प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में प्रचंड बहुमत की सरकार में भाजपा हाईकमान ने 2०22 का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को सत्ता सौंपी तो उसके बाद से ही पुष्कर सिंह धामी ने कम समय के भीतर राज्यवासियों का दिल जीतने के मिशन में अपने कदम आगे बढाये और वह आये दिन आवाम के बीच जाकर जिस तरह से यह दिखा रहे हैं कि सरकार राज्यवासियों की है और वह तो सिर्फ गद्दी पर बैठकर राज्य चला रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी के इस रणनीति का असर राज्य के अन्दर जितना विशाल होता जा रहा है कि राज्यवासियों के मन में भाजपा के साढे चार साल की हिटलरशाही की सत्ता को वह भूलना शुरू कर रहे हैं और जिस तरह से आवाम अब पुष्कर धामी को एक कुशल राजा के रूप में देख रहा है उसी का परिणाम है कि मुख्यमंत्री धामी ने चुनावी मैदान में उतरकर विपक्षी दलों को ललकारना शुरू कर दिया है। वहीं सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उत्तराखण्ड से गायब दिखाई दे रहे हैं और वह राज्य की कांग्रेस को एकसाथ लाने के मिशन में भले ही सफल न हुये हों लेकिन इन दिनों पंजाब में कांग्रेस के बीच चली आ रही कलह को समाप्त करने के लिए उन्होंने अपना रूख पंजाब की ओर कर रखा है। इसी का फायदा उठाते हुए पुष्कर सिंह धामी तूफानी दौरे कर हर जिले में आवाम का दिल जीतने के मिशन में जुटे हुये हैं। पुष्कर सिंह धामी के अब तक के कार्यकाल में राज्यवासियों ने न तो एक भ्रष्टाचार देखा और न ही घोटाला जिसके चलते विपक्ष पुष्कर धामी सरकार को किसी भी मुद्दे में घेरने में सफल नहीं हो पा रहा है और यही पुष्कर सिंह धामी को एक नई ऊर्जा दे रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चुनाव 2०22 के लिए मैदान में उतरने के बाद कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ऐसे गायब हुए की बिलों से बाहर निकले कांग्रेसी फिर अपने बिलों में छुप गये हैं। उत्तराखण्ड 2०22 के चुनाव के लिये विपक्ष कांग्रेस पूरी ताकत लगाने के लंबे लम्बे बयान दे रहे थे। पूरी उठापटक के बाद प्रदेशाध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष भी बदले गये। चुनाव संचालन की कमान अपने सबसे बड़े नेता हरीश रावत को सौंप दी गयी। चार चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बना दिये गए। उसके बाद सड़कों पर उतर कर हल्ला भी किया गया। अब अचानक पंजाब प्रकरण में विफलता व उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री का चेहरा न बनाये जाने से नाराज हरीश रावत ने दिल्ली में ही डेरा डाल लिया है। वही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ताबड़तोड़ रैलियां व जनसभाएं कर जनता के बीच पहुँच गये हैं। मुख्यमंत्री की लोकप्रियता का आलम यह हैं कि कांग्रेस की विधायक हों या निर्दलीय, भाजपा का रुक कर रहे हैं। कांग्रेस का युवा वर्ग भी हरीश रावत व प्रीतम सिंह की लड़ाई से आहत भाजपा का रुक कर रहा है। मुख्यमंत्री अपने हों या विपक्ष के रूठे विधायकों को मनाने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कही स्व० नारायणदत्त तिवारी तो कही स्व० मनोहर पर्रिकर की छाप छोड़ते दिख रहे हैं। उत्तराखण्ड के सबसे खाटी नेता महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी को अपना आदर्श मानने वाले पुष्कर सिंह धामी उन्ही की तरह कार्यकर्ताओं व जनता से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं। वही कांग्रेस के नेता लगातार पंजाब प्रकरण व हरीश रावत गुमसुदगी से परेशान हैं। आलम यह है कि कांग्रेस की लड़ाई बन्द कमरों से सड़कों पर आ गयी हैं। कभी हरीश रावत के दाहिना हाथ रहे रणजीत रावत जैसे नेता भी हरीश रावत के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं। तो कांग्रेस के कई ब्राह्मण नेता गणेश गोदियाल को आगे बढ़ाए जाने से भी हरीश रावत से अच्छे खासे नाराज हैं। वही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी में देवस्थानम बोर्ड के विवाद को थाम कर गढ़वाल हो या कुमाऊँ दोनों क्षेत्र के ब्राह्मणों को खुश करके अपनी छवि सुधार गये। मुख्यमंत्री का हँसमुख स्वभाव व अपने भाषणों में कार्यकर्ताओं का नाम से सीधा सम्बोधन भी उनकी लोकप्रियता को बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री विपक्ष के विधायकों के भी कामों में कोई अड़ंगा नही लगा रहे हैं जिस शर्म के कारण विपक्ष के विधायक भी धामी का विरोध खुलकर नही कर रहे हैं। विपक्ष के कुछ विधायक तो खुलकर धामी की तारीफ भी कर चुके हैं। वही कांग्रेस का बड़ा वर्ग पंजाब प्रकरण का जिम्मेदार हरीश रावत को मानकर ही प्रदेश में उन्हें ज्यादा तवज्जों देने के खिलाफत भी कर रहा है। भाजपा भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आगे कर अपने पुराने पुराने नेताओं से सीधा संपर्क कर सभी को चुनाव प्रबन्धन में प्रयोग कर रही है लेकिन कांग्रेस अब बहुत पीछे खड़ी हो गयी है। कांग्रेस का मुख्यालय इस सब की गवाही भी दे रहा है।
