भारत बंद के चलते किसानों व अन्य संगठनों ने निकाला जुलूस

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लालकुआ(संवाददाता)। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आहूत 27 सितंबर के ‘भारत बंदÓ के समर्थन में अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले कार रोड बिन्दुखत्ता बाजार से लालकुआं बाजार में जुलूस निकाला गया।
इस दौरान कार रोड पर हुई सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) बिन्दुखत्ता सचिव ललित मटियाली ने कहा कि मोदी सरकार देश की संपत्ति के साथ साथ खेती किसानी को भी पूंजीपतियों के हवाले कर देना चाहती है। पूंजीपतियों को कृषि क्षेत्र से भी अकूत मुनाफा दिलाने के लिए मोदी सरकार कृषि कानूनों को लेकर आयी है। साथ ही मजदूरों के अधिकारों को खत्म करने के लिये श्रम सुधारों के नाम पर 44 श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं को लायी है। इसलिए श्भारत बंदश् को मजदूरों की ट्रेड यूनियनों ने भी समर्थन दिया है। किसान महासभा के वरिष्ठ नेता भुवन जोशी जी ने संबोधित करते हुए कहा कि कृषि कानूनों में तेल, अनाज, दाल, आलू, प्याज को जमाखोरी के लिए छूट दे दी है। जिस कारण तेल कंपनियां तेल की जमाखोरी करके महंगे दामों पर बेच रही हैं। खाद्य तेल के दाम कृषि कानूनों के आने के बाद 1 साल के अंदर दोगुना हो गए हैं। कृषि कानूनों के कारण ही धान की फसल को पिछले साल कौडिय़ों के भाव निजी क्षेत्र के व्यापारियों ने खरीदा , जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की संयोजक बिंदु गुप्ता ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार लाये गए 3 कृषि कानून सिर्फ किसानों के लिए ही नही बल्कि देश की आम जनता, मेहनतकश गरीब लोगों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहे हैं। कृषि कानूनों के कारण खाद्य वस्तुओं में बेतहाशा महंगाई बड़ी है। पेट्रोल, डीजल, गैस पर मोदी सरकार द्वारा सब्सिडी खत्म कर ज्यादा टैक्स लगाने के कारण जनता त्रस्त है। मोदी सरकार लगातार किसान-मजदूर-छात्र विरोधी नीतियां लागू कर रही है और जनता का ध्यान हटाने के लिए धार्मिक साम्प्रदायिक विभाजन कर रही है। जुलूस में छात्र संगठन पछास के महेश, इंकलाबी मजदूर केंद्र के पंकज कुमार, ऐक्टू के किशन बघरी सहित विमला रौथाण , स्वरूप सिंह दानू, पुष्कर दुबडिय़ा, नैन सिंह कोरंगा, ललित जोशी, कमल जोशी, धीरज कुमार, त्रिलोक सिंह दानू, पंकज बिष्ट, निर्मला शाही, चंद्रशेखर पाठक, खीम वर्मा, शिव सिंह, नंदू, पीताम्बर तिवारी, सुधा देवी आदि शामिल रहे।

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