देहरादून(नगर संवाददाता)। मानदेय में बढ़ोत्तरी किये जाने सहित अनेक मांगों को लेकर उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन ने जुलूस निकालकर सचिवालय कूच किया लेकिन पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया, इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों ने तीखी नोंकझोंक व धक्का मुक्की हुई ओर बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अब आंदोलन को और तेज किया जायेगा।
यहां यूनियन से जुड़ी हुई आशाये गांधी पार्क के पास सीटू कार्यालय में इकटठा हुई और वहां से मानदेय में बढोत्तरी मानदेय में बढ़ोत्तरी किये जाने सहित अनेक मांगों को लेकर उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता यूनियन ने जुलूस निकालकर सचिवालय कूच किया लेकिन पुलिस ने सुभाष रोड पर बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया, इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों ने तीखी नोंकझोंक व धक्का मुक्की हुई ओर बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि लगातार वह आंदोलनरत है लेकिन झूठे आश्वासन ही दिये जा रहे है और अपनी 12 सूत्री मांगों को लेकर नौ अगस्त को सचिवालय में प्रतिनिधि मंडल की बैठक हुई जिसमें कई बातों पर कार्यवाही करने की सहमति बनी मीटिंग में स्वास्थ्य सचिव महानिदेशक एवं मिशन डायरेक्टर आदि थे उसके बाद 12 अगस्त को सीटू से संबंधित आशा वर्कर के साथ महानिदेशक तथा मिशन डायरेक्टर के साथ दोबारा वार्ता हुई जिसमें 4००० प्रतिमाह बढ़ोतरी का प्रस्ताव बनाया गया महानिदेशक के द्वारा वह प्रस्ताव शासन को भेजा गया लेकिन आज तक उस पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई है जो चिंता का विषय है। वक्ताओं ने कहा कि आशाओं ने खटीमा स्थित सीएम कैंप कार्यालय का घेराव भी किया और विधानसभा सत्र के दौरान दून में रैली भी निकाली और खटीमा कैंप कार्यालय के दौरान मुख्यमंत्री से वार्ता हुई जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा समय कार्यवाही हेतु दिया गया लेकिन आज तक शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। वक्ताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आशा वर्कर उनसे शासनादेश शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया लेकिन मुख्यमंत्री का एक ही जवाब होता है कि चर्चा चल रही है बात चल रही है आखिर कब तक अब आशाओं का सब्र का बांध टूट रहा है बार-बार मुख्यमंत्री एक ही बात बोलते हैं काम हो रहा है काम हो रहा है अब सभी आशा वर्कर ने यह फैसला किया है कि जब तक शासनादेश जारी नहीं किया गया तो आशा वर्कर अब कड़ा आंदोलन करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि सरकार का रवैया बहुत ही लापरवाही भरा है आशा वर्कर के हड़ताल की वजह से जो भी नुकसान हो रहा है उसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी। वक्ताओं ने कहा कि इसके अलावा अन्य मांगों पर प्रभावी कार्यवाही की जाऐ जिनमें आशाओं को कर्मचारी घोषित करने तथा घोषित होने तक 21 हजार का मानदेय दिया जाऐ। इस अवसर पर ज्ञापन में कहा गया है कि सेवानिवृत्त होने पर पेन्शन का प्रावधान हो । वक्ताओं ने कहा कि कोरोना वायरस कोविड संक्रमण काल में लगी आशाओं को 5०लाख बीमा का लागू किया जाये । इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। इस अवसर पर बडी संख्या में आशाऐं मौजूद थी ।
