आवाम के मन में हसमुख धामी ने कर दिया जादू

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राजेश शर्मा
देहरादून। उत्तराखण्ड की वादियों में कुछ माह पूर्व तक राज्यवासी भाजपा के साढे चार साल की सत्ता को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को अपने निशाने पर लेते रहे और यह नाराजगी दिखाते रहे कि अगर डबल इंजन की सरकार ऐसी होती है तो उन्हें 2०22 के चुनाव में ऐसी डबल इंजन की सरकार नहीं बनानी। राज्यवासियों के इरादों को भापकर भाजपा हाईकमान ने आखिरी दौर में राज्य के युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी पर एक बडा दांव खेलते हुए उन्हें राज्य की सत्ता सौंप दी तो उससे उत्तराखण्ड भाजपा के आधा दर्जन बडे नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें डल गई कि आखिरकार भाजपा हाईकमान ने सत्ता में कम तजुर्बा रखने वाले विधायक को कैसे राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया? हालांकि ऐसे सभी भाजपा नेताओं की सोच को पुष्कर सिंह धामी ने अपनी तीन माह के कार्यकाल में उन्हें एक बडा आईना दिखा दिया क्योंकि उन्होंनेे राज्य के अन्दर सत्ता चलाने का जो अंदाज अपनाया उससे राज्यवासी भाजपा शासन के साढे चार साल को भूल गये और अब राज्य में चारों ओर धामी का झंडा बुलंद होता हुआ दिखाई दे रहा है। आवाम के मन में हसमुख पुष्कर ंिसह धामी ने अपने तीन माह के कार्यकाल में आवाम के मन में जिस तरह से एक जादू कर उनका दिल जीतने का मिशन शुरू किया है उससे विपक्षी दलों के पैरों तले जमीन खिसक गई है और उनके तीन माह के कार्यकाल में राज्य के अन्दर स्वच्छ प्रशासन का जो इकबाल देखने को मिला है उसने आवाम के मन में एक नई आशा की किरण भर दी है कि पुष्कर सरकार भ्रष्ट तंत्र पर शिकंजा कसना जानती है क्योंकि धामी की टीम में ईमानदार अफसरों की जो कतार खडी हुई है वह राज्य के हर जिले में प्रशासन व पुलिस अफसरों पर पैनी निगाह बनाये हुए है और यह भी तय है कि ऐसे अफसरों के होते हुए प्रशासन व पुलिस का कोई अफसर वो खेल नहीं खेल पायेगा जो त्रिवेन्द्र राज में प्रशासन व पुलिस के कुछ अफसर चार साल तक खेलते आ रहे थे?
उत्तराखण्ड की सियासत में पुष्कर सिंह धामी जैसा मुख्यमंत्री चंद माह में राज्यवासियों के मन में अपना एक बडा जादू पैदा कर पायेगा ऐसी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी? पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालते ही जिस तरह से राज्य के पूर्व मुख्य सचिव ओमप्रकाश को हटाकर संदेश दिया कि राज्य में स्वच्छ प्रशासन के तहत सत्ता चलेगी तो उससे उन भ्रष्ट अफसरों की नींद उड़ गई जो राज्य में त्रिवेन्द्र शासनकाल में अपने आपको आवाम का भाग्यविधाता समझ बैठे थे। त्रिवेन्द्र राज में शासन व पुलिस के चंद अफसर इतने बेलगाम, इतने हिटलर बन चुके थे कि वह किसी को भी फर्जी मुकदमों में फंसाने से पीछे नहीं हट रहे थे और सत्ता की गुलामी में वह इतने लीन हो गये थे कि उन्होंने नौकरी के समय ली गई शपथ को भी चंद राजनेताओं की चौखट पर अपने आपको गुलाम की तरह गिरवी रख दिया था? सत्ता संभालते ही पुष्कर सिंह धामी ने हिटलर व बेलगाम हो चुके कुछ अफसरों को महत्वपूर्ण पदों से हटाकर साफ संदेश दिया कि उनके शासनकाल में ऐसे अफसरों की कोई जरूरत नहीं है जो कुर्सी पर बने रहने के लिए किसी को भी अपना शिकार बनाने से पीछे नहीं हटते थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालते ही संदेश दिया कि वह राज्य के सेवक है न कि मुख्यमंत्री। पुष्कर ंिसह धामी की इस सोच ने राज्यवासियों के दिल में भाजपा को लेकर चली आ रही एक बडी नाराजगी को अपने से दूर करने का मिशन जिस तरह से शुरू कर रखा है उसने राज्य की विपक्षी पार्टियों की नींद उडाकर रख दी है। पुष्कर सिंह धामी कार्यशैली का हर कोई मुरीद हो रखा है। भाजपा आलाकमान से लेकर आवाम को उनके फैसले खूब भा रहे हैं। बीजेपी शासन के साढ़े चार साल में तीसरे मुख्यमंत्री के तौर पर चार जुलाई को पुष्कर सिंह धामी ने शपथ ली। शपथ लेने के बाद से पुष्कर सिंह धामी ने खुद को जनता का मुख्य सेवक बनकर सेवा करने की बात की। इससे धामी जनता के बीच में मुख्यमंत्री आवास तक आम लोगों की पहुंच को उन्होंने सरल कर दिया। जिससे लोगों में नई उम्मीद जगी है। इतना ही नहीं सीएम हर कार्यक्रम में हल्के-फुल्के माहौल और हंसी के जरिए भी लोगों के दिल में जल्दी जगह बनाने में कामयाब हुए।
युवा सीएम के तौर पर धामी ने अपनी छवि के अनुरूप ही फैसले लेने शुरु किये। सबसे पहले युवाओं के लिए रोजगार देने और भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सीएम ने 22 हजार पदों पर नियुक्ति देने का ऐलान किया। इसके बाद कोविड में अपनों को खो चुके बच्चों के लिए सीएम ने वात्सल्य योजना लाकर धामी ने ऐसे असहाय बच्चों को सहारा और सुरक्षा देने का सरकार ने काम किया है। युवाओं के बीच सीएम की छवि पुराने मुख्यमंत्रियों की तुलना में बिल्कुल अलग है।

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