो उन्हें जेल के अन्दर नशा व मोबाइल तक उपलब्ध कराने का खेल खेल रहे हैं? अगर अल्मोडा पुलिस ने इन पर नकेल लगाकर उनकी गिरफ्तारी करने का साहस दिखाया तो यह तय है कि उत्तराखण्ड की जेलों मंे बंद कुख्यातों को पुष्कर सरकार का डर दिखने लगेगा।
उत्तर प्रदेश में अगर अपराध पर नकेल लगी है तो उसका श्रेय सीधे वहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जाता है और उत्तर प्रदेश से सटे उत्तराखण्ड में पिछले साढे चार सालों में अपराध का ग्राफ ऊफान पर रहा तो यह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की नाकामी का ही परिणाम रहा। उत्तराखण्ड के कुछ जिलों मंे जहां त्रिवेन्द्र राज में हर अपराध ऊफान पर रहा वहीं राज्य के कुछ जेलों में कुख्यात बदमाशों ने वहां से अपने गैंग चलाने का खुला तांडव किया लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जेलों से चल रहे गैंगों पर ऐसे घृतराष्ट्र बने कि उसका खामियाजा राज्य की जनता को भुगतना पडा। त्रिवेन्द्र राज में न तो आवाम ने अपने आपको सुरक्षित महसूस किया और न ही राज्य के उद्यमियों के मन में बदमाशों का खौफ कम दिखा। हालांकि जबसे राज्य की कमान पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आई है उन्होंने राज्य के अन्दर साफ संदेश दिया कि वह राज्य को अपराधमुक्त बनायेंगे। अपराधियों के खिलाफ डीजीपी को ऑपरेशन करने का खुला आदेश दिया और साफ किया कि जेलों में चल रहे गैगों पर नकेल लगाने के लिए बडा ऑपरेशन चलाया जाये। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सफल रणनीति का ही परिणाम था कि अल्मोडा जेल से अपनी सलतनत चला रहे कुख्यात कलीम की बैरिक में पुलिस व एसटीएफ ने छापा मारकर वहां से कुछ मोबाइल फोन, सिम कार्ड व एक लाख से अधिक रूपया बरामद किया था। उत्तराखण्ड की किसी जेल के अन्दर ऐसा ऑपरेशन सिर्फ एक ताकतवर मुख्यमंत्री के आदेश पर ही माना जा रहा है। कलीम व उसके गुर्गों को पुलिस टीम ने 48 घंटे के पुलिस रिमांड पर लिया और उनसे लम्बी पूछताछ की तो उससे पुलिस को कई राज पता चले हैं। सूत्रों का कहना है कि कलीम ने इस बात से भी पर्दा उठाया है कि वह राज्य की अधिकांश जेलों में बंद रहा है और वहां उसने हमेशा शराब पार्टियां की हैं और जब चाहा जश्न मनाया और जेल के अन्दर मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। कलीम ने जिस तरह से पुलिस के सामने कई राज कबूले हैं उससे यह बात साफ नजर आ रही है कि कुछ जेलों में सीसीटीवी व जैमर न लगे होने के कारण कुख्यात बदमाशों को अपना गैंग चलाने में कोई दिक्कत नहीं आती और यहां तक चर्चा है कि जेल के तीन बंदी ऐसे हैं जो जेल के अन्दर बंद बदमाशों को नशा, मोबाइल, शराब, मास व मनोरंजन की हर चीजें उपलब्ध कराते थे। ऐसी सम्भावना भी है कि अल्मोडा पुलिस उन बंदी रक्षकों पर कभी भी अपना शिकंजा कसके उन्हें गिरफ्तार भी कर सकती है? अब राज्य के मुख्यमंत्री से राज्यवासियों को उम्मीद है कि वह जेलों में चल रहे कुख्यात बदमाशों के नेटवर्क को नेस्तानबूत कर दें और सभी जेलांे में जैमर व सीसीटीवी लगाकर उनके नेटवर्क को तार-तार करें जिससे राज्यवासी व उद्यमी अपराधमुक्त राज्य के सपने को खुली आंखों से देख सकें।

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